मनजिंदर सिरसा के साथ सुखबीर बादल की भी हुई हार! जानिए कैसे सरना बंधुओं ने उम्मीदों पर फेरा पानी

परमजीत सिंह सरना ने घोषणा की थी कि किसी भी सूरत में सिरसा को दोबारा अध्यक्ष नहीं बनने देंगे और इसमें वह कामयाब रहे हैं। दूसरी ओर शिअद बादल लाख कोशिश के बावजूद सरना को नामित सदस्य बनने से रोकने में असफल रहा है।

Mangal YadavWed, 22 Sep 2021 07:17 AM (IST)
हरविंदर सिंह सरना और मनजिंदर सिंह सिरसा की फाइल फोटो

नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। मनजिंदर सिंह सिरसा को दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) का सदस्य बनने के लिए अयोग्य करार दिए जाने से शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की भी हार हुई है। उन्होंने चुनाव हारने के बाद भी मनजिंदर सिंह सिरसा को डीएसजीएमसी अध्यक्ष बनाने की घोषणा ही नहीं की थी, बल्कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) से नामित सदस्य भी घोषित करा दिया था। उनकी इस कोशिश को दिल्ली की सिख सियासत के पुराने खिलाड़ी माने जाने वाले सरना बंधुओं ने नाकाम कर दिया है। अब बादल के सामने अपने सदस्यों को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

शिरोमणि अकाली दल दिल्ली (सरना) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने इस बार खुद चुनाव लड़ने के बजाय अपने छोटे भाई व पार्टी के महासचिव हरविंदर सिंह सरना को पंजाबी बाग से सिरसा के सामने उतारा था। वह खुद चुनाव प्रबंधन देख रहे थे। उनका यह दांव कामयाब रहा। पंजाबी बाग से जीत हासिल करने के साथ उन्होंने पिछले चुनाव की तुलना में अपनी पार्टी की सीट आठ से बढ़ाकर 14 तक पहुंचाने में कामयाब रहे।

वहीं, 25 अगस्त को चुनाव परिणाम घोषित होने के साथ ही बादल ने चुनाव हारने वाले सिरसा को एक बार फिर से अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर दी। उसी दिन एसजीपीसी ने उन्हें डीएसजीएमसी में अपना मनोनित सदस्य बनाने का पत्र जारी कर दिया गया। इससे उनके अध्यक्ष बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया था।

वहीं, परमजीत सिंह सरना ने घोषणा की थी कि किसी भी सूरत में सिरसा को दोबारा अध्यक्ष नहीं बनने देंगे और इसमें वह कामयाब रहे हैं। दूसरी ओर शिअद बादल लाख कोशिश के बावजूद सरना को नामित सदस्य बनने से रोकने में असफल रहा है।

हालांकि, इस कोशिश में उसने शिअद दिल्ली (सरना) के एक सदस्य को अपने पाले में कर लिया था। साथ ही संख्या बल नहीं होने के बावजूद अपने दो उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। शिअद बादल के पास 28 निर्वाचित सदस्य हैं और नामित सदस्य का चुनाव जीतने के लिए एक उम्मीदवार को 16 मत की जरूरत होती है।

शिअद बादल नेतृत्व को उम्मीद थी कि वह सरना के सदस्यों को तोड़ने में सफल रहेंगे, लेकिन उन्हें यहां भी शिकस्त मिली। सरना अपनी पार्टी व सहयोगियों को एकजुट रखकर बादल दल को झटका देते हुए आसानी से नामित सदस्य का चुनाव जीत गए। इसके साथ ही सिरसा को दोबारा अध्यक्ष बनाने की बादल की हसरत पूरी नहीं होने दी।

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