दिल्ली बार्डर पर क्या खत्म हो जाएगा धरना? फैसले के लिए संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक जारी

Kisan Andolan Meeting LIVE दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बार्डर (कुंडली बार्डर) पर एक साल से चल रहे आंदोलन की आगामी रणनीति को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की एक अहम बैठक जारी है। इसमें कई अहम निर्णय लिए जा सकते हैं।

Jp YadavSat, 04 Dec 2021 07:58 AM (IST)
Kisan Andolan: किसान आंदोलन खत्म होगा फिर जारी रहेगी दिल्ली-एनसीआर के लोगों की परेशानी, आज होगा फैसला

नई दिल्ली/सोनीपत/गाजियाबाद [नंदकिशोर भारद्वाज]। तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के रद होने के बाद भी दिल्ली-एनसीआर के चारों बार्डर किसानों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच किसान अब न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग पर अड़ गए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा अहम बैठक शुरू हो गई है, जिसमें किसान आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर अहम निर्णय लिया जा सकता है। जागरण संवाददाता संजय निधि के मुताबिक, दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बार्डर (कुंडली बार्डर) पर एक साल से चल रहे आंदोलन की आगामी रणनीति को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की एक अहम बैठक जारी है। इस बैठक में होने वाले फैसलों पर देशभर के लोगों की नजरें टिकी हैं। बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति को तय करने के महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे।

Meeting Highlights 

फिलहाल दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बार्डर पर बैठे किसान एमएसपी की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि हमें एमएसपी पर आश्वासन नहीं कानून चाहिए। संयुक्त किसान मोर्चा की अहम बैठक दोपहर बाद होगी।  आंदोलन की दिशा तय करने संबंधी निर्णय हो सकता है, देशभर की नजरें टिकी कुंडली बार्डर पंजाब की 32 जत्थेबंदियों समेत मोर्चा के 40 नेता लेंगे भाग दोपहर में होने वाली बैठके बाद प्रेसवार्ता कर जानकारी देंगे नेता मांगें नहीं माने जाने तक आंदोलन चलने की बात कह रहा एसकेएम एसकेएम की बैठक के पहले हरियाणा के संगठन बैठक कर करेंगे मंथन यह मोर्चा की बैठक में जाने से पहले अपनी रणनीति बनाएंगे बैठक में युद्धविर सिंह, इंद्र सिंह और अभिमन्यु कोहाड़ समेत कई नेता करेंगे बैठक संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में भाग लेने के लिए राकेश टिकेट सिंघु बार्डर पहुंचे। बैठक में मनजीत राय बलबीर सिंह सतनाम अजनाला आदि किसान नेता पहुंचे कुछ ही देर में शुरू होगी संयुक्त किसान मोर्चा की बैठ

गौरतलब है कि सिंघु बार्डर पर एक साल से कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन चल रहा है। अब तीनों कृषि कानून निरस्त हो चुके हैं लेकिन आंदोलन अभी भी जारी है। एसकेएम ने 21 नवंबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मोर्चा की छह मांगों को पूरा करने की अपील की थी। पत्र की लिखी गई लंबित मांगों में एमएसपी गारंटी कानून को लेकर कमेटी के गठन, किसानों पर दर्ज मुकदमे रद करना, आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों को मुआवजा और उनके आश्रितों का पुनर्वास, शहीदों का स्मारक बनाए जाने के लिए कुंडली बार्डर पर जगह देना शामिल हैं। आंदोलन में शामिल पंजाब की 32 जत्थेबंदियों के नेता भी अब आंदोलन को खत्म करने के पक्ष में हैं लेकिन ये नेता मांगें पूरी होने आंदोलन समाप्त नहीं करना चाहते थे। अब शनिवार को कुंडली बार्डर पर एसकेएम की एक अहम बैठक होगी। इसमें आंदोलन चलेगा या नहीं, चलेगा तो इसका स्वरूप क्या होगा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला लिया जा सकता है।

गंभीर श्रेणी के मुकदमों की भी वापसी चाह रहे किसान संगठन

मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार की ओर से किसानों पर दर्ज मुकदमों में से सामान्य घटनाओं से जुड़े केस वापस लेने पर सहमति बन गई थी। कई मुकदमे ऐसे हैं, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं। किसान चाहते थे कि सभी मुकदमों को रद किया जाए, जबकि केसकोर्ट में चल रहे हैं।

उधर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा तीन कृषि कानून वापस लेने के बाद हरियाणा सरकार और संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के बीच हुई वार्ता के खास नतीजे सामने नहीं आ सके। संयुक्त किसान मोर्चा के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा के दिवंगत किसानों को मुआवजा देने, उनके परिजनों को नौकरी दिए जाने तथा किसानों पर दर्ज तमाम मुकदमे वापस लेने की मांग सरकार के समक्ष रखी। सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बिना शर्त किसानों की सबसे बड़ी मांग मान ली है। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी संबंधी कानून बनाने के लिए केंद्रीय कमेटी के गठन की दिशा में सरकार पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ रही है। ऐसे में अब आंदोलन को बरकरार रखने का कोई औचित्य नहीं है।

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