आखिरकार चला ही गया जामिया का शाहजहां, पढ़िए- पूरी स्टोरी

नई दिल्ली, जेएनएन। प्रख्यात इतिहासकार, इस्लामी विद्वान व जामिया मिलिया इस्लामिया के पूर्व कुलपति प्रो. मुशीरुल हसन का सोमवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने 71 वर्ष की आयु में जामिया परिसर स्थित आवास में अंतिम सास ली। परिसर में बने कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। वह काफी समय से डायलिसिस पर थे, कुछ दिनों से उनकी तबीयत ज्यादा खराब थी।

इतिहासकार मोहिबुल हसन के बेटे प्रो. मुशीरुल ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से वर्ष 1969 में एमए और वर्ष 1977 में कैंब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी की। वह जामिया में वर्ष 2004 से 2009 के दौरान कुलपति रहे। भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक भी रह चुके थे।

प्रो. हसन के असिस्टेट के तौर पर साथ रहे मुहम्मद शाकिर कहते हैं कि उनके कार्यकाल में जामिया में डॉ. जाकिर हुसैन लाइब्रेरी, अकादमी ऑफ थर्ड व‌र्ल्ड स्टडीज के लिए भवन बने। कई इमारतों का निर्माण कराने की वजह से वह जामिया के शाहजहां के रूप में जाने जाते थे। प्रो. हसन की पत्नी जोया भी इतिहासकार हैं और जेएनयू में प्रोफेसर हैं।

जेएनयू की प्रोफेसर जयंती घोष ने बताया कि वर्ष 2014 में एक कार दुर्घटना में प्रो. मुशीरुल के सिर पर काफी चोट आई थी। जामिया के इतिहास विभाग के पूर्व प्रोफेसर अजीजुद्दीन हुसैन बताते हैं कि प्रो. हसन ने स्वतंत्रता सेनानियों के उर्दू में लिखे पत्रों का अध्ययन किया और उनके योगदान को किताब के जरिये दुनिया के सामने लेकर आए।

विभाजन पर लिखीं पांच पुस्तकें
प्रो. हसन ने जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गाधी और जिन्ना पर काम किया। विभाजन पर पाच पुस्तकें लिखीं। नेशनलिज्म एंड कॉम्युनल पॉलिटिक्स इन इंडिया - 1885-1930, पार्टनर्स इन फ्रीडम - जामिया मिलिया इस्लामिया बिटविन मॉडर्निटी एंड नेशनलिज्म सहित कई किताबें लिखी हैं। सलमान रुश्दी के विवादित उपन्यास 'सैटेनिक वर्सेस' पर प्रतिबंध का समर्थन करने से इनकार भी किया था।

मिला यह सम्मान

उधर, अरविंद केजरीवाल (मुख्यमंत्री, दिल्ली) ने कहा कि प्रसिद्ध लेखक मुशीरुल हसन जी के निधन से व्यथित हूं। जामिया में उनके दिए गए योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

मनीष सिसोदिया (उपमुख्यमंत्री, दिल्ली) के मुताबिक, मुशीरुल हसन जी का निधन सिर्फ अकादमिक नहीं बल्कि उन सभी लोगों के लिए भारी नुकसान है जो सही के साथ खड़े होने में विश्वास करते हैं।  

बता दें कि प्रो. मुशीरुल हसन जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के कुलपति और भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक रह चुके थे। मुशीरुल हसन साल 1992-96 जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उप-कुलपति और बाद में साल 2004-09 तक कुलपति रहे। 

इसके अलावा वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के उपाध्यक्ष के साथ-साथ ईरान स्थित दूतावास में इंडो-ईरान सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष और 2002 में भारतीय इतिहास कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे थे। उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। उन्होंने भारत के विभाजन और दक्षिण-एशिया में इस्लाम के इतिहास पर बड़े पैमाने पर लिखा है। 

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