घर बैठे अपने लजीज एवं स्वादिष्ट व्यंजनों से दिल जीत रहीं होम शेफ

आप उन्हें गृहिणी यानी होम मेकर कहें या होम शेफ। इनमें खास अंतर नहीं है।
Publish Date:Sat, 31 Oct 2020 01:08 PM (IST) Author: Sanjay Pokhriyal

नई दिल्ली, अंशु सिंह। वर्षों स्कूल में प्राचार्य पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद जब रतिंदर गुरुंग ने रिटायरमेंट ली तो परिजनों ने सोचा कि वह अब शायद आराम करेंगी, लेकिन उन्होंने लोगों के सारे कयासों पर विराम लगाकर एक नई पारी शुरू करने की घोषणा कर दी। सब हैरान थे कि इस उम्र में क्या करेंगी? तभी रतिंदर गुरुंग ने बताया कि वह अपने शौक पूरा करना चाहती हैं। मां से कभी जो जैम या अचार बनाना सीखा था, उसके स्वाद से अन्य लोगों को भी परिचित कराना चाहती हैं। फिर क्या था? किसानों से ताजा सेब, प्लम, एप्रीकॉट, स्ट्रॉबेरी आदि खरीदकर वह तैयार करने लगीं किस्म-किस्म के जैम, जेली, अचार, सॉस, चटनी आदि।

वह कहती हैं, 10 साल पहले जब शुरुआत की थी, तो थोड़ी मात्रा में दोस्तों व रिश्तेदारों के लिए बनाया करती थी। मुझे अंदाजा नहीं था कि लोग इन्हें इतना पसंद करेंगे। सबसे खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार के रसायनों का इस्तेमाल नहीं होता। सब कुछ ऑर्गेनिक एवं नेचुरल तरीके से तैयार होता है। उनके पति एवं बच्चे फल-सब्जियों को धोने, काटने से लेकर बाकी कार्यों में भी मदद करते हैं। बेटे ने इंटरनेट मीडिया पर प्रमोशन आदि की जिम्मेदारी संभाल रखी है।

चॉकलेट बनाने से हुई थी शुरुआत : आप अगर कुछ करना चाहें और उसमें परिवार का साथ मिले तो कुछ भी नामुमकिन नहीं, जैसे मैं पति एवं बच्चों के सहयोग से ही आज घर बैठे अपने शौक को पूरा कर पा रही हूं, कहती हैं होम शेफ स्वाति गर्ग। इन्होंने वर्ष 2015 में चॉकलेट बनाना शुरू किया था। आगे चलकर केक बनाने लगीं और उसे दोस्तों-रिश्तेदारों को भेंट करतीं। वह बताती हैं, सभी को ऐसा स्वाद लगा कि उन्होंने मुझे इसे बड़े पैमाने पर बनाने के लिए प्रेरित किया। देखते ही देखते फेसबुक एवं वाट्सएप पर ऑर्डर्स आने लगे। कुछ वर्ष यूं ही चलने के बाद 2018 में मैंने फूड लाइसेंस लिया और नींव पड़ी ट्रुफल्स डिलाइट की। आज मेरे मेन्यू में केक के अलावा, कपकेक, कुकीज, आइसक्रीम, पाई, डार्ट आदि शामिल हैं।

स्वाति के अनुसार, उन्होंने कहीं से कुकिंग का कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं लिया है। होम शेफ की ही हॉबी क्लासेज से बेकिंग की बारीकियां सीखी हैं ताकि अपने हुनर को थोड़ी और धार दे सकें। वह अपने आइटम्स में काफी इनोवेशन करती हैं। डिजाइनिंग, स्टाइलिंग आदि भी खुद ही करती हैं। वह कहती हैं कि इसमें आप अपनी कल्पना को जितना विस्तार देंगे, उतना अच्छा परिणाम मिलेगा। उत्साहजनक बात यह रही कि कोरोना काल में जब सारी दुकानें एवं विकल्प बंद थे, तब भी इनके पास ऑर्डर्स की कमी नहीं रही, क्योंकि ये स्वच्छता एवं गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करती हैं। कुछ समय पहले इन्होंने द यमी आइडिया द्वारा आयोजित ऑल इंडिया होम शेफ कुकिंग कांटेस्ट में मोस्ट इंगेजिंग कंटेंट का अवॉर्ड भी हासिल किया है।

राजस्थानी व्यंजनों में महारत : जयपुर की सीमा सेठी को सोशल मीडिया से मुंबई के फूड स्टार्टअप ऑथेंटिक कुक की जानकारी मिली थी। 2016 में वह इस प्लेटफॉर्म से जुड़ीं और होम डाइनिंग इवेंट के तहत विदेशी मेहमानों को खास राजस्थानी व्यंजनों से रू-ब-रू कराने लगीं, लेकिन कोविड-19 के बाद से बदली परिस्थितियों में यह जब संभव नहीं था, तो दोस्तों ने कैटरिंग सॢवस शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। दरअसल, सीमा आत्मनिर्भर होकर अपनी एक पहचान बनाना चाहती थीं। घर की चारदीवारी के बाहर लोगों से जुडऩा चाहती थीं, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण घर से बाहर निकलना संभव नहीं था। ऐसे में होम शेफ की भूमिका उनके लिए मुफीद साबित हुई। वह वन वूमन आर्मी की तरह काम करती हैं। सुबह बहुत जल्दी उठकर ऑर्डर के हिसाब से खाना तैयार करती हैं। सारे मसाले भी खुद ही बनाती हैं।

वह बताती हैं, यह एक आम धारणा है कि राजस्थानी व्यंजन का मतलब सिर्फ दाल, बाटी, चूरमा है, जो पूरा सच नहीं है। हमारे यहां की केर सांगरी, काचरे की सब्जी, गट्टे की सब्जी व पुलाव, बूंदी की बर्फी व विभिन्न प्रकार की मिठाइयां भी काफी पसंद की जाती हैं। राजस्थान में हरी सब्जियां अधिक नहीं होती हैं। इसलिए कई बार मिठाई से भी सब्जी बना ली जाती है, जैसे गुलाब जामुन की सब्जी बहुत लजीज बनती है। इतना कुछ करते हुए थकान नहीं होती। सीमा कहती हैं, क्योंकि मैं सारे काम दिल से करती हूं। मेरे लिए कुकिंग एक जुनून की तरह है। जबसे खाना बनाना शुरू किया, पूरे दिल से बनाया। कभी पापा ने एक सीख दी थी कि भोजन को पहले नजरों से खाते हैं, फिर मुख से। इसलिए प्रेजेंटेशन पर काफी ध्यान देती हूं। मेरा मानना है कि हम व्यंजन को जितना आकर्षक तरीके से पेश करते हैं, वह सीधे खाने वाले के दिल को स्पर्श करता है।

फूड टूर से बढ़ी लोकप्रियता : देश में होम शेफ की बढ़ती लोकप्रियता में फूड ट्रेल्स या टूर की बड़ी भूमिका रही है। इसी कड़ी में होम डाइनिंग एक दिलचस्प इवेंट के रूप में सामने आया है यानी जो लोग क्षेत्र विशेष (बंगाली, उडिय़ा, असमी, पंजाबी, हैदराबादी आदि) के पारपंरिक पकवान, व्यंजन का स्वाद लेना चाहते हैं, वे छह या सात के समूह में ऐसे आयोजनों में शामिल होते हैं। ये आयोजन किसी होम शेफ के घर पर होते हैं। कोलकाता की होम शेफ एवं फूड एक्सपर्ट शेरी मल्होत्रा कहती हैं, मुझे हमेशा से कुकिंग पसंद थी। 2012 में चेन्नई में रहने के दौरान मैंने देखा था कि वहां रहने वाले उत्तर भारतीय कैसे अपने क्षेत्र का कुजीन मिस करते हैं। इसके बाद ही शेरी किचन की शुरुआत हुई। मैंने घर से कैटरिंग सॢवस शुरू की। हर दिन 40 टिफिन तैयार होते थे।

वर्ष 2016 में मुझे एफबीएआइ द्वारा आयोजित ताज लैंड्स एंड के होम शेफ मास्टर्स का हिस्सा बनने का मौका मिला। यहीं कई टैलेंटेड होम शेफ्स से मुलाकात हुई और मुझे इस इंडस्ट्री के बारे में पता चला। इसके बाद मैं घर पर ही डाइनिंग इवेंट्स होस्ट करने लगी। मुंबई के इंडियन फूड ट्रेल के संस्थापक हेमंत मंडालिया बताते हैं कि वह बीते कई साल से अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए होम शेफ को खाने के शौकीनों से जोड़ते आ रहे हैं। होम शेफ का चयन हमारे फूड राजदूत करते हैं, जो घरों पर जाकर शेफ का खाना टेस्ट करते हैं। इसके उपरांत उन्हें प्लेटफॉर्म पर स्थान मिलता है। मुंबई के अलावा कोलकाता, सिंगापुर, ह्यूस्टन, न्यू जर्सी में भी लोगों को यह सॢवस मिल रही है। वहां के भारतीय परिवार अपने घरों पर डाइनिंग इवेंट करते हैं। हेमंत के अनुसार, लंदन में पढऩे के दौरान जब खाने को लेकर दिक्कत हुई थी तो उन्हें फूड ट्रेल का आइडिया आया। इंटरनेट मीडिया से प्रमोशन शुरू किया और आज यहां तक पहुंचे हैं।

रिटायरमेंट के बाद शुरू किया काम : मनाली की होम शेफ रतिंदर गुरुंग ने बताया कि मैं 30 वर्ष से अधिक समय तक शिक्षण के पेशे से जुड़ी रही। प्रिंसिपल पद की जिम्मेदारी संभाली है। मुझे खाली बैठना कतई पसंद नहीं। काम करने में विश्वास करती हूं। इसलिए रिटायरमेंट के बाद घर में जैम, जेली, अचार आदि बनाना शुरू किया। आज हिमाचल के अलावा देश के अन्य शहरों में मांग के अनुसार आपूॢत करती हूं। मुझे इस बात की संतुष्टि है कि लॉकडाउन के दौरान बिना बिचौलियों के सीधे किसानों से फल-सब्जियां खरीदकर उनकी मदद कर पाई। इसके अलावा लैंडस्केप पेंटिंग करती हूं। हिमाचल एवं दिल्ली के कई होटलों एवं रिजॉर्ट में इन्हें देखा जा सकता है।

होम डाइनिंग से मिली अलग पहचान : जयपुर की होम शेफ सीमा सेठी ने बताया कि मैं बीते चार साल से होम डाइनिंग इवेंट्स कर रही थी। विदेशी मेहमानों को स्थानीय खानपान, कला एवं संस्कृति से परिचय कराने का अवसर मिला है। खाने के संग आमने-सामने संवाद होने से उनकी संस्कृति को भी जान पाई हूं। मेरे पहले मेहमान अमेरिका से थे, जो विशेष रूप से भारत की दीवाली में शामिल होने आए थे। उनके साथ बहुत यादगार अनुभव रहा। मेरे काम और खाने को पहचान मिली। इसके अलावा इंस्टाग्राम से लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलने से एक संतुष्टि हुई कि कुछ सार्थक कर पाई। मैंने फूड फोटोग्राफी एवं फूड स्टाइलिंग भी की। मैं मानती हूं कि हर महिला जन्म से एक शेफ होती है, क्योंकि वह कुछ न कुछ, कभी न कभी बनाती ही है।

देश-विदेश में केक की मांग : गाजियाबाद की होम शेफ स्वाति गर्ग ने बताया कि मैं शुद्ध शाकाहारी हूं। इसलिए मेरे सारे प्रोडक्ट्स एगलेस (अंडा रहित) होते हैं। उनमें किसी तरह के प्रिजर्वेटिव, कलर, केमिकल या आॢटफिशियल फ्लेवर का इस्तेमाल नहीं करती हूं। फ्रेश बनाती हूं और वैसे ही डिलीवर करती हूं। मेरे पास दिल्ली-एनसीआर के अलावा, कनाडा से भी केक, कपकेक आदि के ऑर्डर आते हैं। खुश हूं कि परिवार को संभालते हुए अपने शौक को पूरा कर पा रही हूं।

17 साल से खाने की होम डिलीवरी : 66 वर्ष की हैं दिल्ली के द्वारका की सीमा बनर्जी। खाना बनाने का शौक एवं जुनून ऐसा है कि इस उम्र में भी अधिकांश समय रसोई में ही बीतता है। घरवालों के लिए बेहद प्यार से अलग-अलग व्यंजन बनाती रहती हैं, लेकिन इनका सिर्फ यही परिचय नहीं है। सीमा एक होम शेफ भी हैं। वर्ष 2003 से घर के खाने की डिलीवरी कर रही हैं। फेसबुक, वाट्सएप आदि से लोग इनके बारे में जान पाते हैं। वह बताती हैं, पहले तो कई कंपनियों में मेरा बनाया खाना टिफिन के रूप में जाता था।

आजकल ऑर्डर के हिसाब से बनाती और डिलीवर करती हूं। मेरी बनाई बिरयानी, मटर एवं शाही पनीर आदि की विशेष मांग रहती है, क्योंकि इन सभी के मसाले घर पर ही तैयार करती हूं। सीमा जी कहती हैं कि विभिन्न आयोजनों के दौरान आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं में वह जरूर शामिल होती हैं। अब तक कई सम्मान भी मिले हैं उन्हें। वह कहती हैं, बंगालियों में चावल के आटे से बना पिट्ठा भी बहुत पसंद किया जाता है, जो किसी होटल या रेस्टोरेंट में नहीं मिलता। यह लोक व्यंजन है, जिसे हम घर में बनाते हैं। यह मीठा एवं नमकीन दोनों स्वाद में होता है। सीमा जी के अनुसार, जब हम अपने पसंद का काम करते हैं तो उसमें न उम्र आड़े आती है और न समय। बस एक इच्छाशक्ति के साथ सब बढ़ते रहते हैं।

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