बंगाल पुलिस द्वारा अपने अधिकारियों को भेजे नोटिस को ईडी ने दी चुनौती

ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ने पीठ के समक्ष कहा कि नोटिस स्पष्ट रूप से अवैध दुर्भावनापूर्ण और मामले में जांच के लिए एक जवाबी कार्रवाई है।उन्होंने नोटिस जारी करने की कार्रवाई को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए इस रद करने की मांग की।

Prateek KumarTue, 14 Sep 2021 07:58 PM (IST)
टीएमसी सांसद अभिषेक बैनर्जी के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के बाद पुलिस ने भेजा था नोटिस

ई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। कोयला के अवैध खनन व तस्करी से जुड़े मामले में तृणमूल कांग्रेस सांसद व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के बाद अपने अधिकारियों को बंगाल पुलिस द्वारा भेजे गए नोटिस को प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। मंगलवार को न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की पीठ ने कहा कि याचिका पर 21 सितंबर को सुनवाई करेंगे।

ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एसवी राजू ने पीठ के समक्ष कहा कि नोटिस स्पष्ट रूप से अवैध, दुर्भावनापूर्ण और मामले में जांच के लिए एक जवाबी कार्रवाई है। उन्होंने नोटिस जारी करने की कार्रवाई को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए इसे रद करने की मांग की। इस पर पीठ ने कहा कि बंगाल पुलिस की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा 22 जुलाई व 21 अगस्त को जारी नोटिस को देखने की बात की है, ऐसे में सुनवाई 21 सितंबर को होगी।

जांच एजेंसी ने अपनी याचिका में कहा कि मनी लांड्रिंग के तहत अपनी वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए एजेंसी अवैध कोयला खनन मामले की जांच कर रही है। केंद्र सरकार के स्थायी वकील अमित महाजन के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि कोलकाता के कालीघाट पुलिस स्टेशन के डीडी के सब इंस्पेक्टर, स्पेशल सेल (जीएस) द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों को दो नोटिस जारी किए गए हैं।

याचिका में कहा गया है कि यह नोटिस पांच अप्रैल 2021 को दर्ज की रिपोर्ट के मामले की जांच करने वाले जांच अधिकारी पर दबाव बनाने के लिए किया गया है ताकि मनी लांड्रिग के तहत हो रही जांच को पटरी से उतारा जा सके। यह भी आरोप लगाया कि बंगाल पुलिस प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जा रही जांच को पटरी से उतारने के लिए अभिषेक बनर्जी के इशारे पर काम कर रही है और एफआइआर दर्ज करने के बाद नोटिस जारी करने का मकसद केवल ईडी अधिकारियों को परेशान करना है।

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