आम बोलचाल की भाषा हिंदी ही होनी चाहिए : सत्यपाल सिंह बघेल

उद्घाटन सत्र में सत्यपाल सिंह बघेल ने हिंदी साहित्य भारती के कार्यो की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी को विकास की भाषा कहा जाता है लेकिन फ्रांस जर्मनी चीन जापान कोरिया जैसे देशों में लोग अंग्रेजी नहीं बल्कि अपनी मातृभाषा में बात करते हैं।

Pradeep ChauhanSun, 28 Nov 2021 09:11 AM (IST)
हंसराज कालेज में हिंदी साहित्य भारती की केंद्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक शनिवार को शुरू हुई।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। हंसराज कालेज में हिंदी साहित्य भारती की केंद्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक शनिवार को शुरू हुई। बैठक में हिंदी के प्रचार-प्रसार पर चर्चा हो रही है। पहले दिन उद्घाटन सत्र में केंद्रीय राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह बघेल, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वांत रंजन, छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल शेखर दत्त, कुरुक्षेत्र के निरंजनी अखाड़े के शाश्वतानंद गिरि महाराज, हंसराज कालेज की प्राचार्य प्रो. रमा शर्मा, हिंदी साहित्य भारती के अंतररष्ट्रीय और उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री अध्यक्ष डा. रविंद्र शुक्ल शामिल हुए।

उद्घाटन सत्र में सत्यपाल सिंह बघेल ने हिंदी साहित्य भारती के कार्यो की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी को विकास की भाषा कहा जाता है, लेकिन फ्रांस, जर्मनी, चीन, जापान, कोरिया जैसे देशों में लोग अंग्रेजी नहीं, बल्कि अपनी मातृभाषा में बात करते हैं।

उन्होंने पूछा कि क्या इंग्लैंड में कभी अंग्रेजी बचाओ अभियान चलाया गया क्या? फिर भारत मे हिंदी बचाओ अभियान की जरूरत क्यों पड़ी? क्योंकि मैकाले ने हमारी भाषा, संस्कृति, सभ्यता को समाप्त करने की कोशिश की। उन्होने कहा कि आम बोलचाल की भाषा हिंदी ही होनी चाहिए।

डा. रविंद्र शुक्ल ने संगठन के कार्यो की समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि 35 देशों में हिंदी साहित्य भारती पूरे समपर्ण भाव से हिंदी के प्रचार- प्रसार में लगी हुई है। तय हुआ कि भविष्य में विदेशों में हिंदी साहित्य भारती के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवा पीढ़ी को और अधिक संख्या में जोड़ा जा सके। विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में समय-समय पर सेमिनारों और काव्य गोष्ठियों का आयोजन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में गिनीज बुक आफ वल्र्ड रिकार्डधारी देवेंद्र देव की पुस्तक विरसा मुंडा का लोकार्पण भी हुआ।

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