Delhi riots 2020: युवक की हत्‍या कर नाले में शव फेंकने के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पांच लोगों पर तय किए आरोप

दिल्ली दंगे के दौरान हत्या कर युवक का शव नाले में फेंकने के एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पांच लोगों पर आरोप तय किए हैं। पिछले साल फरवरी में दंगे के बाद करावल नगर इलाके के शिव विहार गंदे नाले में एक युवक का शव मिला था।

Jagran News NetworkThu, 16 Sep 2021 10:40 AM (IST)
दिल्ली दंगे के दौरान हत्या कर युवक का शव नाले में फेंका, कोर्ट ने पांच लोगों पर तय किए आरोप।

नई दिल्‍ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली दंगे के दौरान हत्या कर युवक का शव नाले में फेंकने के एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पांच लोगों पर आरोप तय किए हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव के कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर आरोपित दिलीप कुमार, दिनेश कुमार, कुलदीप, लखपत राजौरा और योगेश के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। चश्मदीद के अलावा गवाहों के बयान हैं, जिन्हें दरकिनार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने गवाहों के बयान देरी से दर्ज किए जाने की बचाव पक्ष की आपत्ति को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दंगे के वक्त लोग डरे और सहमे हुए थे। पिछले साल फरवरी में दंगे के बाद करावल नगर इलाके के शिव विहार गंदे नाले में एक युवक का शव मिला था। बाद में युवक की पहचान बिजनौर निवासी आताफ के रूप में हुई थी। जांच के दौरान क्राइम ब्रांच को पता चला कि आताफ शिव विहार 33 फुटा रोड स्थित देवी नगर गली नंबर-दो में एक फैक्ट्री में काम करते थे और वहीं रहते थे। इस मामले में कोर्ट ने आरोपित दिलीप कुमार, दिनेश कुमार, कुलदीप, लखपत राजौरा और योगेश के खिलाफ भादसं की धारा 147 (दंगा करने), 148 (घातक हथियार इस्तेमाल करने), 149 (गैर कानूनी समूह में समान मंशा से अपराध करने), 153ए (विभिन्न संप्रदायों के बीच घृणा पैदा करने ), 302 (हत्या करने), 436 (संपत्ति या उपासना स्थल को आग लगाने), 505 (अफवाह फैलाने), 120बी (साजिश रचने) का आरोप तय किया है।

सुनवाई के लिए मामले को सत्र न्यायालय भेजा : दयालपुर इलाके में दंगे के दौरान आग लगाने के एक मामले में मुख्य महानगर दंडाधिकारी अरुण कुमार गर्ग के कोर्ट ने आरोपित फिरोज खान और अनवर पर लगे दंगा करने व अन्य के आरोप पर संज्ञान लिया है। जबकि आगजनी के आरोप पर (भादसं की धारा 436) सुनवाई के मामले को सत्र न्यायालय भेज दिया है।

दो आरोपितों को मिली जमानत: दंगे में गोली चलाने के दो आरोपितों शिव व नितिन को दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत दे दी कि पीड़ित को लगी चोट बंदूक की गोली से नहीं बल्कि पत्थर से लगी है। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की पीठ ने कहा कि अदालत के समक्ष पेश की गई सामग्री से पता चलता है कि पीड़ित अजीम को पत्थर से चोट लगी है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो मुचलके भरने पर नियमित जमानत दी जाती है। अभियोजन पक्ष ने दलील दी थी कि आरोपित शिव और नितिन घातक हथियार से लैस थे और गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास किया था। वहीं आरोपितों की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता प्रीतिश सबरवाल ने कहा कि ब्रह्मपुरी में घटना स्थल पर दोनों पक्षों के बीच पथराव और गोलीबारी हुई, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में नितिन की पहचान नहीं हुई। शिव को हवा में फायरिंग करते देखा गया, लेकिन किसी पीड़ित को गोली लगने से कोई चोट नहीं आई है।

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