दिल्ली हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को लगाई फटकार यह यूपी में चलता होगा, पढ़िए टिप्प्णी

पीठ ने कड़े शब्दों में उत्तर प्रदेश पुलिस को कहा कि कोई शिकायत लेकर आपके पास आता है और आप उम्र की पुष्टि किए बिना गिरफ्तारी करने लगते हैं। चाहे वह नाबालिग हो या बालिग। इस मामले में संबंधित पुलिस कर्मियों को नोटिस भी जारी किया गया है।

Pradeep ChauhanThu, 28 Oct 2021 08:47 PM (IST)
दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को फटकार लगाई है।

नई दिल्ली,जागरण संवाददाता। युवती से प्रेम विवाह करने पर युवक के पिता और भाई को स्थानीय पुलिस के संज्ञान में लाए बगैर उत्तर पूर्वी दिल्ली से गिरफ्तार करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को फटकार लगाई है। इस मामले में सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की एकल पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह यूपी में चलता होगा, यहां नहीं चलेगा। दिल्ली में इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।

आप यहां अवैध काम नहीं कर सकते। पीठ ने कड़े शब्दों में उत्तर प्रदेश पुलिस को कहा कि कोई शिकायत लेकर आपके पास आता है और आप उम्र की पुष्टि किए बिना गिरफ्तारी करने लगते हैं। चाहे वह नाबालिग हो या बालिग। इस मामले में संबंधित पुलिस कर्मियों को नोटिस भी जारी किया गया है। उत्तर पूर्वी दिल्ली के रहने वाले एक युवक ने बीती एक जुलाई को शामली की रहने वाली युवती से प्रेम विवाह किया था।

इस मामले में युवती के स्वजन की शिकायत पर शामली थाने की पुलिस ने युवक के खिलाफ विवाह के लिए विवश कर अपहृत करने का मुकदमा दर्ज कर किया था। अक्टूबर में इस इस दंपती ने दिल्ली हाई कोर्ट जीवन की सुरक्षा की गुहार लगाते हुए याचिका दायर की थी। उसमें बताया था कि दोनों बालिग हैं। साथ ही यह भी बताया था कि युवती के स्वजन इस विवाह के खिलाफ थे। वह बार-बार धमकियां दे रहे हैं।

पीठ के संज्ञान में लाया गया कि डेढ़ महीने पहले युवक के पिता और बड़े भाई को उत्तर प्रदेश पुलिस उठा ले गई थी। दंपती की तरफ से उनके अधिवक्ता अवधेश कुमार ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने युवक के पिता और भाई को दिल्ली से ले जाने के कई दिनों बाद गिरफ्तारी शामली बस अड्डे से दिखाई है। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने इस मामले से दिल्ली पुलिस से सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं। पीठ ने कहा कि अगर पता चलता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस गिरफ्तारी के लिए दिल्ली आई थी तो यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उसमें शामिल अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच की जाए।

पीठ ने यह भी कहा कि यदि एसएचओ और आपके जांच अधिकारी केस फाइल पढ़ना नहीं जानते तो इसका कोई समाधान नहीं है। पीठ ने निर्देश दिया कि एसएचओ द्वारा एक विस्तृत हलफनामा दायर किया जाए कि यूपी पुलिस ने युवती का पता लगाने के लिए क्या प्रयास किए और यदि वे दिल्ली आए तो क्या कोई कार्रवाई करने से पहले उनके आने की सूचना स्थानीय पुलिस थाने को दी गई थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।

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