जानिए दीवाली पर किन अजीब नियमों की वजह से प्रदूषण को रोकने में मात खाते है सरकारी महकमे

पर्यावरण संरक्षण के लिए और दिल्ली-एनसीआर गैस चैंबर न बने इसके लिए यह प्रतिबंध जरूरी और कारगर कदम हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या हम पटाखों के उत्पादन पर रोक लगा पाए? हम ये बात तो करते हैं कि पटाखे नहीं जलाएं लेकिन यदि पाबंदी लगानी है

Vinay Kumar TiwariWed, 20 Oct 2021 02:33 PM (IST)
1 जनवरी, 2022 तक दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने दिल्ली में पटाखों पर लगा रखा है प्रतिबंध।

नई दिल्ली, जागरण टीम। ये क्या बात हुई आपने प्राकृतिक नुकसान बताते हुए किसी चीज पर प्रतिबंध तो लगा दिया, लेकिन उसके उत्पादन पर कोई पाबंदी नहीं हो पाती। मतलब हम चोरबाजारी का रास्ता खुद ही छोड़ रहे हैं। हम यहां बात कर रहे हैं पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पटाखों पर लगाए गए प्रतिबंध की। बीते तीन साल की तरह इस बार भी दीवाली पर पटाखे जलाने पर पाबंदी कायम रहेगी।

पर्यावरण संरक्षण के लिए और दिल्ली-एनसीआर गैस चैंबर न बने, इसके लिए यह प्रतिबंध जरूरी और कारगर कदम हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या हम पटाखों के उत्पादन पर रोक लगा पाए? हम ये बात तो करते हैं कि पटाखे नहीं जलाएं, लेकिन, यदि पाबंदी लगानी है तो पटाखे नहीं बनाए पर जोर होना चाहिए। हम किसी भी नियम का पालन कराने की इसी प्रक्रिया के कारण मात खाते हैं क्योंकि हम उसके उत्पादन, उसकी बिक्री को नहीं रोकते, सिर्फ लोगों से अपेक्षा करते हैं कि वो इसका इस्तेमाल नहीं करें।

नियम बनाकर उस पर कार्रवाई की सख्ती ही कारगर उपाय है। सिर्फ पटाखे ही नहीं, पर्यावरण को स्वस्थ, स्वच्छ रखने के लिए और भी प्रतिबंध लगें, लेकिन खामी उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने में ही है। दावे की हकीकत ‘हवा’ है। जमीनी स्तर पर आखिर क्यों प्रबलता से नियमों को लागू नहीं कर पाते।

हर साल दीवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए पटाखों पर प्रतिबंध की बात की जाती है। पटाखों के भंडारण व उत्पादन करने वालों पर सख्त कार्रवाई के दावे भी किए जाते हैं, बावजूद इसके दीवाली पर जमकर आतिशबाजी होती है। पटाखों के कारण हर साल दीवाली के बाद वायु व ध्वनि प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो जाती है और पूरा दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण की जद में आ जाता है।

6 अक्टूबर, 2021

देश में बढ़ते वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि लोग मनाही के बावजूद आतिशबाजी करते हैं, जिससे स्थिति और ज्यादा बिगड़ती है। देश में हर दिन जश्न मनाए जाते हैं। जश्न मनाना अच्छी बात है, जरूर मनाना चाहिए, लेकिन जश्न में आतिशबाजी की जाती है जो ठीक नहीं है।

23 अक्टूबर 2018

सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे बनाने, बेचने और उन्हें फोड़ने पर पूरी तरह बैन लगाने से इन्कार किया। ग्रीन पटाखे यानी पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाले पटाखों को बनाने और बेचने की दी थी अनुमति।

28 सितंबर, 2021

कोर्ट ने कहा शादी, त्योहारों और विजय जुलूसों में धड़ल्ले से पटाखे चल रहे हैं। हजारों-हजार पटाखों की लड़ियां जलाई जा रही हैं। जिन पर कोर्ट के आदेश के पालन की जिम्मेदारी है, वह भी उसका उल्लंघन कर रहे हैं। प्रशासन की जवाबदेही तय करनी होगी।

यहां चोरी छिपे होता है पटाखों का अवैध कारोबार

गाजियाबाद में फरुखनगर पूरे एनसीआर में पटाखा बनाने, बेचने व भंडारण की दृष्टि से सबसे अधिक संवेदनशील है। पूरे एनसीआर में यहां से पटाखों की खेप भेजी जाती है। सख्ती के बावजूद यहां पटाखे बनाने का काम जारी है। गांव में कहीं बंद दरवाजे के पीछे पटाखे बनते मिल रहे हैं तो कहीं पुराने खंडहरों में पटाखों को छिपा कर रखा जा रहा है। हाल में ही यहां छापेमारी कर बड़ी मात्र में पटाखे पकड़े गए थे। गुरुग्राम में पटाखों का निर्माण तो नहीं होता, पर गोदामों में भंडारण जरूर होता है। पिछले साल कादीपुर इलाके में बने 10 गोदाम सील कर दिए गए थे।

सीपीसीबी द्वारा दिल्ली-एनसीआर में लगाए गए प्रतिबंध और निर्देश

- होटलों और रेस्त्रं में कोयले व लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक

- दिल्ली-एनसीआर में ईंट भट्ठे बंद

- बस और मेट्रो सेवाओं के संचालन की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने के निर्देश

- हर पखवाड़े सड़कों के किनारे पानी का हो छिड़काव। मैकेनिकल तरीके से की जाए सफाई

- निर्माण गतिविधियों में धूल नियंत्रण के लिए नियमों का सख्ती से हो पालन व गैर-अनुपालन वाली साइटों को बंद किया जाए

- लैंडफिल और अन्य स्थानों पर कचरा जलाने पर रोक। उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना का प्रविधान

- प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को जब्त कर लगाया जाए जुर्माना

- चिह्न्ति संवेदनशील क्षेत्रों में यातायात के सुचारु प्रवाह के लिए यातायात पुलिस के जवान तैनात किए जाएं

1105 साइट्स का औचक निरीक्षण किया गया दिल्ली में 18 अक्टूबर, 2021 तक

286 पर नियमों का उल्लंघन होते पाया गया

90 लाख का लगाया गया है जुर्माना

200 जगहों पर निरीक्षण कर रही पर्यावरण विभाग की टीम

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