देश का सबसे बड़ा सिंगल एसटीपी बना रही है दिल्ली सरकार: सत्येंद्र जैन

सत्येंद्र जैन ने कहा कि निर्माण के बाद यह एसटीपी 564 एमएलडी सीवेज को यमुना में बहने से रोकेगा। यह बायो केमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) और टोटल सस्पेंडेड सालिड (टीएसएस) को 10 मिलीग्राम प्रति लीटर करेगा जो कि शोधित (ट्रीट) किए गए पानी का मानदंड हैं।

Prateek KumarSat, 18 Sep 2021 06:10 AM (IST)
दिल्ली के जल मंत्री एवं दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष सत्येंद्र जैन।

नई दिल्ली [गौरव बाजपेई]। दक्षिणी दिल्ली के ओखला में देश का सबसे बड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट दिल्ली सरकार द्वारा बनाया जा रहा है। यह एसटीपी 110 एकड़ क्षेत्रफल में फैला है। इससे रोजाना लगभग 564 एमएलडी सीवेज शोधित होगा। एसटीपी 2022 के अंत तक पूरा कर दिया जाएगा। सरकार इस परियोजना को समय से पहले पूरा करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर रही है। दिल्ली के जल मंत्री एवं दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष सत्येंद्र जैन ने भारत के सबसे बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण स्थल का शुक्रवार को दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार भारत में सबसे बड़ा सिंगल एसटीपी का निर्माण कर रही है।

निर्माण के बाद यह होगा फायदा

सत्येंद्र जैन ने कहा कि निर्माण के बाद यह एसटीपी 564 एमएलडी सीवेज को यमुना में बहने से रोकेगा। यह बायो केमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) और टोटल सस्पेंडेड सालिड (टीएसएस) को 10 मिलीग्राम प्रति लीटर करेगा जो कि शोधित (ट्रीट) किए गए पानी का मानदंड हैं। ट्रीट किए गए दूषित पानी का इस्तेमाल विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

दिसंबर 2022 तक पूरा होने की उम्मीद

इस एसटीपी का काम दिसंबर 2022 तक पूरा होने की उम्मीद है। इस एसटीपी में दक्षिण और मध्य दिल्ली के विभिन्न नालों और सीवरेज नेटवर्क से सीवेज प्राप्त होगा। अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए उन्नत प्रणालियों को इस एसटीपी के साथ एकीकृत किया जा रहा है। इसमें 12 एकड़ में फैले लगभग 150 टन कीचड़ को सुखाने के लिए सोलर-ड्राइंग की व्यवस्था भी होगी।

साफ होगी यमुना

इस एसटीपी के पूरा होने के बाद यमुना में बहने वाले दूषित पानी को रोका जा सकेगा। अतिरिक्त पानी को यमुना में छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी ओखला एसटीपी परिसर में 72 एमएलडी और 136 एमएलडी के दो एसटीपी काम कर रहे हैं। इसके निर्माण के बाद ओखला एसटीपी काम्प्लेक्स की कुल क्षमता 771 एमएलडी हो जाएगी। इस परियोजना के पूरा होने के बाद पुराने एसटीपी से आने वाले दूषित पानी की गुणवत्ता में एनजीटी के तय किए गए मानकों के अनुसार सुधार होगा।

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