Delhi Metro Man E Sreedharan: जानिये- ई. श्रीधरन के बारे में, जिन्होंने दिल्ली-एनसीआर के लाखों लोगों को दी लाइफलाइन

ई-श्रीधरन की ही देन है कि दिल्ली मेट्रो के जरिये एनसीआर के तकरीबन 30 लाख रोजाना सफर करते हैं यह अलग बात है कि फिलहाल लॉकडाउन के चलते यात्रियों की संख्या बेहद कम है। कुलमिलाकर अपने कामों के चलते ई-श्रीधरन देश के किसी हीरो से कम नहीं हैं।

Jp YadavSat, 12 Jun 2021 10:40 AM (IST)
Delhi Metro Man E Sreedharan: जानिये- कैसे ई. श्रीधरन ने दिल्ली-एनसीआर के लाखों लोगों दी लाइफलाइन, बने देश के हीरो

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। Happy Birthday Metro Man E Sreedharan: देशभर में मेट्रो मैन के नाम से मशहूर ई-श्रीधरन 89 साल के हो गए। आज यानी 12 जून को ई-श्रीधरन का जन्मदिन है। मूलरूप से केरल के रहने वाले और पेश से सिविल इंजीनियर ईश्रीधरन को दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन दिल्ली मेट्रो को मूर्तरूप देने का श्रेय जाता है। वे 1995 से 2012 तक दिल्ली मेट्रो रेल निगम के निदेशक रहे और इन डेढ़ दशक के दौरान दिल्ली मेट्रो न केवल उत्तर प्रदेश के दो शहरों (नोएडा और गाजियाबाद), बल्कि हरियाणा के भी दो प्रमुख शहरों गाजियाबाद और नोएडा की शान बनी। दिल्ली मेट्रो फिलहाल दिल्ली के अलावा,एनसीआर के आधा दर्जन शहरों में दौड़ रही है। ई-श्रीधरन की ही देन है कि दिल्ली मेट्रो के जरिये दिल्ली-एनसीआर के तकरीबन 30 लाख रोजाना सफर करते हैं, यह अलग बात है कि फिलहाल लॉकडाउन के चलते यात्रियों की संख्या बेहद कम है। कुलमिलाकर अपने कामों के चलते ई-श्रीधरन देश के किसी हीरो से कम नहीं हैं। 

मेट्रोमैन' के नाम से मशहूर 89 वर्षीय ई. श्रीधरन को कोंकण रेल और दिल्ली मेट्रो समेत देश के कई बड़े मेट्रो प्रोजेक्ट में उनका अहम योगदान रहा है। तकरीबन 60 साल तक तकनीकी विद्वान के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले ई. श्रीधरन समय की पाबंदी के भी मिसाल हैं।  ई श्रीधरन ने बहुत कम समय के भीतर दिल्ली मेट्रो के निर्माण का कार्य किसी सपने की तरह बेहद कुशलता और श्रेष्ठता के साथ पूरा कर दिखाया है। देश के अन्य कई शहरों में भी मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी है, जिसमें श्रीधरन की मेधा, योजना और कार्यप्रणाली ही मुख्य निर्धारक कारक होंगे।

7 साल तक रहे थे दिल्ली मेट्रो के निदेशक

12 जून, 1932 को केरल राज्य में जन्में ई. श्रीधरन सिविल इंजीनियर हैं। उन्होंने देशभर में आधा दर्जन मेट्रो के निर्माण के साथ दिल्ली मेट्रो के सपने को हकीकत का जामा पहनाया। इस दौरान ई-श्रीधरन 1995 से 2012 तक दिल्ली मेट्रो के निदेशक रहे। इस दौरान दिल्ली मेट्रो को जिस तरह उन्होंने रफ्तार दी। मेट्रो मैन श्रीधरन ने नवंबर, 1997 में पहली बार डीएमआरसी की यूनिफॉर्म पहनी थी। आखिर बार 4 मार्च को श्रीधरन दिल्ली मेट्रो की यूनिफॉर्म में नजर आए थे। 

पीएम नरेंद्र मोदी के हैं मुरीद

ई श्रीधरन नरेंद्र मोदी के मुरीद हैं और यह जगजाहिर हैं। वर्ष 2014 में पीएम मोदी की तारीफ में कहा था- 'मोदी देश के सबसे योग्य और काबिल नेता हैं। देश का भविष्य उनके हाथों महफूज हाथों में रहेगा। दरअसल, देश की पहली मेट्रो सेवा कोलकाता मेट्रो की योजना भी उन्हीं की देन है। मेट्रो के लिए उनकी सर्विसेज को देखते हुए श्रीधरन को मेट्रो मैन के नाम से जाना जाता है।

साल 2001 में पद्म श्री और साल 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। साल 2005 में उन्हें फ्रांस सरकार ने Chavalier de la Legion d’honneur अवार्ड से सम्मानित किया। अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध पत्रिका टाइम मैग्जीन ने इन्हें एशिया हीरो का टाइटल भी दिया।

इसी साल मार्च महीने में ई. श्रीधरन ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के प्रधान सलाहकार के पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद दिल्ली मेट्रो ने भी इस इस्तीफे के पुष्टि करते हुए कहा था कि मेट्रो मैन श्रीधरन औपचारिक रूप से दिल्ली मेट्रो से अलग हो गए हैं। दरअसल, उन्होंने केरल विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दिया था। यह अलग बात है कि वे विधानसभा चुनाव बुरी तरह हार गए।

सिर्फ 46 दिन में किया 90 दिन का काम

बतौर सिविल इंजीनियर ई. श्रीधरन के नाम कई उपलब्धियां हैं। तमिलनाडु में श्रीधरन में 90 दिन का काम सिर्फ 46 दिन में पूरा करके अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। हुआ यूं तो दिसंबर, 1964 को आए समुद्री तूफान ने पम्बन ब्रिज (तमिलनाडु) को तबाह कर दिया था। यह महज इत्तेफाक था कि उस दौरान एक ट्रेन रेलवे ट्रैक पर ही थी। इस रेल हादसे में सैकड़ों यात्रियों की जान चली गई। इतना ही नहीं, पम्बन ब्रिज के 146 में से 125 गार्डर पानी में पूरी तरह से डूब गए। उस समय 32 वर्षीय सहायक इंजीनियर रहे ई. श्रीधरन को ब्रिज बनाने का काम सौंपा गया। दक्षिण रेलवे ने इस ब्रिज को बनाने के लिए 3 महीने का लक्ष्य तय किया था। वहीं, इस चुनौती का स्वीकार करते हुए युवा इंजीनियर श्रीधरन ने यह काम सिर्फ 46 दिन में ही पूरा कर दिया। इस तत्कालीन रेलमंत्री ने युवा इंजीनियर ई.श्रीधरन का 1000 रुपये नकद इनाम दिया था।

ई-श्रीधरन के बारे में खास बातें

ई श्रीधरन दिल्ली मेट्रो समेत पहले फ्रैट कॉरिडोर को समय से पहले मूर्त रूप देने के लिए जाने जाते हैं। ई श्रीधरन को 2001 में पद्म श्री और 2008 में पद्म विभूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2005 में फ्रांस सरकार ने ई श्रीधरन को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया था। अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध पत्रिका टाइम मैग्जीन ने ई. श्रीधरन को एशिया हीरो का टाइटल दिया था। 12 जून 1932 को केरल के पलक्कड़ में जन्में ई. श्रीधरन की प्रारंभिक शिक्षा पलक्कड़ के बेसल इवैंजेलिकल मिशन हॉयर सेकेंडरी स्कूल से हुई। फिर पालघाट के विक्टोरिया कॉलेज से पढ़ाई की है। ई श्रीधरन ने सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री आंध्र प्रदेश के काकीनाडा स्थित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज से प्राप्त की।

इन जगहों पर दी अपनी सेवाएं

दिल्ली मेट्रो रेल निगम कोच्चि मेट्रो लखनऊ मेट्रो लखनऊ मेट्रो रेल के वे मुख्य सलाहकार रहे। श्रीधरन को फरवरी, 2024 तक के लिए लखनऊ मेट्रो का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया था। जयपुर मेट्रो को भी अपनी सलाह दी।

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