जानिए लाकडाउन के दौरान प्रदूषण के स्तरों में कितने पैमाने पर दर्ज की गई थी कमी, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

इस बीच दिल्ली में पीएम 2.5 के स्तर में 23 और पीएम-10 के स्तर में 41 फीसद की कमी आई। साथ ही ओजोन के स्तर में 12 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई। ओजोन के स्तर में बढ़ोत्तरी का कारण नाइट्रोजन आक्साइड के स्तर में कमी आना रहा।

Vinay Kumar TiwariMon, 27 Sep 2021 01:43 PM (IST)
लाकडाउन के दौरान देश भर के सभी शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर में कमी आई।

नई दिल्ली [राहुल चौहान]। कोरोना संकट की शुरुआत में हुए लाकडाउन के दौरान देश भर के सभी शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर में कमी आई। इसका कारण सीमित मानवीय गतिविधियों के कारण वाहनों का प्रयोग कम होना रहा। इस बीच दिल्ली में पीएम 2.5 के स्तर में 23 और पीएम-10 के स्तर में 41 फीसद की कमी आई। साथ ही ओजोन के स्तर में 12 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई। ओजोन के स्तर में बढ़ोत्तरी का कारण नाइट्रोजन आक्साइड के स्तर में कमी आना रहा। नाइट्रोजन आक्साइड और ओजोन एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं।

व्यस्ततम समय में जब नाइट्रोजन आक्साइड में कमी आती है तो ओजोन का स्तर बढ़ जाता है। साथ ही जैसे-जैसे लाकडाउन प्रतिबंधों में ढील दी जाने लगी, हर शहर में सल्फर डाई आक्साइड के स्तर में वृद्धि देखी गई। यह बात दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) में पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रो. डा. राजीव कुमार मिश्रा द्वारा अपनी टीम के साथ किए गए अध्ययन में सामने आई है। यह अध्ययन देश के पांच प्रमुख बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरू में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के फरवरी से मई 2019 के डाटा से तुलना करते हुए किया गया। इसमें लाकडाउन के समय 24 मार्च से 31 मई 2020 तक को शामिल किया गया। इस दौरान सामान्य समय और व्यस्ततम समय में वाहनों द्वारा होने वाले वायु प्रदूषण पर ध्यान केंद्रित किया गया।

कार्बन मोनो आक्साइड 19 फीसद कम अध्ययन से पता चला कि पांच अध्ययन स्थानों में औसत प्रदूषण में अधिकतम कमी नाइट्रोजन आक्साइड गैस में दर्ज की गई थी, जो 46 फीसद थी। वहीं, कार्बन मोनो आक्साइड 19 फीसद कम थी। साथ ही ओजोन और सल्फर डाई आक्साइड जैसे प्रदूषकों में कुल 41 फीसद और 40 फीसद की वृद्धि हुई है। इस दौरान बेंगलुरू में पीएम-10 के स्तर में 46, कोलकाता में 38 और मुंबई में 36 फीसद की कमी आई है। वहीं, 2.5 के स्तर में कोलकाता में 60, बेंगलुरू में 44, चेन्नई में 42 फीसद की कमी आई है। दिलचस्प बात यह है कि जहां, सभी गैसीय प्रदूषकों के स्तर में गिरावट दिखी वहीं दिल्ली के साथ ही चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरू में भी ओजोन के स्तर में 12 फीसद की वृद्धि हुई।

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