MCI के पत्र पर हाई कोर्ट ने लगाई मुहर,भोपाल मेडिकल कालेज में जगह पाने वाले पांच छात्रों का दाखिला निरस्त

भोपाल के मेडिकल कालेज में जगह पाने वाले पांच छात्रों का दाखिला निरस्त करने के भारतीय चिकित्सा परिषद के पत्र पर हाई कोर्ट ने मुहर लगा दी है। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने पांचों छात्रों की याचिका को खारिज कर दिया है।

Pradeep ChauhanMon, 20 Sep 2021 05:22 PM (IST)
भारतीय चिकित्सा परिषद के पत्र पर हाई कोर्ट ने लगाई मुहर। प्रतीकात्‍मक फोटो

नई दिल्‍ली, जागरण संवाददाता। बिना काउंसिलिंग में शामिल हुए भोपाल के मेडिकल कालेज में जगह पाने वाले पांच छात्रों का दाखिला निरस्त करने के भारतीय चिकित्सा परिषद (Medical Council of India) के पत्र पर हाई कोर्ट ने मुहर लगा दी है। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने इन पांचों छात्रों की उस याचिका को खारिज कर दिया है। जिसमें एमसीआइ के पत्र को रद करने की मांग की गई थी। पीठ ने कहा कि देश में लाखों छात्र योग्यता के आधार पर शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। ऐसे में मेडिकल कालेजों सहित अन्य संस्थानों में पिछले दरवाजे से प्रवेश बंद किए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार देश के सभी मेडिकल कालेजों में दाखिले राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) के आधार पर केंद्रीकृत काउंसिलिंग के जरिये किए जाने का प्रविधान है। इसे दरकिनार करते हुए वर्ष 2016 में भोपाल के एलएन मेडिकल कालेज अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में पांच छात्रों को चिकित्सा शिक्षा विभाग (डीएमई) की केंद्रीकृत काउंसलिंग में शामिल हुए बगैर दाखिला दे दिया गया था। यह मामला संज्ञान में आने पर भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआइ) ने अप्रैल 2017 में पांचों छात्रों के प्रवेश को निरस्त करने संबंधी पत्र (लेटर आफ डिस्चार्ज) जारी किया था। इसे लेकर कई बार अनुस्मारक पत्र भी भेजे गए थे, जिन्हें छात्रों और कालेज ने किनारे कर दिया।

उधर, पांचों छात्रों ने एमसीआइ के दाखिला निरस्त करने के पत्र को रद करने की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की एकल पीठ के समक्ष याचिका दायर कर दी थी। उस याचिका में छात्रों ने मेडिकल कालेज में नियमित पढ़ाई जारी रखने की अनुमति भी मांगी थी। उनकी याचिका को एकल पीठ ने खारिज कर दिया था। इन छात्रों ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए दो सदस्यीय पीठ के समक्ष अपील दायर की थी।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ के समक्ष छात्रों की तरफ से पक्ष रखा गया कि उनकी नीट रैंकिंग उन छात्रों से बेहतर थी, जिन्होंने काउंसिलिंग से दाखिला लिया। लेकिन पीठ ने प्रक्रिया को गलत पाते हुए छात्रों की अपील को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा, भोपाल के मेडिकल कालेज समेत अन्य संस्थानों में पिछले दरवाजे से दाखिला करने की प्रक्रिया को बंद किया जाए।

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