पीड़िता से शादी करने वाले दुष्कर्म आरोपित को हाई कोर्ट ने दी जमानत, पढ़िए टिप्पणी

यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम के तहत आरोपित व्यक्ति को यह कहते हुए जमानत दे दी कि अदालत प्रथम दृष्टया संतुष्ट है कि पीड़िता आरोपित के खुशी-खुशी शादी कर रह रही है और एक परिवार का पालन-पोषण कर रही है।

Pradeep ChauhanSat, 04 Dec 2021 06:20 PM (IST)
वह अपनी मर्जी से आरोपित के साथ शादी कर बच्चों के साथ शांति से रह रही है।

नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम के तहत आरोपित व्यक्ति को यह कहते हुए जमानत दे दी कि अदालत प्रथम दृष्टया संतुष्ट है कि पीड़िता आरोपित के खुशी-खुशी शादी कर रह रही है और एक परिवार का पालन-पोषण कर रही है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने पीड़िता के बयान का संज्ञान लेते हुए कहा कि पीड़िता ने स्वेच्छा से स्वीकार किया है कि वह अपनी मर्जी से आरोपित के साथ समझौता करके शादी की है और अपने दो बच्चों के साथ शांति से रह रही है।

पीठ ने कहा कि अदालत की राय है कि आरोपित को हिरासत रखने से महिला व उसके बच्चे भूख से मर जाएंगे। पीठ ने उक्त टिप्पणी के साथ आरोपित को पांच हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को हिरासत में रखना बच्चों के हित में नहीं होगा। याचिकाकर्ता के न्याय से भागने का कोई खतरा नहीं है। याचिकाकर्ता और पीड़िता ने खुशी-खुशी शादी कर ली है और उनके दो बच्चे हैं। एक साथ एक परिवार का पालन-पोषण करना याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने के लिए पर्याप्त आधार है।

अदालत ने यह भी माना कि आरोपित से हिरासत में पूछताछ की अब कोई जरूरत नहीं है। पीड़िता के पिता ने वर्ष 2017 की शुरुआत में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 17 वर्षीय बेटी का अपहरण कर लिया गया है। दिसंबर 2020 में पीड़िता ने अपनी मां को फोन करके कहा कि उसकी शादी को पिछले चार साल हो चुके हैं और तीन महीने पहले एक बच्चे को जन्म दिया। पुलिस ने उक्त सूचना पर पीड़िता को मध्य प्रदेश से दिल्ली लेकर आई थी और आरोपित को पोक्सो समेत अन्य धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था।

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