जानिए दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में सौर उर्जा संयंत्र लगाने के बाद किसानों को कैसे हो रहा दोहरा लाभ

कृषि विज्ञान केंद्र प्रायोगिक तौर पर बने सौर उर्जा संयंत्र के ऊपरी हिस्से में जहां सूरज की गर्मी से बिजली तैयार हो रही है वहीं संयंत्र के निचले हिस्से में सब्जी की खेती हो रही है। सब्जियों की खेती से भूमि हरा सोना उगल रही है।

Vinay Kumar TiwariMon, 20 Sep 2021 03:07 PM (IST)
कृषि विज्ञान केंद्र उजवा के परिसर में लगा सोलर पैनल, सौजन्य: कृषि विज्ञान केंद्र

नई दिल्ली [गौतम कुमार मिश्र]। जमीन तो जमीन अब आसमान भी किसानों की झोली भरने को तैयार है। मुख्यमंत्री आय बढ़ोतरी योजना के तहत उजवा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र प्रायोगिक तौर पर बने सौर उर्जा संयंत्र के ऊपरी हिस्से में जहां सूरज की गर्मी से बिजली तैयार हो रही है, वहीं संयंत्र के निचले हिस्से में सब्जी की खेती हो रही है। करीब आधे एकड़ में फैले इस संयंत्र में मध्य फरवरी से लेकर 31 अगस्त तक करीब 92 हजार यूनिट बिजली पैदा हो चुकी है। वहीं इसके नीचे यानि जमीन पर सब्जियों की खेती से भूमि हरा सोना उगल रही है।

अभी तक इस हिस्से में 40 किलो करेला, 30 किलो घीया, 30 किलो तोरी, 75 किलो पालक की पैदावार विज्ञानी ले चुके हैं। करीब एक क्विंटल ¨भडी भी यहां उगाई जा चुकी है। इससे करीब 31 किलो बीज बनाया जा चुका है। विज्ञानी इस सौर ऊर्जा व खेती के संयुक्त माडल को आम के आम गुठलियों के दाम करार दे रहे हैं। अच्छी बात यह है कि न सिर्फ दिल्ली, बल्कि दिल्ली के बाहर के किसान भी उजवा पहुंचकर विज्ञानियों से इस माडल की जानकारी ले रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के बागवानी विशेषज्ञ राकेश कुमार बताते हैं कि अब संयंत्र से सटे करीब आधे एकड़ जमीन पर हाइड्रोपोनिक्स विधि से खेती करने की तैयारी चल रही है।

क्या है मुख्यमंत्री आय बढ़ोतरी योजना

दिल्ली की हरित पट्टी के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाने हैं, लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब किसान अपनी जमीन पट्टे पर देने के लिए स्वीकृति देंगे। दिल्ली सरकार की इस महात्वाकांक्षी परियोजना को मुख्यमंत्री कृषि आय बढ़ोतरी योजना का नाम दिया गया है। किसान इस योजना को भलीभांति समझे, इस उद्देश्य से ही यहां प्रायोगिक संयंत्र लगाया गया है। सौर ऊर्जा संयंत्र में सोलर प्लेट इस तरह से लगाए गए हैं कि जमीन पर बागवानी होती रहे। इसके लिए सोलर प्लेट लोहे के खंभे पर लगाए गए हैं। नीचे किसान खेती कर सकेंगे।

हालांकि ऊपर प्लेट लगे होने के कारण जमीन पर धान या गेहूं की खेती नहीं हो सकेगी, लेकिन किसान यहां सब्जी या फूल लगा सकेंगे। विज्ञानियों का कहना है कि यहां बागवानी में कोई कठिनाई नहीं होगी। अभी किसानों को एक एकड़ में गेहूं या धान की खेती करने पर वर्ष में करीब 50 से 60 हजार की आमदनी होती है। इसके अलावा इसमें जोखिम भी रहता है। सौर ऊर्जा संयंत्र के एवज में किसानों को जमीन का किराया मिलेगा। इसके अलावा नीचे बागवानी के लिए विज्ञानी किसानों को प्रशिक्षण भी देंगे।

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