Jamia Admission 2021: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पीएचडी आफलाइन प्रवेश परीक्षा शुरू

Jamia Admission 2021 जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर मंगलवार को पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आफलाइन प्रवेश परीक्षा शुरू हो गई। दो पालियों में आयोजित परीक्षा के दौरान कोरोना के दिशानिर्देशों का पालन किया गया।

Mangal YadavWed, 23 Jun 2021 07:05 AM (IST)
मास्क और सैनिटाइजर लेकर आए अभ्यर्थियों को ही प्रवेश

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर मंगलवार को पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आफलाइन प्रवेश परीक्षा शुरू हो गई। दो पालियों में आयोजित परीक्षा के दौरान कोरोना के दिशानिर्देशों का पालन किया गया। यह इस साल जामिया की ओर से आयोजित पहली आफलाइन मोड परीक्षा है। प्रवेश परीक्षा 28 जून तक चलेगी। जामिया की कुलपति प्रो. नजमा अख्तर ने कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए विश्वविद्यालय के लिए सफलतापूर्वक प्रवेश परीक्षा शुरू कर पाना बड़ी चुनौती थी, लेकिन यह जरूरी भी थी। मंगलवार को मानविकी एवं भाषा संकाय तथा वास्तुकला में पीएचडी प्रवेश परीक्षा हुई। विभिन्न विभागों में पीएचडी के लिए कुल 12 हजार उम्मीदवारों ने आवेदन किया है।

मास्क और सैनिटाइजर लेकर आए अभ्यर्थियों को ही प्रवेश

परीक्षा से एक दिन पहले परीक्षा केंद्रों को सैनिटाइज किया गया। परीक्षार्थियों को पानी की बोतल व पाकेट साइज हैंड सैनिटाइजर लाने व मास्क लगाकर आने को कहा गया था। तापमान जांचने के बाद ही उन्हें प्रवेश दिया गया। परीक्षा कक्ष में शारीरिक दूरी के साथ बैठने की व्यवस्था की गई। परिसर में विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर बैठने के लिए कुर्सियों व पेडस्टल पंखे आदि के साथ अभिभावकों के लिए प्रतीक्षालय भी बनाए गए हैं।

वाराणसी निवासी प्रोफेसर बीडब्लू पांडेय डीयू में बने डीन

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के डीन (इंजीनिय¨रग एंड वर्क) के पद पर प्रो. बीडब्लू पांडेय को नियुक्त किया गया है। मंगलवार को डीयू के कुलपति प्रो. पीसी जोशी ने उनकी नियुक्ति की। प्रो. पांडेय मूलरूप से वाराणसी के चोलापुर ब्लाक के सुल्तानीपुर गांव के रहने वाले हैं। वह डीयू के जुबली हाल हास्टल के वार्डन, डीयू के ही सीवीसी (कालेज आफ वाकेशनल स्टडीज) के गवर्निंग बॉडी के सदस्य और दिल्ली विश्वविद्यालय प्रेस के विशेष कार्याधिकारी भी रहे हैं। वाराणसी जिले के अत्यंत पिछड़े गांव से संबंध रखने वाले प्रोफेसर पांडेय ने बताया कि गांव में बिजली तक नहीं थी। ऐसे में उन्होंने डिबरी की रोशनी में पढ़ाई करते थे।

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