दिल्ली सरकार कराएगी मालचा महल का संरक्षण, एएसआइ ने देखरेख के लिए कर्मचारी किया नियुक्त

चाणक्यपुरी के पास जंगल में बने मालचा महल का संरक्षण अब दिल्ली सरकार कराएगी। सरकार ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) से इसे अपने अधीन ले लिया है। फिलहाल यहां महल की साफ-सफाई कराई गई है और दिन के समय एक कर्मचारी की भी नियुक्ति कर दी गई है।

Pradeep ChauhanSun, 05 Dec 2021 07:36 AM (IST)
चाणक्यपुरी में सरदार पटेल मार्ग पर जंगल में करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर यह स्मारक स्थित है।

नई दिल्ली [वी .के. शुक्ला] । चाणक्यपुरी के पास जंगल में बने मालचा महल का संरक्षण अब दिल्ली सरकार कराएगी। सरकार ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) से इसे अपने अधीन ले लिया है। फिलहाल यहां महल की साफ-सफाई कराई गई है और दिन के समय एक कर्मचारी की भी नियुक्ति कर दी गई है। भारत सरकार ने 1985 में इस महल को एएसआइ से लेकर अवध के नवाब के वारिसों को रहने के लिए दे दिया था। इसमें रह रहे इस परिवार के अंतिम व्यक्ति की भी नवंबर 2017 में मौत हो चुकी है।

चाणक्यपुरी में सरदार पटेल मार्ग पर जंगल में करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर यह स्मारक स्थित है। इसे मालचा महल या मालचा विसदरी कहा जाता है। इसे फिरोजशाह तुगलक ने (1351-88) बनवाया था। तुगलक द्वारा बनवाई गई यह एक शिकारगाह है। इसमें तीन मुख्य कक्ष हैं। बीच वाला कक्ष बड़ा है। नवाब वाजिद अली शाह की परपोती को मिला था महल : अवध के आखिरी नवाब वाजिद अली शाह को 1856 में अंग्रेजों ने सत्ता से बेदखल कर उन्हें कोलकाता जेल में डाल दिया था। वहां उन्होंने अपने जीवन के आखिरी 26 साल गुजारे। जब 1947 में देश को आजादी मिली तब तक वाजिद अली शाह का खानदान इधर-उधर बिखर चुका था।

बेगम विलायत महल 1970 के करीब लोगों के सामने आईं। उनका दावा था कि वो अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह की परपोती हैं। वह भारत सरकार से उन तमाम जायदाद के बदले मुआवजे की मांग कर रहीं थीं, जिसे भारत सरकार ने उनके दादा-परदादा से जब्त कर लिया था। जब विलायत महल की मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई तो एक दिन अचानक उन्होंने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के वीआइपी लाउंज को अपना घर बना लिया। 10 साल तक उन्हें वहां से हटाने की नाकाम कोशिशें होती रहीं। आखिरकार सरकार ने उन्हें 1985 में मालचा महल दे दिया।

अनधिकृत प्रवेश करने पर गोली मारने की चेतावनी : बेगम विलायत महल बेटे ¨प्रस अली रजा और बेटी सकीना महल के साथ मालचा महल में आ गईं। वो अपने साथ आठ कुत्तों को भी लेकर आईं थीं। हालांकि ये नाम का ही महल था। इसमें बिजली, पानी और खिड़की-दरवाजे नहीं थे। जंगली जानवरों को रोकने के लिए इस महल में चारों ओर से लोहे की जालियां लगी थीं। बेगम विलायत महल और ¨प्रस अली रजा के जीते जी यहां किसी को कदम रखने की इजाजत नहीं थी। वो आम लोगों के मिलना पसंद नहीं करते थे। महल के बाहर मोटे अक्षरों में लिखा होता था कि अनधिकृत प्रवेश करने पर गोली मार दी जाएगी।

बेहद गरीबी में अकेले रहते थे प्रिंस: इस महल में आने के तकरीबन 10 साल बाद 62 साल की उम्र में बेगम विलायत महल ने आत्महत्या कर ली थी। उसके बाद उनकी बेटी सकीना महल की भी मृत्यु हो गई। उनके बेटे ¨प्रस अली रजा कई साल से बेहद गरीबी में अकेले रहते थे। नवंबर 2017 में उनका भी देहांत हो गया। कहा जाता है कि भूख से उनकी मौत हो गई। मौत के बारे में भी करीब एक माह बाद पता चल सका।

ऐसे पहुंचें मालचा महल: सरदार पटेल मार्ग पर जंगल में करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क के बाद एक संकरा रास्ता पहाड़ी की ओर जाता है। इस रास्ते पर करीब 30 मीटर आगे जाएं तो खंडहर में तब्दील यह महल दिखाई देता है। अब नवाब के परिवार के लोगों का टूटा फूटा सामान यहां से हटा दिया गया है। कुछ लोग इसे भुतहा महल कहते हैं। वे इसे इसी नजरिये से देखने जाते हैं। इस रास्ते में काफी बंदर बैठे रहते हैं।

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