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Delhi Earthquake Updates: दिल्ली में बार-बार आ रहे भूकंप के चलते DDA ने लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। Delhi Earthquake Updates: बार-बार लग रहे भूकंप के झटकों के मददेनजर दिल्ली में सभी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराना अनिवार्य कर दिया गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (Delhi Development Authority) ने इस आशय का आदेश वेबसाइट पर डाला है। फिलहाल यह आदेश सन 2001 तक बनी सभी सरकारी, गैर सरकारी, निजी इमारतों पर लागू होगा। दिल्ली वासियों को छह माह में ऑडिट की रिपोर्ट भी डीडीए को जमा करानी होगी। जिन इमारतों का ऑडिट नहीं होगा, उनकी सूची वेबसाइट पर डाल उनके मालिकों के खिलाफ कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।

इमारत कितनी मजबूत या कमजोर? ऑडिट से होगा तय

डीडीए ने यह आदेश मार्च 2016 से प्रभावी हुए भवन उप नियमों में वर्णित प्रावधानों के तहत हाइ कोर्ट के निर्देश पर जारी किया है। "सेफ्टी ऑफ बिल्डिंग्स अगेंस्ट अर्थक्वेक" शीर्षक से जारी आदेश में 21 मार्च 2001 तक बनी 15 मीटर या इससे ऊंची प्रत्येक इमारत का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराना अनिवार्य किया गया है। यह ऑडिट किसी भी मान्यता प्राप्त सरकारी संस्थान के स्ट्रक्चरल इंजीनियर से कराना होगा। इस ऑडिट में देखा जाएगा कि इमारत कहां से कितनी मजबूत और कितनी कमजोर है? ऑडिट में संबद्ध इमारत की खामियां दूर करने के लिए जो सुझाव दिए जाएंगे, उन पर अमल भी करना अनिवार्य है।

ऑडिट न कराया तो लगेगा जुर्माना

इस आदेश के मुताबिक यह सारी प्रक्रिया छह माह में पूरी की जानी है। स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने एवं इमारत की खामियां दुरूस्त कराने पर जो खर्चा आएगा, वह भी उस इमारत के मालिक द्वारा ही वहन किया जाएगा। प्रक्रिया पूरी करने के बाद स्ट्रक्चरल ऑडिट की रिपोर्ट और उसके आधार पर कराए गए सुधार की जानकारी डीडीए के उप निदेशक (भवन, एल एंड आइ, रेजीडेंशियल) और उप निदेशक (भवन, सी एंड आइ) को जमा करानी होगी। जिन इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं कराया जाएगा, उनकी सूची तय समयावधि के बाद डीडीए की वेबसाइट पर डाल दी जाएगी। इन इमारकों के मालिक पर जुर्माना लगाने सहित अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। 2001 के बाद बनी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट उनकी उम्र 30 साल पूरी होने पर कराना होगा।

3 महीने में आ चुके हैं 20 बार भूकंप

यहां पर बता दें कि पिछले 3 महीने के दौरान दिल्ली-एनसीआर में तकरीबन 20 भूकंप आ चुके हैं। पिछली बार आया भूकंप रिक्टर स्केल पर 4 से ज्यादा मापा गया था। हालांकि इसका केंद्र अलवर था, लेकिन इसके बाद दिल्ली में बनी इमारतों को लेकर स्थानीय निकायों ने कवायत तेज कर दी है। 

दिल्ली के किन इलाकों में भूकंप का ज्यादा खतरा

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, यमुना के मैदानों को भूकंप से ज्यादा खतरा है। पूर्वी दिल्ली, लुटियंस दिल्ली, सरिता विहार, पश्चिम विहार, वजीराबाद, करोलबाग और जनकपुरी जैसे इलाकों में बहुत आबादी रहती है, इसलिए वहां खतरा ज्यादा है। छतरपुर, नारायणा, वसंत कुंज जैसे इलाके बड़ा भूकंप झेल सकते हैं, क्यों कि यहां पर  इसके अलावा दिल्ली में जो नई इमारतें बनी हैं, वे 6 से 6.6 तीव्रता के भूकंप को झेल सकती हैं। पुरानी इमारतें 5 से 5.5 तीव्रता का भूकंप सह सकती हैं। दिल्ली ने 2008 और 2015 में नेपाल में भूकंप के बाद पुरानी इमारतों को ठीक करने की कवायद शुरू की थी। दिल्ली सचिवालय, दिल्ली पुलिस मुख्यालय, विकास भवन, गुरु तेग बहादुर अस्पताल की इमारत को भी मजबूत किया गया था।

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