Chief Secretary Assault Case: दिल्ली HC ने कहा- सबूत पेश करने में पिक एंड चूज का फॉर्मूला नहीं अपना सकती पुलिस

नई दिल्ली स्थित दिल्ली हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
Publish Date:Wed, 21 Oct 2020 01:42 PM (IST) Author: JP Yadav

नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से मारपीट के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को राहत मिली है। गवाह का बयान देने की केजरीवाल-सिसोदिया की मांग को खारिज करने के निचली अदालत के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज करते हुए पुलिस पर कई सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की पीठ ने दिल्ली पुलिस से कहा कि सबूत पेश करने में पुलिस पिक एंड चूक की प्रक्रिया नहीं अपना सकती है। मामले में गवाह वीके जैन का बयान केस डायरी का हिस्सा है और आरोपित द्वारा पेश किया गया है। पीठ निर्देश दिया कि आरोप तय करने के संबंध में फैसला देते समय 21 फरवरी 2018 को लिए गए गवाह वीके जैन के बयान पर विचार करे।

पीठ ने यह कहा कि यह जांच एजेंसी की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कर बिना पिक एंड चूक की प्रक्रिया अपनाए सभी सुबूत निचली अदालत के समक्ष पेश करे। जांच एजेंसी को सुबूत को प्रभावित करने का अधिकार नहीं है, ऐसे में 24 जून 2019 का निचली अदालत का फैसला खारिज किया जाता है।

अधिवक्ता मोहम्मद ईरशाद के माध्यम से अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया ने गवाह का बयान उपलब्ध कराने से इन्कार करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें गवाह द्वारा पुलिस को दिए गए बया की प्रति उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसल राहुल मेहरा ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में कहा था कि वीके जैन को पुलिस ने 21 फरवरी 2018 को थाने पर बुलाया था, लेकिन उनका बयान दर्ज नहीं किया गया था। वीके जैन का बयान 22 फरवरी 2018 एवं नौ मई 2018 को दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि भारतीय दंड संहिता प्रक्रिया के तहत आरोपित को कौन से दस्तावेज देने है यह स्पष्ट है। क्या दस्तावेज आरोपित को देना है यह अभियोजन पक्ष पर निर्भर करता है। दलीलों से असमति जताते हुए पीठ ने कहा कि वीके जैन से 21 फरवरी को लंबी पूछताछ हुई थी और इसकी रिपोर्ट भी तैयार की गई थी। पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने पूरी तरह से इन्कार किया है कि 21 फरवरी को बयान नहीं दर्ज किया गया, जबकि केस डायरी से स्पष्ट है कि उस दिन बयान दर्ज किया गया था। पीठ ने कहा कि अभियोजन का पक्ष विरोधाभासी है, ऐसे में इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

पीठ ने निचली अदालत की उस राय को बेतुका करार दिया जिसमें निचली अदालत ने यह पाया है कि केस डायरी के हिसाब से जैन से 21 फरवरी को मौखिक पूछताछ हुई थी। ऐसे में ये बयान आरोपित को नहीं दिए जा सकते हैं, क्योंकि बयान सीआरपीसी के तहत नहीं दर्ज किए गए।

अंशु प्रकाश से मारपीट के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने 25 अक्टूबर को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 11 आप विधायकों को पटियाला हाउस कोर्ट ने 50-50 हजार के निजी मुचलके पर जमानत दी थी। आरोप है कि 19 फरवरी 2018 को आप विधायक अमानतुल्लाह खां व प्रकाश जारवाल ने अंशु प्रकाश के साथ मारपीट की थी।

पूर्व सचिव अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया था कि 19 फरवरी, 2018 को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास पर एक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री की मौजूदगी में ही आम आदमी पार्टी के विधायकों ने उनके साथ मारपीट की थी, जिसके बाद दिल्ली सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों के बीच तनातनी बढ़ गई थी। कुछ समय बाद अंशु प्रकाश का तबादल दिल्ली से अन्यत्र कर दिया गया था।

केजरीवाल सहित 9 लोगों को मिली थी जमानत

अंशु प्रकाश से पिटाई मामले में 25 अक्टूबर 2018 को निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 9 आरोपी विधायकों को जमानत दे दी थी। इस मामले में आम आदमी पार्टी के दो विधायकों अमानत उल्लाह खान और प्रकाश जरवाल को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था, लेकिन बाद में कोर्ट ने इन्हें भी जमानत दे दी थी।

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