कोरोना का कहर: दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एके वालिया का निधन, सीताराम येचुरी के बेटे आशीष ने भी गंवाई जान

दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रहे डॉ. अशोक कुमार वालिया की फाइल फोटो।

शीला दीक्षित सरकार में ऊर्जा और स्वास्थ्य मंत्री रहे डॉ. अशोक कुमार वालिया का बृहस्पतिवार सुबह इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। वह कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आए थे और कई दिनों से इस अस्पताल में भर्ती थे।

Jp YadavThu, 22 Apr 2021 08:00 AM (IST)

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में कोरोना वायरस संक्रमण का कहर जारी है। इस बीच राजधानी दिल्ली और गुरुग्राम से एक बुरी खबर आ रही है। शीला दीक्षित सरकार में ऊर्जा और स्वास्थ्य मंत्री रहे डॉ. अशोक कुमार वालिया का बृहस्पतिवार सुबह इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। वह कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आए थे और  कई दिनों से इस अस्पताल में भर्ती थे। बृहस्पतिवार सुबह उनके निधन की खबर आते ही कांग्रेस नेताओं में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं, गुरुग्राम के एक अस्पताल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के नेता सीताराम येचुरी के बेटे आशीष का कोरोना वायरस के चलते निधन हो गया।

बता दें कि डॉ. अशोक कुमार वालिया दिल्ली कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार होने के साथ शीला दीक्षित के करीबी भी थे। पूर्वी दिल्ली में ही नहीं, बल्कि समूची दिल्ली में उन्हें बेहतरीन डॉक्टर के साथ अच्छा इंसान माना जाता था। वह हमेशा लोगों की मदद के लिए तैयार रहते थे।

यहां पर बता दें कि शीला दीक्षित सरकार में मंत्री रह चुके अशोक कुमार वालिया प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार थे। शीला दीक्षित से उनकी करीबी जग जाहिर थी। वह वर्ष 1993 में दिल्ली प्रदेश की पहली विधानसभा से ही वह हर बार चुने गए थे, लेकिन 2015 में लक्ष्मीनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े और हार गए थे। फिर दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में भी उन्हें हार मिली थी।

इससे पहले 2017 में एमसीडी चुनाव में टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस का झगड़ा उपाध्यक्ष राहुल गांधी के दरवाजे तक पहुंच गया था। इसके लेकर एके वालिया काफी नाराज हुए थे।

लगातार 4 बार विधानसभा चुनाव जीते थे एक वालिया

दिल्ली के पूर्व मंत्री डॉ.  एके वालिया ने लगातार चार विधानसभ चुनाव में जीत दर्ज की थी और लगातार दो बार चुनाव हारे भी थे  परिसीमन से पूर्व उन्होंने गीता कॉलोनी सीट से लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी और परिसीमन के बाद लक्ष्मीनगर विधानसभा सीट से एक बार जीत दर्ज की थी। वहीं लक्ष्मीनगर से ही वह लगातार दो बार हारे थे। इसी वजह से उन्होंने दिल्ली विधानसभा 2020 में पुरानी सीट से ही चुनान लड़ने का फैसला किया था। 

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