Swachh Survekshan 2021: अगले स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग के लिए तैयार EDMC

पूर्वी निगम ने इस वर्ष के स्वच्छ सर्वेक्षण का परिणाम आने से पहले सुधारात्मक तैयारियां शुरू कर दी हैं। सभी 64 वार्डों में घर-घर से कूड़ा एकत्र करना सुनिश्चित कर दिया गया है ताकि सड़कों पर कूड़े का ढेर नजर नहीं आए।

Jp YadavMon, 22 Nov 2021 12:28 PM (IST)
Swachh Survekshan 2021: अगले स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग के लिए तैयार EDMC

नई दिल्ली। स्वच्छ सर्वेक्षण की ताजा रैंकिंग में पूर्वी दिल्ली नगर निगम 40वें स्थान पर रहा है। पिछले वर्ष निगम 46वें स्थान पर रहा था। रैंकिंग में छह पायदान का उछाल आना निश्चित रूप से सफाई, सुंदरीकरण और कूड़ा निस्तारण के बेहतर प्रयास का नतीजा है। आर्थिक चुनौतियों के बीच रैंकिंग में हुए सुधार ने पूर्वी निगम से जुड़े हर व्यक्ति में ऊर्जा का संचार कर दिया है, लेकिन इंदौर से पीछे रहने का मलाल भी सबको है। अगर इंदौर से आगे निकलना है तो निगम को कमियों का आकलन कर उन्हें दूर करना होगा। नवोन्मेष पर जोर देना होगा। कूड़े के उचित निस्तारण के लिए स्नोत पर गीला और सूखा कूड़ा अलग करने का कार्य लोगों की रोजमर्रा की आदत में शामिल करवाना होगा। इस दिशा में आने वाले वक्त में पूर्वी दिल्ली नगर निगम क्या-क्या कदम उठाएगा, लोगों का साथ पाने के लिए किस तरह से उन्हें जागरूक करेगा, इन्हीं सवालों को लेकर आशीष गुप्ता ने निगमायुक्त विकास आनंद से विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके कुछ मुख्य अंश...।

पूर्वी निगम स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग में सुधार हुआ है। ऐसे कौन से कार्य हैं, जिनकी वजह से यह सुधार आया?

-साफ-सफाई का काम एक निरंतर प्रक्रिया है। जहां यह कार्य रुका, वहीं पूरी सफाई व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम हमेशा यह प्रयास करता रहा कि स्वच्छता कार्य बाधित न हो। महापौर, पार्षद व अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक ने तन्मयता से कार्य किया। सर्वेक्षण से पहले प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कार्य किया गया। कचरे से खाद बनाने की इकाइयां स्थापित की गई थीं। गाजीपुर लैंडफिल साइट के कूड़े के निस्तारण में तेजी लाई गई थी। इसके अलावा पौधे लगाने के साथ क्षेत्र की दीवारों का सुंदरीकरण करने का कार्य किया गया था। उसका नतीजा रहा कि रैंकिंग में सुधार आया। अगले सर्वेक्षण में इससे बेहतर रैंकिंग की तैयारी है।

इंदौर पिछले पांच सालों से लगातार पहली रैंकिंग हासिल कर रहा है। इतने सालों में यमुनापार को इंदौर से मुकाबले के लिए तैयार नहीं किया जा सका। कमियां कहां रहीं, किस तरह की अड़चनें आ रही हैं?

-इंदौर स्नोत पर गीला और सूखा कूड़ा अलग करने में सफल रहा है। इसकी वजह से उनके लिए कूड़ा निस्तारण करना बेहद आसान हो गया है। फिर वहां नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। इस सख्ती की वजह से कोई कूड़ा खुले में नहीं फेंकता। पूर्वी निगम के क्षेत्र में स्नोत पर कूड़ा पृथक्करण का कार्य प्रारंभिक चरण में है। इसे पूर्ण रूप से लागू नहीं किया जा सका है। इसे अनिवार्य करने से पहले लोगों को जागरूक किया जाना जरूरी है। जागरूकता कार्य चल रहा है। इसके अलावा निगम के सामने आर्थिक अड़चनें हैं, उनके बावजूद क्षेत्र को साफ बनाने के लिए काम जारी है।

अगले साल स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए क्या तैयारियां की जाएंगी, ताकि पूर्वी निगम सबसे आगे निकल कर मिसाल कायम कर सके?

-पूर्वी निगम ने इस वर्ष के स्वच्छ सर्वेक्षण का परिणाम आने से पहले सुधारात्मक तैयारियां शुरू कर दी हैं। सभी 64 वार्डों में घर-घर से कूड़ा एकत्र करना सुनिश्चित कर दिया गया है, ताकि सड़कों पर कूड़े का ढेर नजर नहीं आए। इसकी वजह से निगम को 85 डलावघरों को खत्म करने में कामयाबी मिली है। इन डलावघरों की जगह कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन बनाए गए हैं। इनमें बड़े-बड़े काम्पैक्टर लगाए गए हैं। घरों से एकत्र किए गए कूड़े को ट्रांसफर स्टेशनों में लगे काम्पैक्टर में डाल दिया जाता है। इससे कूड़ा खुले में नजर नहीं आता। कई मोबाइल ट्रांसफर स्टेशनों की व्यवस्था कर दी गई है। इसके अलावा मुख्य मार्ग व स्थानों पर 50 शौचालयों को निजी सहभागिता से संवारने और बनाने के लिए कदम आगे बढ़ा दिया गया है।

स्नोत पर गीला व सूखा कूड़ा अलग करने की अनिवार्यता कब से लागू हो पाएगी। इसे लेकर निगम की क्या तैयारी है?

-पहले मार्च से स्नोत पर गीला व सूखा कूड़ा अलग करना अनिवार्य करने का निर्णय हुआ था। लेकिन स्वच्छ सर्वेक्षण का ताजा परिणाम आने के बाद तय किया गया है कि एक दिसंबर से इसे अनिवार्य कर दिया जाएगा। नागरिकों को अपने घर का गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग रखना होगा। निगम की गाड़ियों में दोनों तरह के कूड़े को अलग रखने का पहले से प्रविधान है। साथ ही तय किया है कि जो लोग इसका पालन नहीं करेंगे, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। लोगों से अपील है कि वह गीला और सूखा कूड़ा अलग करके दें, ताकि नगर निगम अपना काम उचित तरीके से कर पाए।

क्षेत्र में खुले में मलबा पड़ा होने की समस्या बड़ी है। इसका क्या इंतजाम किया जा रहा है। ई-वेस्ट के निस्तारण की क्या व्यवस्था है?

-पहले 61 स्थानों पर खुले में मलबा डाला जाता था। इनमें से 44 स्थानों पर मलबा डालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। केवल 17 स्थानों पर मलबा डालना अधिकृत किया गया है। इन स्थानों पर भी व्यू कटर लगाए जा रहे हैं, ताकि किसी को मलबा न दिखे और धूल न उड़े। इसके अलावा स्नोत से मलबा उठवाने की व्यवस्था निगम करने जा रहा है। इसके लिए लोगों से शुल्क लिया जाएगा। ई-वेस्ट के निस्तारण के लिए भी पूरी व्यवस्था कर दी गई है। एक एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो घरों व प्रतिष्ठानों से ई-वेस्ट उठाएगी। वही उसका निस्तारण करेगी।

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