दिल्ली की इस दुकान पर नाम देखते ही ठहर जाते हैं लोग, कई राज्यों से मिठाई खरीदने आते हैं लोग; 50 तरह का मिलता है पेठा

आगरा के पागलखाने वालों की दुकान में वैसे तो कई तरह की मिठाइयां मिलती हैं लेकिन सावन में यहां मिलने वाले घेवर की खुशबू लोगों को यहां खींच लाती है। दुकानदार विजय गुप्ता ने बताया कि सावन के लिए विशेष घेवर बनाए जाते हैं।

Mangal YadavSun, 01 Aug 2021 06:05 PM (IST)
अजीबोगरीब दुकान का नाम लाता है चेहरे पर मुस्कान

नई दिल्ली [शिप्रा सुमन]। आगरा का पेठा तो आपने कई बार खाया होगा लेकिन 'आगरा के पागलखाने वालों की मशहूर दुकान' की मिठाई नहीं खाई तो दिल्ली के पूठकलां कंझावला रोड जरूर आएं। दुकान का यह अजीबोगरीब नाम ही यहां से गुजरने वालों को वहां रुकने के लिए मजबूर करता है। दुकान का नाम पढ़ते ही लोगों के चेहरे पर यकायक मुस्कान आ जाती है और थोड़ी देर के लिए यहां रुक जाते हैं। दुकान अपने नाम की वजह से ही न केवल आसपास के गांवों बल्कि हरियाणा में भी जाना जाता है। नाम को लेकर थोड़ी देर की हंसी ठिठोली के बीच दिल्ली में आगरे के पेठे का स्वाद लोगों को पूरा पूरा मिलता है।

इस वजह से दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों से लोग यहां मिष्ठान के स्वाद के लिए आते हैं। मीठे के शौकीन लोग हरियाणा, फरीदाबाद व यूपी से भी यहां पहुंचते हैं।

हंसने के बहाने

विजय गुप्ता कहते हैं कि वह पिछले 20 वर्षों से यह दुकान चला रहे हैं। वर्ष 1958 में वह आगरा से दिल्ली आए थे। वहीं आगरा में उनकी पेठे की दुकान वर्ष 1933 से चली आ रही थी। दुकान के नाम को लेकर उनका मानना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में दो पल की हंसी बहुत जरूरी है इसलिए उन्होंने अपने दुकान के लिए ऐसा नाम चुना ताकि लोगों का हंसने का बहाना मिल जाए। साथ ही यह नाम लोगों को अपनी ओर आकर्षित भी करता है।

सावन के महीने में घेवर का स्वाद

आगरा के पागलखाने वालों की दुकान में वैसे तो कई तरह की मिठाइयां मिलती हैं लेकिन सावन में यहां मिलने वाले घेवर की खुशबू लोगों को यहां खींच लाती है। दुकानदार विजय गुप्ता ने बताया कि सावन के लिए विशेष घेवर बनाए जाते हैं। इसकी बिक्री जन्माष्टमी के 15 दिनों बाद तक होती है। इसमें मुख्य रूप से केसर घेवर, मलाई घेवर और दूध घेवर की मांग रहती है। वह कहते हैं कि हरियाली तीज और रक्षा बंधन को लेकर घेवर की खरीदारी सबसे ज्यादा होती है। त्योहार के मौसम में अधिक बिक्री होती है। मिठाइयों की कीमत 130 से 320 रुपये किलो होती है।

50 तरह का पेठा

विजय गुप्ता के अनुसार उनकी दुकान में पेठे करीब 50 तरह होते हैं। इनमें पेठा पान, पेठा समोसा, पेठा रसभरी, पेठा आरेंज, पेठा अंगूरी, पेठा अमरूद, पेठा लीची सहित अलग अलग फलों के स्वाद से भरा पेठा मिलता है। इसके अलावा सूखे मेवे और रवड़ी पेठा मिलता है। समोसे का आकार देकर बनाये जाने वाले पेठे में खोया भरा जाता है। जिसे लोग खूब पसंद करते हैं। इसकी बिक्री पूरे साल होती हैं।

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