आप भी हैं घुटनों के दर्द से परेशान तो पढ़ ले ये खबर, मिल जाएगा दर्द से छुटकारा, करना होगा ये काम

इन परेशानियों में से एक गंभीर परेशानी घुटनों में दर्द की है। बीमारी से निजात पाने के लिए लोग चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श लेते रहते हैं पर कई बार ऐसी स्थिति सामने आई है कि है लोग जो दवा खाते हैं उसका असर कुछ घंटों तक ही रहता है।

Vinay Kumar TiwariFri, 15 Oct 2021 11:55 AM (IST)
इन परेशानियों में से एक गंभीर परेशानी घुटनों में दर्द की है जिससे आज कई लोग जूझ रहे हैं।

नई दिल्ली [मनीषा गर्ग]। आज के बदलते परिवेश में लोगों की जीवनशैली में परिवर्तन के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधित कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन परेशानियों में से एक गंभीर परेशानी घुटनों में दर्द की है जिससे आज कई लोग जूझ रहे हैं। इस बीमारी से निजात पाने के लिए लोग चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श लेते रहते हैं पर कई बार ऐसी स्थिति सामने आई है कि है लोग जो दवा खाते हैं उसका असर कुछ घंटों तक ही रहता है। ऐसा ही एक मामला है जिसमें घुटनों के जोड़ों में दर्द की समस्या से जूझ रहे राजस्थान के अलवर निवासी अजय शर्मा (42) को सीढ़ियां चढ़ने, बस में चढ़ने, नीचे बैठने तक में परेशानी होती थी।

शुरुआत में उन्होंने एक माह तक चिकित्सा विशेषज्ञ से ऐलोपेथिक दवाइयां ली। पर हर बार दवा लेने के दो-तीन घंटे बाद दवा का असर खत्म होने पर दर्द दोबारा शुरू हो जाता था। इस बीच वे एक स्वजन के माध्यम से खैरा डाबर स्थित चौ. ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेदिक संस्थान पहुंचे, जहां विशेषज्ञों ने उनकी जांच के बाद उन्हें 10 ग्राम काले तिल और 10 ग्राम लाल सरसों के मिश्रण से तैयार लेप को दिन में दो बार लगाने के साथ में लाक्षा गुग्गुलु दवा का दिन में तीन बार गर्म पानी से सेवन करने का सुझाव दिया।

45 दिन से लगातार अजय इलाज प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं और काफी खुश हैं, क्योंकि अब उन्हें घुटनों में दर्द की समस्या पहले से कम है और वे अब आसानी से सीढ़ियों पर चढ़ जाते हैं। अजय बताते हैं कि ऐलोपेथिक चिकित्सकों की दी गई दर्द निरोधक दवाओं के सेवन करने पर मन में डर था कि कहीं किडनी पर इनका दुष्प्रभाव न हो जाए, लेकिन आयुर्वेद में ऐसा कोई डर नहीं है। आमतौर पर आयुर्वेद में घुटने में दर्द की समस्या यानि आस्टियोअर्थराइटिस के लिए दशांग लेप और लाक्षा गुग्गुलु दवा का ही प्रयोग किया जाता है।

हाल ही में हुई रिसर्च में काले तिल और लाल सरसों के मिक्षण से तैयार लेप के ज्यादा बेहतर परिणाम सामने आए हैं। काया चिकित्सा विभाग में स्नातकोत्तर के विद्यार्थी और शोधकर्ता डा. प्रतीक मदान ने बताया कि ओपीडी में आस्टियोअर्थराइटिस की समस्या लेकर आए 40 मरीजों को चिन्हित कर और उन्हें दो ग्रुप में विभाजित किया गया। जिसमें ग्रुप-ए के 20 मरीजों का 45 दिन तक दशांग लेप और गुग्गुलु लाक्षा इलाज पद्धति से इलाज किया गया।

बेहतर होगा जीवनस्तर

डा. प्रतीक ने बताया कि 20 ग्राम दशांग लेप को दिन में दो बार घुटने के ऊपर दो-दो घंटे तक लगाकर रखना है। ठीक इसी प्रकार दस ग्राम काले तिल और दस ग्राम लाल सरसों को पीसकर तैयार लेप को भी दिन में दो बार घुटने के ऊपर दो-दो घंटे तक लगाकर रखना है। लेप के साथ गर्म पानी के साथ दिन में तीन बार लाक्षा गुग्गुलु दवा लेनी है। 15 दिन की जांच के बाद ही मरीजों को दर्द में काफी आराम मिला है। डा. प्रतीक बताते हैं कि ऐलोपेथ चिकित्सा पद्धति में आस्टियोअर्थराइटिस के मरीजों को लंबे समय तक दर्द की दवाएं दी जाती है और परेशानी बढ़ने पर घुटना प्रत्यारोपण ही अंतिम सलाह है, लेकिन ये दोनों ही इलाज प्रक्रिया स्थायी नहीं है और स्वास्थ्य पर भी इनका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। दूसरा आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए घुटना प्रत्यारोपण कराना सरल नहीं है। इन सब के बीच आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में मरीज को दर्द से आराम मिलता है।

आराम मिलने पर मरीज इलाज को कर सकते हैं बंद: डा. योगेश

काया चिकित्सा विभाग में सह आचार्य डा. योगेश पांडे ने बताया लगातार उपयोग में आने के कारण घुटने के विभिन्न अवयवों में सूजन आने लगती है प्रारंभ में शरीर स्वयं ही इसको बेअसर करता रहता है, लेकिन कालांतर में शरीर की यह प्रक्रिया निष्प्रभावी हो जाती है। तब जोड़ों में निरंतर शूल एवं शोथ रहने लगता है जिससे जोड़ों का पोषण प्रभावित होता है। पोषण के अभाव में स्थानिक रूप से वात का प्रकोप होता है जिससे की दर्द बढ़ जाता है। काले तिल और लाल सरसों के मिश्रण से तैयार लेप से जोड़ों में स्निग्ध एवं उष्ण होने के कारण वात का धुर विरोधी है, इससे स्थानिक रूप से प्रकुपित वात का शमन होता है। साथ ही इससे अंदर की अंदरूनी सूजन कम होती है। वहीं अश्वगंधा, शतावरी, लाक्षा गुग्गुलु जैसी दवाइयों का आभ्यांतर प्रयोग हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। यह इलाज पद्धति कुछ सालों तक घुटनों में दर्द की समस्या से मरीज को राहत प्रदान करती है।

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