Doctors Strike: बढ़ने वाली है मरीजों की मुसीबत, इमरजेंसी सेवाएं भी बंद करने की तैयारी में रेजिडेंट चिकित्सक

हरि नगर स्थित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में रेजिडेंट चिकित्सक एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. राजकुमार ने बताया कि सरकारी अस्पताल पहले से ही स्वास्थ्य कर्मचारियों की किल्लत से जूझ रहा है उस पर से काउंसलिंग में देरी के कारण नए रेजिडेंट चिकित्सक नहीं आ रहे है।

Prateek KumarTue, 07 Dec 2021 10:15 PM (IST)
रेजिडेंट चिकित्सकों की हड़ताल के कारण इमरजेंसी पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली [भगवान झा]। लगातार पांचवें दिन भी क्षेत्र के सभी सरकारी अस्पतालों में नीट स्नातकोत्तर काउंसलिंग 2021 में हो रही देरी को लेकर रेजिडेंट चिकित्सकों की हड़ताल जारी रही। हालांकि, इसका फिलहाल ओपीडी व इमरजेंसी सेवाओं पर कोई खासा प्रभाव नहीं देखा गया, पर रेजिडेंट चिकित्सकों के मुताबिक यदि उनकी मांग पर सरकार ने गौर नहीं किया तो वे अब इमरजेंसी सेवाएं भी ठप कर देंगे। ज्ञात हो फिलहाल रेजिडेंट चिकित्सक सभी इमरजेंसी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे है।

हरि नगर स्थित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में रेजिडेंट चिकित्सक एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. राजकुमार ने बताया कि सरकारी अस्पताल पहले से ही स्वास्थ्य कर्मचारियों की किल्लत से जूझ रहा है, उस पर से काउंसलिंग में देरी के कारण नए रेजिडेंट चिकित्सक नहीं आ रहे है जिसके कारण मौजूदा रेजिडेंट चिकित्सकों पर काम का काफी दबाव है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण का नया वेरिएंट भी धीरे-धीरे पांव पसार है, यदि तीसरी लहर आती है तो सीमित स्वास्थ्यकर्मियों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दे पाना मुश्किल होगा।

रेजिडेंट चिकित्सकों की हड़ताल के कारण डीडीयू अस्पताल में ओपीडी की पर्ची बनाने से लेकर मरीज को देखने का समय दोनों ही सीमित कर दिया गया है। पहले जहां पर्ची बनवाने का समय 12 बजे तक था, वह घटाकर साढ़े दस बजे तक कर दिया है। जबकि ओपीडी में चिकित्सक चार बजे तक रहने के बजाय डेढ़ बजे तक ही मौजूद रहते हैं। आलम यह है कि इमरजेंसी पर काफी दबाव बढ़ गया है और इन सब के बीच अति गंभीर मरीजों को चिकित्सक नहीं देख पा रहे हैं।

मजबूरन अति गंभीर मरीजों के तीमारदार उन्हें लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटक रहे हैं। असल में रेजिडेंट चिकित्सकों की हड़ताल के कारण फिलहाल चिकित्सा विशेषज्ञ ओपीडी में सेवाएं दे रहे हैं, पर मरीजों के दबाव अनुरूप ओपीडी में विशेषज्ञ मौजूद नहीं थे। ऐसे में ओपीडी में विशेषज्ञों पर दबाव अधिक रहा है। पर चिकित्सकों ने अधिक से अधिक मरीजों को समय देना का प्रयास किया, जिसकी मरीज सराहना करते हुए नजर आएं। सर्जरी विभाग में जांच के लिए आई सोनिया ने बताया कि मरीजों का काफी दबाव था। मुझे लगा नहीं था कि मैं आज चिकित्सीय परामर्श प्राप्त कर पाऊंगी, पर मैं सफल रही।

अच्छी बात यह है कि चिकित्सक ने अपनी क्षमता के पार जाकर ओपीडी में आएं करीब करीब सभी मरीजों को परामर्श दिया। कुछ ही लोग थे, जिन्हें चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त नहीं हुआ। उधर, दादा देव मातृ एवं शिशु चिकित्सालय के प्रशासन की माने तो रेजिडेंट चिकित्सकों की हड़ताल के कारण ओपीडी में दस फीसद मरीज ही प्रभावित हुए है। दूसरा हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद ओपीडी में मरीजों की संख्या भी कम हुई है।

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