अब घर बैठे पानी की बूंदों से बनाइए बिजली, IIT दिल्ली के विज्ञानियों ने कैसे किया ये कारनामा

प्रो. नीरज खरे नैनोजनरेटर कुछ मिलीवाट बिजली पैदा करेगा। इसकी मदद से छोटे विद्युत उपकरण जैसे घड़ी डिजिटल थर्मामीटर रेडियो हेल्थ केयर सेंसर पैडोमीटर चार्ज किया जा सकेगा। प्रो. खरे ने बताया कि ट्रायल के दौरान पाया गया कि समुद्र के खारे पानी से अपेक्षाकृत अधिक बिजली पैदा हुई।

Prateek KumarSat, 18 Sep 2021 06:05 AM (IST)
डिजिटल उपकरण को चार्ज करने में सक्षम होगा नैनोजनरेटर।

नई दिल्ली [संजीव कुमार मिश्र]। इलेक्ट्रानिक उपकरणों का उपयोग दिनों- दिन बढ़ता जा रहा है। यात्रा, कार्यालय आदि में इन उपकरणों के चार्जिंग की समस्या से कई बार आपको भी दो-चार होना पड़ा होगा। लेकिन, बहुत जल्द छोटे विद्युत उपकरणों को आप आसानी से कहीं भी चार्ज कर सकेंगे। यह संभव होगा नैनोजनरेटर के जरिए। जी हां, आइआइटी दिल्ली के विज्ञानियों ने एक ऐसा नैनोजनरेटर बनाया है जो पानी की बूंदों को बिजली में परिवर्तित करेगी। नैनोजनरेटर ना केवल बिजली बनाता है बल्कि कुछ मिलीवाट बिजली संग्रहित करेगा। जिसकी मदद से इलेक्ट्रानिक उपकरण चार्ज किए जा सकेंगे।

भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. नीरज खरे ने बताया कि बारिश की बूंदे, पानी की भाप यहां तक की समुद्र की लहरों से बिजली बनाई जा सकेगी। तीन साल तक शोध के बाद विज्ञानियों ने लिक्विड सालिड इंटरफेस ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजनरेटर बनाया है।

बकौल प्रो. नीरज खरे ट्राइबोइलेक्ट्रिक इफेक्ट और इलेक्ट्रोस्टैटिक इंडक्शन विधि से बिजली बनेगी। इस डिवाइस का डिजाइन बहुत ही साधारण है। यह ट्राइबोइलेक्ट्रिक इफेक्ट पर आधारित है। ट्राइबोइलेक्ट्रिक में दो सतहों के बीच संपर्क होने पर घर्षण होता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण हम कंबल के रूप में देख सकते हैं। सर्दियों में कई बार कंबल, जैकेट को रगड़ने पर जगमगाती लाइटें दिखती हैं। यह डिवाइस भी इन्ही नियम पर काम करता है। इसमें एक नैनो कंपोजिट पालीमर फिल्म और दो इलेक्ट्रोड लगे होते हैं। डिवाइस की सतह खुरदरी है। इनकी मदद से पानी की बूंदों से बिजली बनती है। डिवाइस बिजली का संग्रहण भी करेगा।

इलेक्ट्रानिक उपकरण होंगे चार्ज

बकौल प्रो. नीरज खरे नैनोजनरेटर कुछ मिलीवाट बिजली पैदा करेगा। इसकी मदद से छोटे विद्युत उपकरण जैसे घड़ी, डिजिटल थर्मामीटर, रेडियो, हेल्थ केयर सेंसर, पैडोमीटर चार्ज किया जा सकेगा। प्रो. खरे ने बताया कि ट्रायल के दौरान पाया गया कि समुद्र के खारे पानी से अपेक्षाकृत अधिक बिजली पैदा हुई। इसे भारत में पेटेंट कराने के लिए आवेदन किया जा चुका है।

 

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