रामलीला के साथ दुर्गा पूजा आयोजन को लेकर असमंजस बरकरार

आयोजकों के मुताबिक इस बार कोरोना संक्रमण की स्थिति काफी हद तक काबू में है। ऐसे में सरकार को पूजा के आयोजन को अनुमति देने को लेकिर चिंतित नहीं होना चाहिए। वैसे आरामबाग व सिविल लाइंस जैसी कुछ स्थानाें पर दुर्गा पूजा की तैयारियां चल रही है।

Prateek KumarSat, 25 Sep 2021 06:10 AM (IST)
अभी तक मंजूरी न मिलने से उहापोह में 500 से अधिक दुर्गा पूजा समिति से जुड़े आयोजक

नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। राष्ट्रीय राजधानी में रामलीला मंचन के साथ दुर्गा पूजा आयोजन को लेकर आयोजकों में असमंजस बरकरार है, क्योंकि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) द्वारा सार्वजनिक धार्मिक आयोजनों को अनुमति नहीं दी गई है। इस बार दुर्गा पूजा का आयोजन 11 से 16 अक्टूबर तक होना है। दिल्ली में 500 से अधिक जगहों पर दुर्गा पूजा आयोजन होते हैं। इनमें से 100 वर्ष से भी अधिक पुरानी कुछ समितियां हैं, जो हर वर्ष दुर्गा पूजा का आयोजन कराती है। पिछले वर्ष भी काेरोना संक्रमण के चलते कई पाबंदियों के साथ आयोजन को बमुश्किल एक सप्ताह पहले मंजूरी दी गई थी। ऐसे में कई पूजा समितियों ने आयोजन से हाथ खड़े कर लिए थे तो कई ने काफी छोटे स्तर पर पूजा का आयोजन किया था।

आयोजकों के मुताबिक इस बार कोरोना संक्रमण की स्थिति काफी हद तक काबू में है। अधिकतर लोगों का टीकाकरण भी हो गया है। ऐसे में सरकार को पूजा के आयोजन को अनुमति देने को लेकिर चिंतित नहीं होना चाहिए। वैसे, आरामबाग व सिविल लाइंस जैसी कुछ स्थानाें पर दुर्गा पूजा की तैयारियां चल रही है। अगर मंजूरी नहीं मिलती है तब समिति के पदाधिकारियों की मौजूदगी में ही पूजा कराई जाएगी।

दिल्ली में दुर्गा पूजा का इतिहास आजादी पहले से सौ साल से भी अधिक पुराना है। सबसे पहली दुर्गा पूजा सिविल लाइंस की है। जब ब्रिटिश सरकार ने कोलकाता की जगह नई दिल्ली को राजधानी बनाने की आधारशिला रखी तब उनके साथ बंगाल से आए कामगारों ने इस पूजा को शुरू किया था। पिछले वर्ष कोरोना को देखते हुए इस समिति ने मूर्ति बैठाने से परहेज किया, उसकी जगह घट पूजा की व्यवस्था की। हालांकि, आयोजन के लिए टेंट, कुर्सियां समेत अन्य सामान मंगा लिए थे, लेकिन अंत में आयोजन स्थल के एक कोने में ही घट पूजा की गई।

इस पूजा का आयोजन कराने वाली दिल्ली दुर्गा पूजा समिति के सचिव राबिन बोस ने कहा कि इस वर्ष भी असमंजस की स्थिति है। इसलिए ज्यादा तैयारियां नहीं की गई है। हालांकि, मंजूरी मिलती है तो अच्छे तरीके से पूजा का आयोजन होता। अन्यथा बिना बाहरी लाेगों को प्रवेश दिए समिति के लोगों की मौजूदगी में पूजा की परंपरा का निर्वहन होगा। बोस कहते हैं कि दिल्ली में पूजा पंडालों में कोलकाता जैसी भीड़भाड़ की स्थिति नहीं होती है। वहीं, पिछले वर्ष जैसी कोरोन संक्रमण स्थिति भी इस वर्ष नहीं है। ऐसे में उम्मीद है कि इस वर्ष अनुमति मिल जाएगी।

यहीं स्थित आरामबाग स्थित पूजा समिति की है। पिछली बार इस समिति ने मोतिया खान स्थित रानी झांझी काम्पलेक्स स्थित नारायण सत्संग मंदिर में काफी छोटे स्तर पर पूजा का आयोजन किया था। समिति के चेयरमैन अभिजीत बोस ने कहा कि हम लोगों ने तय किया है कि पिछले वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी पूजा आयोजित करेंगे। आयोजन और व्यवस्था से जुड़े लोगाें के लिए कोरोना टीका अनिवार्य रखा जाएगा। वहीं, श्रद्धालुओं के लिए आनलाइन दर्शन की व्यवस्था रखी जाएगी। रोहिणी के सेक्टर 15-16 में पिछले 20 सालों से दुर्गा पूजा कराती मिथिला सेवा संस्थान के पदाधिकारी अजित कुमार सिंह ने कहा कि पहले डीडीए पार्क में आयोजन होता था, लेकिन इस वर्ष अनुमति नहीं मिलने से एक हाल में आयोजन की तैयारी हो रही है।

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