दिल्ली-NCR में कोरोना के मामले बढ़ते ही कमजोर पड़ गया स्वास्थ्य सुविधाओं का ढांचा

क्या यहां कोई बड़ा सरकारी अस्पताल नहीं बनाया जा सकता?

दिल्ली-एनसीआर में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मामले की गंभीरता और स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के भी हाथ पैर फूल रहे हैं। लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं।

Mangal YadavWed, 21 Apr 2021 01:09 PM (IST)

नई दिल्ली। दिल्ली तू फिर डराने लगी, मुंबई जैसे हालात से निराशा फैलाने लगी। इस बार तो संक्रमण बढ़ने के सारे कीíतमान स्थापित हो गए। एक दिन में 25 हजार से अधिक मरीज आने लगे। लेकिन अभी कुछ माह पहले की तो बात है, सब सामान्य हालात मानकर जीवन में आगे बढ़ने लगे थे। अब कोरोना संक्रमण नए-नए लक्षण, म्यूटेशन, परिवर्तन के साथ एक बार फिर तेजी से फैलने लगा है। हालात बद से बदतर हो रहे हैं। सरकार लाकडाउन लगाने को विवश हो गई।

हालात देखकर यह कहा जा सकता है कि पिछले साल जहां थे एक साल बाद फिर वहीं आ गए। मतलब हम महामारी के उस पहले प्रारूप से एक साल में भी सबक नहीं ले सके, यदि सबक लिया होता तो आज संक्रमण इतनी तेजी से नहीं फैल रहा होता। पिछले साल संक्रमण बढ़ने पर जैसी अस्पतालों की स्थिति थी अब भी वही है। यदि सबक लिया होता तो एक बेड पर दो मरीज हांफते हेल्थ सिस्टम की तस्वीर पेश नहीं कर रहे होते। आक्सीजन, दवा, बेड, वेंटिलेटर आदि का अभाव नहीं होता। लापरवाही सरकार और जनता जर्नादन दोनों की है।

हम महामारी के उस भयावह संकेत के बाद भी क्यों नहीं सचेत हुए? क्यों नहीं स्वास्थ्य सुविधाओं के ढांचे को मजबूत बना सके? हर दिन होती देरी, दोगुनी होती संक्रमण दर विफलता और कमजोर स्वास्थ्य सिस्टम का ही संकेत है। लोगों ने भी कोरोना नियमों का पालन करना छोड़ दिया। एक राज्य और शहर के लिए किसी भी सरकार की पहली प्राथमिकता होती है मजबूत स्वास्थ्य ढांचा। लेकिन वह कितनी प्राथमिकता में है उसकी तस्दीक दिल्ली-एनसीआर का क्षेत्र ग्रेटर नोएडा वेस्ट करता है। जहां फिल्म सिटी बनाने की पूरी कागजी तैयारी हो गई है। एक कतार में शापिंग माल बन गए हैं। उस लाखों लोगों की आबादी वाले शहर में दूर-दूर तक कोई अस्पताल नहीं दिखेगा। कुल मिलाकर निजी निर्माण को भरपूर जमीन उपलब्ध है। क्या यहां कोई बड़ा सरकारी अस्पताल नहीं बनाया जा सकता?

आखिर सरकार का दायित्व स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति इतना लचर कैसे हो सकता है? दिल्ली को स्वास्थ्य की राजधानी की नजीर के तौर पर देखा जाता है। जहां तमाम बड़े अस्पताल हैं। जटिल बीमारियों के इलाज को दूसरे राज्यों के लोग देश की राजधानी की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखते हैं। आखिर इसी राजधानी में सिस्टम इतना कमजोर पड़ गया कि संक्रमण की रफ्तार पिछले वर्ष की भांति मुंबई की तरह ही हो गई। स्वास्थ्य सुविधाओं ढांचा कमजोर पड़ गया? इसी की पड़ताल करना हमारा आज का मुद्दा है।

दिल्ली-एनसीआर में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मामले की गंभीरता और स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के भी हाथ पैर फूल रहे हैं। लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। बीते वर्ष भी जब कोरोना ने कहर बरपाना शुरू किया तब भी स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी से लोगों को जूझना पड़ा था। आमतौर पर ऐसी आपदाओं से लोग सबक लेते हैं और आगे के लिए सतर्क हो जाते हैं, लेकिन दिल्ली एनसीआर में वर्तमान समय में अस्पतालों, बेड, वेंटिलेटर और आक्सीजन के लिए जिस तरह से हाहाकर मचा है उससे साफ है कि बीते वर्ष से कोई सबक नहीं लिया गया। किस तरह बढ़ रहा है संक्रमण, अस्पतालों में कैसी है सुविधाएं, बेड, आक्सीजन और वेंटिलेटर की क्या है स्थिति, पिछले वर्ष कैसे थे हालात जानेंगे आंकड़ों की जुबानी-

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