Delhi Riots: एक जगह पर हुई दो घटनाओं की प्राथमिकी अलग-अलग थाने में दर्ज होने के मामले में पुलिस ने दाखिल किया जवाब

Delhi Riots दिल्ली दंगे के दौरान एक ही जगह से अंजाम दी गई दो घटनाओं की प्राथमिकी अलग-अलग थाने में दर्ज करने के मामले में कोर्ट के सवाल पर शुक्रवार को पुलिस ने अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया।

Ppradeep ChauhanSat, 18 Sep 2021 04:32 PM (IST)
अलग-अलग थाना क्षेत्र में हुई दिल्ली दंगे का प्रतीकात्‍मक चित्र

नई दिल्‍ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली दंगे के दौरान एक ही जगह से अंजाम दी गई दो घटनाओं की प्राथमिकी अलग-अलग थाने में दर्ज करने के मामले में कोर्ट के सवाल पर शुक्रवार को पुलिस ने अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव के कोर्ट में पुलिस ने कहा कि घटनाएं अलग-अलग थाना क्षेत्र में हुई थीं। व्यक्ति को गोली दयालपुर थाना क्षेत्र में लगी थी, इसलिए उस घटना की प्राथमिकी वहां दर्ज की गई थी। जबकि पार्किंग में आगजनी की घटना खजूरी खास क्षेत्र में हुई थी, इस कारण उसका मुकदमा खजूरी खास थाने में दर्ज किया गया। अब इस मामले में शनिवार को सुनवाई होगी।

अलग-अलग थाना क्षेत्र में हुई थीं घटनाएं

दिल्ली दंगे की साजिश के आरोपित जेएनयू छात्र शरजील इमाम के खिलाफ चल रहे राजद्रोह के मामले में शुक्रवार को अभियोजन पक्ष ने कड़कड़डूमा कोर्ट में अपनी दलीलें दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के कोर्ट में वरिष्ठ लोक अभियोजक अमित ने शरजील की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि शरजील के भाषण के किसी एक अंश पर नहीं, बल्कि सभी कथनों पर गौर करना जरूरी है। तभी शरजील की सही मंशा का पता चलेगा। उन्होंने न्यू फ्रेंड्स कालोनी थाने में दर्ज मामले का हवाला देकर अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कोर्ट को बताया कि शाहीन बाग उपद्रव के एक आरोपित ने अपने बयान में कहा था कि वह जामिया मिल्लिया इस्लामिया में शरजील का भाषण सुनकर ऐसा करने के लिए उत्तेजित हुआ था।

फिलहाल इस मामले को 20 सितंबर तक टाल दिया गया है। शरजील इमाम ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में प्रदर्शन के दौरान दिसंबर 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भाषण दिया था। उस पर राजद्रोह का केस दर्ज गिरफ्तार कर किया गया था।

कड़कड़डूमा कोर्ट ने लगाई फटकार

पिछले वर्ष गोकलपुरी इलाके में दंगे के दौरान हुई चोरी और आगजनी की घटना के मामले में शुक्रवार को सुनवाई में अभियोजक के उपस्थित न होने और जांच अधिकारी द्वारा जवाब न दे पाने पर कड़कड़डूमा कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई। मुख्य महानगर दंडाधिकारी अरुण कुमार गर्ग ने कहा कई बार इस ढुलमुल रवैये के बारे में संज्ञान में लाने के बावजूद पुलिस आयुक्त और अन्य अधिकारियों ने दंगों के मामलों के उचित अभियोजन के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। कोर्ट ने दोबारा से पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह दंगे के मामलों के उचित अभियोजन के लिए स्वयं निगरानी रखें।

इसके अलावा कोर्ट ने आदेश की प्रति उप राज्यपाल को भेजी है। गत वर्ष 24 फरवरी को गोकलपुरी इलाके में रिजवान नामक व्यक्ति के घर में दंगाइयों ने तोड़फोड़ और चोरी की थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि विशेष लोक अभियोजक कई तारीखों से मामले में पेश नहीं हो रहे हैं। यह कोर्ट इस बात से दुखी है कि गोकलपुरी थानाध्यक्ष जांच अधिकारी की जगह किसी दूसरे की प्रतिनियुक्ति करने में विफल रहे हैं। वह यह भी सुनिश्चित नहीं कर सके कि उनके जांच अधिकारी सुनवाई में केस फाइल पढ़ कर जा रहे हैं या नहीं। वह अभियोजक की उपस्थिति सुनिश्चित करने में भी विफल रहे हैं।

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