E-Vehicle In Delhi-NCR: प्रदूषण भगाने को चाहिए ई-रफ्तार, बढ़ें ई-वाहन तो स्वस्थ रहें हम

E-Vehicle In Delhi-NCR ई-वाहन को लेकर एक बड़ा चार्जिंग नेटवर्क भी कमजोर कड़ी है जो दिल्ली व एनसीआर के शहरों के सम्मिलित प्रयास से ही संभव है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि राज्य सरकारें इन चुनौतियों से कैसे निपटेंगी?

By Sanjay PokhriyalEdited By: Publish:Wed, 24 Feb 2021 12:29 PM (IST) Updated:Wed, 24 Feb 2021 12:29 PM (IST)
E-Vehicle In Delhi-NCR: प्रदूषण भगाने को चाहिए ई-रफ्तार, बढ़ें ई-वाहन तो स्वस्थ रहें हम
वाहनों की संख्या और अब कितने लोग ई-वाहनों को दे रहे हैं तरजीह जानेंगे आंकड़ों की जुबानी :

नई दिल्‍ली, जेएनएन। E-Vehicle In Delhi-NCR दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा साफ और स्वच्छ हो। लोग खुल कर सांस ले सकें। तन और मन दोनों स्वस्थ रहें इसके लिए पेट्रोल और डीजल चालित वाहनों की जगह अब सरकारें ई-वाहन को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही हैं। दिल्ली हो या हरियाणा या फिर उत्तर प्रदेश सरकार सब ने ई-वाहन के प्रति ग्राहकों का रुझान बढ़ाने के लिए नई-नई नीतियां भी बनाई हैं। लोगों में प्रदूषण रहित इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति आकर्षण बढ़ भी रहा है। कितना होता है वाहनों के ईंधन से प्रदूषण, कितनी है वाहनों की संख्या और अब कितने लोग ई-वाहनों को दे रहे हैं तरजीह जानेंगे आंकड़ों की जुबानी :

सुविधा सहूलियत के लिए ही होती है। बात जब वाहन की होती है तो उसमें जरूरत और शौक, दोनों की भागीदारी होती है। होनी भी चाहिए, लेकिन वाहनों की बढ़ती संख्या ने चुनौतियां भी चिंताजनक तरीके से बढ़ा दी हैं। दिल्ली में तो ये चुनौतियां और गंभीर हैं। वाहनों का रेला प्राकृतिक माहौल के प्रतिकूल परिणाम देने लगा है, जो वायु प्रदूषण के विकराल रूप में हम सब के सामने है। वाहनों के जहरीले धुएं ने हर किसी की जिंदगी को प्रभावित किया है। इस चुनौती से कैसे निपटें, इसके लिए शोध हो रहे हैं और बचाव के रास्ते तलाशे जा रहे हैं। एक रास्ते पर सहमति उभरती दिखी है कि सेहत की चिंता करनी है और स्वस्थ हवा में सांस लेना है तो अब बगैर समय व्यर्थ किए ई-वाहन के साथ आगे बढ़ना ही होगा। सरकार को अपने स्तर पर इसकी शुरुआत करनी होगी। यह काम शुरू भी हो गया है।

दिल्ली सरकार के साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग भी समस्या के समाधान के लिए आगे आया है। ई-वाहनों के उत्पादन से लेकर उनके इस्तेमाल तक के लिए अनुकूल और सुविधाजनक प्रणाली बनानी होगी ताकि लोग सहजता से उसे अपना सकें। यह पहल र्तािकक है, लेकिन इसके साथ ही कुछ अहम मसले भी उभरे हैं। दिल्ली-एनसीआर में वाहनों को ई-वाहनों में बदलने और नए वाहनों की खरीद में ई-वाहनों का हिस्सा बढ़ाने से लेकर हर राज्य की अलग-अलग नीति को प्रभावी बनाना आसान नहीं होगा। योजना को सफल बनाने की उनकी क्या रणनीति होगी? लोगों को सहूलियत देने के साथ ही उन्हें जागरूक करने के लिए क्या प्रयास होने चाहिए? इसी की पड़ताल करना हमारा आज का मुद्दा है :

...तो बनेगी बात

आयोग की ओर से इन सारी प्रक्रियाओं की निगरानी भी की जा रही है। आवश्यकतानुसार नए आदेश भी जारी किए जाएंगे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान को ई-वाहन नीति अपने समूचे राज्य के लिए बनानी होगी एनसीआर में शामिल जिलों को देनी होगी प्राथमिकता ढिलाई बरतने वालों पर आयोग सख्त कार्रवाई करने के लिए है स्वतंत्र एनसीआर की सेहत में सुधार लाने के लिए चारों राज्य सरकारों को मिलकर बढ़ना होगा आगे जनता भी बने जागरूक और समझदारी का दे परिचय

हरियाणा में ई-वाहन नीति हरियाणा में टोल फ्री की सुविधा 2030 तक सभी वाहनों को ई-वाहनों में तबदील करने का लक्ष्य पांच साल तक महज तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से 24 घंटे बिजली दी जाएगी ई-वाहन या इसके उपकरण तैयार करने वाली कंपनियों को पांच साल तक निर्माता कंपनियों को स्टेट जीएसटी में छूट। लघु और सूक्ष्म के लिए सात व बड़े उद्योगों के लिए दस साल तक होगी छूट रोड टैक्स में शतप्रतिशत छूट सरकारी कर्मचारियों को ई-वाहन ऋण ब्याज पर 100 फीसद छूट टोल किया जाएगा फ्री 25 हजार रुपये ई-रिक्शा की खरीद पर, 75 हजार दस लाख रुपये से कम की कार खरीद पर और एक लाख रुपये की छूट मिलेगी दस लाख से अधिक की कार खरीद पर

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