Delhi Congress News: आखिर कैसे दिल्ली नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को हराएंगे कांग्रेसी

Delhi Congress Dispute नाराज नेताओं का कहना है कि दिल्ली के हालात से पार्टी सुप्रीमो सोनिया गांधी को भी अवगत कराया जाएगा। व्यक्तिगत स्तर पर समय मिला तो मिलकर अन्यथा पत्र भेजकर। इस सबसे इतना तो तय है कि दिल्ली नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को अब कांग्रेसी ही हराएंगे।

Jp YadavThu, 25 Nov 2021 10:18 AM (IST)
Delhi Congress News: आखिर कैसे दिल्ली नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को हराएंगे 'कांग्रेसी'

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]।  दिल्ली प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी तो शुरू से ही रही है, अब बगावत भी जोर पकड़ रही है। खासकर जिन नेताओं को जंबो कार्यसमिति में जगह नहीं दी गई और जिन सात जिलाध्यक्षों को हटाया गया है, उनमें से ज्यादातर के मन में बदले की आग धधक रही है। इनकी शिकायत है कि मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष ने मान सम्मान तो उन्हें कभी दिया नहीं, अब उनका अपमान करने में भी कसर नहीं छोड़ी। इस अपमान को बर्दाश्त कतई नहीं किया जाएगा। कुछ ने तो ट्वीटर पर ही पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं तो कुछ बैठकें कर रणनीति बना रहे हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि जल्द ही दिल्ली के हालात से पार्टी सुप्रीमो सोनिया गांधी को भी अवगत कराया जाएगा। व्यक्तिगत स्तर पर समय मिला तो मिलकर अन्यथा पत्र भेजकर। इस सबसे इतना तो तय है कि दिल्ली नगर निगम चुनाव में भी कांग्रेस को अब कांग्रेसी ही हराएंगे।

खुल गई अपनी ही पोल

दिल्ली कांग्रेस इन दिनों हर विधानसभा क्षेत्र में पोल खोल यात्रा निकाल रही है। इसमें केंद्र की भाजपा और दिल्ली की आप सरकार की नाकामियों को उजागर किया जा रहा है। लेकिन कुछ ही दिन की यात्रा में पार्टी की अपनी ही पोल खुल गई है। विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में इस यात्रा को स्थानीय समर्थन ही नहीं मिल रहा तो आधे समर्थक किराये पर मंगाए जा रहे हैं। ताजा उदाहरण हस्तसाल विधानसभा का है, जहां इस यात्रा में कई बार के विधायक मुकेश शर्मा को साथ ही नहीं लिया गया। इसी तरह जहां कहीं यह यात्रा निकालनी होती है, वहां नेताओं को पहले ही कह दिया जाता है कि 50-60 समर्थक किराये पर भी बुलवा लेना, कहीं बेइज्जती न हो जाए। कुछ वरिष्ठ नेता इस पर चुटकी लेने से परहेज नहीं करते कि जिस नेतृत्व के साथ न अपने हैं और न गैर, उसकी अगुवाई में पार्टी का भविष्य क्या होगा!

जब जवां हो गई युवा कांग्रेस

विरोध की राजनीति से इतर भारतीय युवा कांग्रेस (आइवाइसी) की प्रयोगधर्मिता काबिलेतारीफ कही जा सकती है। जहां प्रदेश कांग्रेस केवल नकल और विरोध के रास्ते पर चलती है वहीं आइवाइसी कुनबे का विस्तार करती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी के निर्देशन में तीन दिवसीय ''यंग इंडिया के बोल'' प्रतियोगिता का आयोजन भी ऐसी ही रचनात्मकता रहा। देश भर से जहां करीब 1500 युवाओं ने अपनी बात रखी वहीं अजय माकन, देवेंद्र यादव, रागिनी नायक, पवन खेड़ा, अलका लांबा सरीखे अनेक बड़े नेताओं ने युवाओं का उत्साह बढ़ाया। हर भाषा में बेहतर ढंग से अपनी बात रखने वाले तीन- तीन युवाओं को पुरस्कृत किया गया। निस्संदेह इस आयोजन में नए- पुरानों के मिलन से युवा कांग्रेस जवां तो हो ही गई, राजनीतिक जानकारों की मानें तो युवाओं के लिए ऐसे आयोजन कर आइवाइसी अपना दायरा बढ़ाने का काम भी बखूबी कर जाती है। खुद मजबूत होंगे, तभी दूसरे को परास्त कर सकेंगे।

छोटा हो रहा कुनबा, फिर भी नहीं परवाह

इसे ढिठाई कहें या निर्लज्जता या फिर बैल बुद्धि.. देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस की लुटिया दिन ब दिन डूबती जा रही है लेकिन पार्टी नेतृत्व को कोई परवाह ही नहीं है। खुद को सही साबित करने की जिद इस हद तक हावी है कि हर किसी को गलत ठहराने की मुहिम शुरू कर दी है। अगर डेढ़ दो साल में किसी नेतृत्व के रहते पार्षद से सांसद तक 50 से अधिक नेता पार्टी छोड़ जाएं तो खुद इस्तीफा दे पार्टी को बचाना चाहिए। लेकिन यहां तो सब उलटा है। पार्टी बचे या नहीं, खुद का इस्तकबाल होना चाहिए। अब तो बहुत से कांग्रेसी यह चुटकी लेने से भी बाज नहीं आते कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस मुक्त की सिर्फ बात कही थी, लेकिन कुछ कांग्रेसियों ने मानो संकल्प कर लिया है। यह कांग्रेसी देश को कांग्रेस मुक्त करके ही दम लेंगे और प्रधानमंत्री की कही बात का मान रखेंगे। 

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