IAS-2021 : प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्‍नों को हल करने के लिए जरूर अपनाएं एक्सपर्ट के ये महत्वपूर्ण टिप्स

शुरुआत करते हैं सबसे महत्वपूर्ण दो बातों से। पहला जैसे ही आपको पेपर मिलता है हल करना शुरू कर दें। पेपर कैसा आया है यह जानने में एक पल का भी वक्त बर्बाद न करें। दूसरा यह कि पेपर को तीन चरणों में हल करना अधिक लाभदायक पाया गया है।

Neel RajputTue, 28 Sep 2021 03:21 PM (IST)
प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्‍नों को ऐसे करें हल

नई दिल्ली, डा. विजय अग्रवाल। प्री के अंक भले ही सिविल सर्विस परीक्षा के मेरिट का निर्धारण नहीं करते, लेकिन मेरिट की मंजिल तक पहुंचने का ‘प्रवेश द्वार‘ तो यही है। इसलिए इस दौर में भी अपनी दक्षता का भरपूर इस्तेमाल करने में कोई भी कोताही नहीं बरती जानी चाहिए...

एक बात नोट कर लें कि प्रारंभिक परीक्षा केवल सूचनाओं के भंडार का परीक्षण करने वाली प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह आपके मनोविज्ञान का भी परीक्षण करती है। यह परीक्षण समय के दबाव में लिये जाने वाले सही निर्णयों एवं गति का होता है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि वस्तुनिष्ठ किस्म के पूछे गये जटिल प्रश्‍नों एवं विकल्पों में से सही राह तलाशने की वैज्ञानिक विधि से आप परिचित हों, अन्यथा यूपीएससी आपको भ्रम में डालने और घबरा देने का सारा इंतजाम किये रहती है।

क्‍या करें, क्‍या न करें: आइये, हम यहां कुछ ऐसे ही उपायों के बारे में जानते हैं। शुरुआत करते हैं सबसे महत्वपूर्ण दो बातों से। पहला, यह कि जैसे ही आपको पेपर मिलता है, हल करना शुरू कर दें। पेपर कैसा आया है, यह जानने में एक पल का भी वक्त बर्बाद न करें। दूसरा, यह कि पेपर को तीन चरणों में हल करना अधिक लाभदायक पाया गया है। इससे आपका मस्तिष्क स्वयं को भन्‍नाने से बचा लेता है, जो यहां बहुत जरूरी होता है :

पहले चरण में आप केवल उन प्रश्‍नों को हल करें, जिनके उत्तर आपको प्रश्‍न पढ़ते ही सूझ जाते हैं। लेकिन बहुत हड़बड़ी न करें। एक बार सभी विकल्पों को पढ़ने के बाद ही सही पर निशान लगाएं। दूसरे चरण में आपको उन प्रश्‍नों को थोड़ा अधिक समय देकर हल करने में अपना दिमाग खपाना चाहिए, जिनके दो विकल्पों में से किसी एक के चयन में दिक्कत आ रही है। यही वह हीरे की खान है, जहां से आपको अधिक से अधिक सही उत्तरों को खोदकर निकालना है। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि यही चरण इस बात का फैसला करने वाला है कि आप मुख्य परीक्षा में बैठेंगे या नहीं। इसलिए इन प्रश्‍नों को पूरे धैर्य और संतुलन के साथ अपना समय दें और ऐसे किसी भी प्रश्‍न को बिना अटेम्प के न छोड़ें, क्योंकि यहां सही होने की संभावना पचास फीसद की है। तीसरे चरण का संबंध केवल उन प्रश्‍नों से है, जिनके एक विकल्प को आप तत्काल खारिज कर सकते हैं। यहां मैं ‘तत्काल‘ शब्द पर जोर देना चाहूंगा, क्योंकि अब आपके पास समय कम है और प्रश्‍न अधिक। इस चरण में आपको सही विकल्प नहीं ढूंढ़ना है, बल्कि तीन संभावित विकल्पों में से किसी एक को निरस्त करना है। फिर जो दो विकल्प बचें, उनमें से किसी भी एक पर; जिसे आप थोड़ा ठीक समझ रहे हों, निशान लगा दें। आप लाभ में रहेंगे।

अंत में यह कि जो प्रश्‍न समझ में ही नहीं आ रहे हैं, उन्हें बिल्कुल भी समय न दें और न ही निराश हों। चारों विकल्पों वाले एवं अत्यंत जटिल प्रश्‍नों को छोड़ देने की नीति अपनाएं।

(लेखक पूर्व सिविल सर्वेंट और एएफईआइएएस के संस्थापक हैं।)

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