School Reopen News: कोरोना की संभावित तीसरी लहर के बीच दिल्ली वालों ने कर दिया कमाल

सरकारी स्कूलों के छात्र शुरू से ही आफलाइन कक्षाओं के इंतजार में थे। स्कूल खुलने की घोषणा होते ही स्कूलों में उनकी बढ़ी हुई संख्या भी इस बात का प्रमाण है कि छात्रों के पास इंटरनेट कनेक्टिविटी तो दूर स्मार्टफोन तक की सुविधा नहीं है।

Jp YadavWed, 15 Sep 2021 07:58 AM (IST)
School Reopen News: कोरोना की संभावित तीसरी लहर के बीच दिल्ली वालों ने कर दिया कमाल

नई दिल्ली [रीतिका मिश्रा]। देश की राजधानी दिल्ली में नौंवी से बारहवीं तक के स्कूल खुल गए हैं। स्कूल खुलने के दो सप्ताह बाद भी निजी स्कूलों में बेहद कम संख्या में छात्रों उपस्थित हो रहे हैं। वहीं, सरकारी स्कूलों का इसके उलट है। सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों के मुताबिक स्कूलों में इस बार आफलाइन कक्षाओं में 70 प्रतिशत से अधिक की उपस्थिति दर्ज हो रही है। उनके मुताबिक अब अभिभावक भी चाहते हैं कि उनका बच्चा स्कूल जाए और आफलाइन माध्यम से कक्षाओं में शामिल हो। वहीं, निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों का कहना है कि सरकार ने तो स्कूल खोले दिए लेकिन अभिभावक कोरोना की तीसरी लहर को आशंकित हैं ऐसे में वो अपने बच्चों को स्कूल आने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। इस वजह से स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बेहद कम दर्ज हो रही है।

राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ के पश्चिमी जिले के सचिव संत राम ने बताया कि सरकारी स्कूलों के छात्र शुरू से ही आफलाइन कक्षाओं के इंतजार में थे। स्कूल खुलने की घोषणा होते ही स्कूलों में उनकी बढ़ी हुई संख्या भी इस बात का प्रमाण है कि छात्रों के पास इंटरनेट कनेक्टिविटी तो दूर स्मार्टफोन तक की सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर सरकारी स्कूलों में सभी छात्र उपस्थित हो रहे हैं ऐसे में आनलाइन कक्षाएं पूरी तरह से बंद भी कर दी गई हैं। वहीं, सरकारी स्कूल के छात्रों के मुताबिक उन्हें बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करनी है, आनलाइन कक्षाओं के लिए उनके पास संसाधनों की कमी है ऐसे में वो आफलाइन कक्षाओं को बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

वहीं, शालीमार बाग स्थित मार्डन पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या और दिल्ली सहोदय स्कूल काम्प्लेक्स की अध्यक्ष अलका कपूर ने कहा कि स्कूल खुलने के दूसरे सप्ताह में भी आफलाइन कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति पर्याप्त संख्या में नहीं है। उन्होंने सरकार द्वारा आनलाइन के साथ आफलाइन माध्यम से पढ़ाने की प्रणाली को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इतनी कम उपस्थिति का मुख्य कारण अभिभावकों में कोरोना की तीसरी लहर का डर और छात्रों को आफलाइन के साथ आनलाइन कक्षाओं से पढ़ने की सुविधा मिलना है। उन्होंने कहा कि आनलाइन कक्षाओं में उपस्थिति 90 प्रतिशत है लेकिन आफलाइन कक्षाओं में ये मात्र 10 प्रतिशत ही है।

वहीं, द इंडियन स्कूल की प्रधानाचार्या तानिया जोशी ने बताया कि आनलाइन कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति 95 प्रतिशत से 98 प्रतिशत है। आइपी एक्सटेंशन स्थित नेशनल विक्टर पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या वीना मिश्रा ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल आने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावक बच्चों को आफलाइन कक्षाओं में न भेजने का यह तर्क दे रहे हैं कि उनका बच्चा 18 वर्ष से कम उम्र का है और उसे अभी कोरोना का टीका नहीं लगा है।

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