दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड पर जताई नाराजगी और लगाई फटकार, जानिए क्या है पूरा मामला?

पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि एडब्ल्यूबीआइ जानवरों की जरूरत के प्रति संवेदनशील नहीं है। उक्त टिप्पणी के साथ एडब्ल्यूबीआइ के सचिव को आगामी नौ फरवरी को होने वाली सुनवाई को पीठ के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया। एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश।

Vinay Kumar TiwariTue, 30 Nov 2021 01:29 PM (IST)
जानवरों की देखभाल के प्रति लापरवाह रवैया अपनाने पर भी जताई नाराजगी

नई दिल्ली जागरण संवाददाता। कोरोना महामारी के दौरान बंद हुए सर्कस में रखे गए जानवरों के संबंध में जानकारी नहीं होने पर सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआइ) फटकार लगाई। साथ ही जानवरों की देखभाल करने में लापरवाह रवैया अपनाने पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति जसमीत ¨सह की पीठ ने कहा कि एडब्ल्यूबीआइ द्वारा अदालत के निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया जा रहा है।हम भारत के भीतर चिडि़याघरों द्वारा रखे गए जानवरों की देखभाल के लिए चिंतित हैं जो महामारी के समस्या में हैं। जानवरों की देखभाल नहीं करना उनके लिए घातक साबित हो सकती है।

पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि एडब्ल्यूबीआइ जानवरों की जरूरत के प्रति संवेदनशील नहीं है।पीठ ने उक्त टिप्पणी के साथ एडब्ल्यूबीआइ के सचिव को आगामी नौ फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई को पीठ के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया। साथ ही मामले पर अधिकारियों को एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश। इसमें सर्कस में रखे गए सभी जानवर अब कहां है इसकी जानकारी देनी होगी। पीठ ने कहा कि संबंधित प्राधिकरण होने के बावजूद एडब्ल्यूबीआइ को सर्कस में रखे गए जानवरों और उनकी मौजूदा स्थिति की जानकारी नहीं है। पीठ ने चेतावनी दी कि वह अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने से नहीं हिचकेगी क्योंकि अधिकारी अदालत को हल्के में ले रहे हैं।

जब, एडब्ल्यूबीआइ व केंद्रीय चिडि़याघर प्राधिकरण (सीजेए) की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता राजेश गोगना ने कहा कि बोर्ड ने पिछले 15 दिनों में एक बैठक आयोजित करने की कोशिश की थी। इस पर पीठ ने कहा कि इसका कोई जबाब नहीं है कि इस मामले को पहले गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया। अदालत कोरोना महामारी के कारण देश भर के सर्कस में फंसे जानवरों की सुरक्षा के लिए पीपल फार एथिकल ट्रीटमेंट आफ एनिमल्स (पेटा) और फेडरेशन आफ इंडियन एनिमल्स प्रोटेक्शन आर्गनाइजेशन (एफआइएपीओ) की दो अलग-अलग याचिका पर सुनवाई कर रही है।

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