बच्चे के बालिग होने पर खत्म नहीं हो जाती हैं पिता की जिम्मेदारियां : दिल्ली हाई कोर्ट

याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एस प्रसाद की पीठ ने कहा कि ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि 18 साल के होने पर बेटे के प्रति पिता की जिम्मेदारी पूरी हो जाती है और उसकी शिक्षा का पूरा खर्च मां पर आ जाता है।

Prateek KumarWed, 16 Jun 2021 09:25 AM (IST)
गुजारा-भत्ता के लिए महिला की याचिका पर कोर्ट ने की टिप्पणी

नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। गुजारा-भत्ता की मांग को लेकर नगर निगम में अपर-डिवीजनल क्लर्क के पद पर कार्यरत महिला की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि बेटे के बालिग होने के बाद भी पिता की जिम्मेदारियां खत्म नहीं हो जाती हैं।

18 साल पूरे होने पर खत्म नहीं होती जिम्मेदारी

याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एस प्रसाद की पीठ ने कहा कि ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि 18 साल के होने पर बेटे के प्रति पिता की जिम्मेदारी पूरी हो जाती है और उसकी शिक्षा का पूरा खर्च मां पर आ जाता है। बेटा अभी सिर्फ 12वीं पास है और याचिकाकर्ता को ही उसका पूरा खर्च वहन करना पड़ रहा है। जीवन जीने के लिए बढ़ते खर्च पर अदालत अपनी आंख नहीं बंद कर सकती है।

गुजारा-भत्ता के रूप में 15 हजार रुपये अदा करने का आदेश

पीठ ने इसके साथ ही महिला पति को निर्देश दिया कि बेटे के वयस्क होने की तारीख से जब तक वह स्नातक की पढ़ाई पूरी न कर ले या कुछ कमाने न लगे तब तक याचिकाकर्ता को गुजारा-भत्ता के रूप में 15 हजार रुपये अदा करें। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने परिवार न्यायालय को निर्देश दिया कि वर्ष 2008 में दायर किए गए वाद का तेजी से सुनवाई कर 12 महीने में निपटारा किया जाए। इस दौरान पीठ ने यह भी कहा कि मां से उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वह बेटे का पूरा खर्च वहन करेगी। वहीं, पिता सिर्फ बेटी के गुजारे के लिए थोड़ी सी मदद करेगा। याचिकाकर्ता का वेतन तीन लोगों के परिवार के लिए पर्याप्त नहीं है।

पहले सात हजार रुपये था भत्ता

निगम में कार्यरत एक महिला की शादी एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया में ज्वाइंट जनरल मैनेजर पद पर कार्यरत व्यक्ति से नवंबर 1997 में हुई थी। दोनों का एक बेटा व एक बेटी है। दोनों के बीच विवाद होने के बाद मामला परिवार न्यायालय में पहुंचा। परिवार न्यायालय ने महिला को गुजारा भत्ता देने से इन्कार करते हुए दो बच्चों के लिए पहले सात हजार रुपये का गुजारा भत्ता तय किया और फिर इसे बढ़ाकर 13 हजार रुपये कर दिया था। महिला के गुजारा-भत्ते की मांग को लेकर दायर याचिका को परिवार न्यायालय ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि वह पर्याप्त कमाई करती हैं और गुजारा- भत्ता पाने की हकदार नहीं हैं।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.