Video: धर्म और रिलीजन में अंतर है, अंग्रेजी में भारतीय विचारों को सामने लाने से उभरा भ्रम- राम माधव

हिंदी हैं हम में राम माधव बोले आज हिन्दुत्व भारतीय जीवन की मुख्यधारा बन गई है। 10-15 साल पहले सेक्युलरिज्म बनाम हिंदुत्व की बहस होती थी। लोग हिंदुत्व को गहराई से समझना चाहते हैं। इसलिए वो सावरकर व दीनदयाल के बारे में अधिक से अधिक जानना चाहते हैं।

Amit SinghTue, 19 Oct 2021 02:27 PM (IST)
राम माधव की नई पुस्तक द हिंदू पैराडाइम इन दिनों काफी चर्चा में है। फोटो- दैनिक जागरण

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। धर्म और रिलीजन में अंतर है। धर्म शाश्वत मूल्यों का संचय है जबकि रिलीजन भगवान की उपासना की पद्धति है। अंग्रेजी शब्दों को लेकर भारत में जो संभ्रम होता है वो बहुत बड़ा संभ्रम है। हम नेशन स्टेट को नेशन मान लेते हैं, रिलीजन को धर्म मान लेते हैं। ये अंग्रेजी शब्दों के माध्यम से भारतीय विचारों को सामने लाने से उभरा संभ्रम है। धर्म हमारे यहां हजारों वर्षों के राष्ट्र जीवन या समाज जीवन के अनुभवों से विकसित मूल्य हैं। जिसको हमारे महापुरुषों ने, संतों, महात्माओं और मनीषियों ने हमारे समाज के लिए बनाकर हमको दिया। उन्होंने बताया कि हमारा धर्म क्या है। हमारा धर्म हरेक विषय पर हमको कुछ मूल्य बताते हैं। प्रकृति के प्रति, पड़ोसी के प्रति, समाज के प्रति, देश के प्रति, समाज के कमजोर वर्गों के प्रति हमारी क्या दृष्टि होनी चाहिए ये हमें धर्म बताता है। धर्म मूल्यों का संचय होता है। ये कहना है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यकारिणी के सदस्य और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व महासचिव राम माधव का। वो दैनिक जागरण के उपक्रम हिंदी हैं हम के मंच जागरण वार्तालाप में वेस्टलैंड प्रकाशन से प्रकाशित अपनी नई पुस्तक द हिंदू पैराडाइम पर संवाद कर रहे थे।

देश के केंद्र में है हिंदुत्व का विचार

राम माधव ने कहा कि आज हिन्दुत्व भारत के जीवन की मुख्यधारा बन गई है। देश के केंद्र में हिंदुत्व का विचार है। आज से दस पंद्रह साल पहले सेक्युलरवादी या उदारवादी विचारधारा इस देश की मुख्यधारा के प्रतीक माने जाते थे। तब बहस सेक्युलरिज्म बनाम हिंदुत्व की होती थी। राजनीतिक दृष्टि से आज हिंदुत्व के विचार से जुड़े लोग देश में मुख्य पदों पर बैठे हैं पर सामाजिक स्तर पर भी इस विचार की स्वीकृति बढ़ी है। देश के लोग हिंदुत्व के विचार को गहराई से समझना चाहते हैं। इसलिए लोगों की इच्छा है कि वो सावरकर के बारे में, दीनदयाल जी के बारे में अधिक से अधिक जानें। इस दृष्टि से अगर देखें तो ये समझ में आता है कि हिंदुत्व से जुड़ी पुस्तकें इतनी संख्या में क्यों आ रही है। पहले भी इस तरह की पुस्तकें आती थीं, इस तरह का साहित्य लिखा जाता था, छपता भी था लेकिन तब उन पर इतनी चर्चा नहीं होती थी। इसको हाशिए का लेखन माना जाता था, अब ये मुख्यधारा का लेखन हो गया है। देश दुनिया में इस तरह के विचारपरक पुस्तकों की स्वीकार्यता बढ़ी है।

हिंदुत्व और हिंदुइज्म का विवाद बेवजह

हिंदुत्व और हिंदुइज्म का विवाद बेवजराम माधव के मुताबिक हिंदुत्व और हिंदुइज्म में कोई अंतर नहीं है। ये बेवजह का विवाद है। हिंदुत्व, हिंदुइज्म, हिंदू या हिंदू धर्म सब एक ही बात है। हिंदू कभी इज्म (वाद) हो ही नहीं सकता क्योंकि इज्म या वाद एक बंद विचारधारा होती है, एक बंधा हुआ विचार जो एक निश्चित ढांचे में होता है। हिंदू बंधा हुआ विचार नहीं है। ये बहुत खुला, उदार और समावेशी विचार है। अगर अंग्रेजी में हिंदुत्व का कोई समांतर शब्द ढूंढा जाए तो वो हिंदूनेस हो सकता है। पर ये प्रचलन में नहीं है। उनका कहना है कि प्रचलन में हिंदुत्व है इस वजह से उन्होंने अपनी पुस्तक के शीर्षक में हिंदुत्व रखा। दूसरा कारण हिंदुत्व को लेकर जो निरर्थक विवाद है उसका निषेध करना भी पुस्तक लिखने का उद्देश्य था। वो अपनी पुस्तक के माध्यम से हिंदुत्व को सही परिप्रेक्ष्य में प्रतिस्थापित भी करना चाहते हैं। जो हिंदुत्व का या हिंदूवाद का विचार है वही हिंदू है। उन्होंने इसको कोई विचारधारा नहीं कहा है। राम माधव ने साफ किया कि वो चाहते तो अपनी पुस्तक का नाम हिंदू आयडियोलाजी रख सकते थे। लेकिन ये उचित नहीं होता। उनका मानना है कि हिंदू, हिंदुत्व या हिंदू धर्म कोई विचारधारा नहीं है। भारत ने कभी भी सिद्धांतकार पैदा नहीं किया बल्कि दार्शनिक पैदा किया। वैसे दार्शनिक जो विचार देते हैं, कोई सिद्धांत प्रतिपादित नहीं करते हैं। हिंदू दर्शन भी एक विचार है, एक आयडिया है जिसके आधार पर जीवन तय करने की दृष्टि मिलती है।

दीनदयाल जी का एकात्म मानव दर्शन विचार

राम माधव ने अपनी पुस्तक में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन को व्य़ाख्यायित किया है। उनका मानना है कि बीसवीं सदी में भारत की ओर से दुनिया को एक मौलिक विचार देने का काम महात्मा गांधी ने किया। उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह का विचार पूरी दुनिया के सामने रखा। गांधी के इस राजनीतिक दर्शन ने पूरी दुनिया के प्रबुद्ध लोगों को काफी प्रभावित किया। वो जोर देकर कहते हैं कि इसके अलावा भारत से कोई और मौलिक विचार है तो वो है दीनदयाल जी का एकात्म मानव दर्शन। दीनदयाल जी के एकात्म मानव दर्शन का विचार भारतीय संस्कृति, भारतीय चिंतन और भारत के सामाजिक जीवन से उपजा विचार है। उस विचार की विस्तृत व्याख्या करने के लिए जितना समय चाहिए था वो दीनदयाल जी को नहीं मिला। दीनदयाल जी ने इस विचार को 1964-65 के दौरान रखा। 1968 के प्रारंभ में उनकी मृत्यु हो गई। उनको अपने विचार का विश्लेषण पूरी दुनिया के सामने रखने का पर्याप्त समय और अवसर नहीं मिला। इसके कारण गांधी के विचारों को जितनी प्रसिद्धि मिली उतनी दीनदयाल जी के विचारों को नहीं मिल पाई। राम माधव ने स्पष्ट किया कि उनकी पुस्तक हिंदुत्व पैराडाइम दीनदायल जी के विचारों की प्रासंगिकता को सामने रखने के उद्देश्य से लिखी गई है। इस पुस्तक में दीनदयाल जी के विचारों के अलावा भी कई विचारों को परखने की कोशिश की गई है। दैनिक जागरण की अपनी भाषा हिंदी को समृद्ध करने का उपक्रम है ‘हिंदी हैं हम’। इसके अंतर्गत जागरण वार्तालाप का आयोजन किया जाता है जिसमें हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के लेखकों की नई कृतियों पर उनसे संवाद होता है।

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