DSGMC election 2021: अगले साल होने वाले चुनाव को लेकर गरमाई सिख राजनीति, जागो भी बनेगी चुनौती

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की फाइल फोटो।
Publish Date:Wed, 21 Oct 2020 01:18 PM (IST) Author: JP Yadav

नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। DSGMC election: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीपीसी) चुनाव के चार-पांच महीने शेष रह गए हैं। अगले वर्ष फरवरी या मार्च में चुनाव होगा। कमेटी पर इस समय शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) का कब्जा है। इस बार उसके सामने कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है। पार्टी नई मतदाता सूची तैयार नहीं होने को लेकर अदालत भी गई थी, लेकिन अदालत ने गुरुद्वारा चुनाव निदेशक के पुरानी सूची में ही संशोधन करकेे चुनाव कराने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इस तरह से चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही सिख राजनीतिक में सरगर्मी तेज होने लगी है।

शिअद बादल ने वर्ष 2013 में चुनाव जीतकर कमेटी पर कब्जा किया था। मनजीत सिंह जीके कमेटी के अध्यक्ष और मनजिंदर सिंह सिरसा महामंत्री बने थे। उसके बाद वर्ष 2017 में भी पार्टी को जीत मिली और जीके अध्यक्ष और सिरसा को महामंत्री बनाया गया। इसी दौरान जीके व सिरसा के बीच वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई। जीके पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे और उन्हें कमेटी का अध्यक्ष पद के साथ ही पार्टी भी छोड़नी पड़ी। उनके इस्तीफे के बाद वर्ष 2019 में सिरसा अध्यक्ष बनाए गए।

जीके ने जग आसरा गुरु ओट (जागो) नाम से अलग पार्टी बनाकर शिअद बादल को चुनौती दे रहे हैं। संगठन के विस्तार के लिए गतिविधियां चल रही हैं। कई पुराने अकालियों को अपने साथ जोड़ने में सफल रहे हैं। वहीं, शिरोमणि अकाली दल दिल्ली (सरना) एक बार फिर से कमेटी पर कब्जा करने की कोशिश में लगेे हुए हैं। गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर करतारपुर साहिब तक नगर कीर्तन निकालने की इन्हें अनुमति दी गई थी जिसके जरिये संगत के बीच इनकी पकड़ मजबूत हुई है। चुनाव नजदीक देखकर तीनों पार्टियों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। साथ ही एक-दूसरे के खेमे में सेंध लगाने की भी कोशिश हो रही है।

वर्ष 2017 में हुए चुनाव का परिणाम

शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) ने लगातार दूसरी पर डीएसजीपीस पर कब्जा किया था। पार्टी ने वर्ष 2013 के डीएसजीपीसी चुनाव की तरह ही दूसरी बार भी कमेटी के 35 वार्डों पर जीत हासिल की थी। वहीं, शिअद दिल्ली (सरना) को मात्र 7 सीटें नसीब हुईं थीं। दो सीटों पर अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार भाई रंजीत सिंह की पार्टी अकाल सहाय वेलफेयर सोसायटी ने जीत दर्ज की थी, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय विजयी रहे थे। पहली बार गुरुद्वारा चुनाव में उतरे पंथक सेवा दल का खाता भी नहीं खुल पाया था।

डीएसजीपीसी में होते हैं कुल 55 सदस्य

डीएसजीपीसी के 55 सदस्यों में से 46 संगत द्वारा चुने जाते हैं। इनके अतिरिक्त श्री अकाल तख्त साहिब, तख्त श्री पटना साहिब, तख्त श्री केशगढ़ साहिब तथा तख्त श्री हुजूर साहिब के जत्थेदार भी डीएसजीपीसी के सदस्य होते हैं। इसी तरह से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का एक प्रतिनिधि भी दिल्ली कमेटी में होता है। दिल्ली के सिंह सभाओं के प्रधानों में से दो को दिल्ली कमेटी का सदस्य बनाया जाता है। इनका चयन लॉटरी से होता है। दो सदस्यों का चुनाव कमेटी के चुने हुए 46 सदस्य मतदान के द्वारा करते हैं।

 

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