फेसबुक पर फर्जी आइडी बनाकर किडनी ट्रांसप्लांट करवाने वाले दो दबोचे, आरोपितों ने मुंबई के डाक्टर से 10 लाख ठगे

किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के नाम पर ठगी करने वाले दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपित विपिन कुमार यूपी के अलीगढ़ व राहुल यादव प्रतापगढ़ का रहने वाला है। दोनों आरोपितों फेसबुक पर फर्जी आइडी बनाकर किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के नाम पर ठगी करने का गिरोह चला रहे थे।

Pradeep ChauhanThu, 28 Oct 2021 02:20 PM (IST)
मुंबई के एक डाक्टर से 10 लाख रुपये की ठगी की थी।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के नाम पर ठगी करने वाले दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपित विपिन कुमार यूपी के अलीगढ़ व राहुल यादव प्रतापगढ़ का रहने वाला है। दोनों आरोपितों कोरोना महामारी के दौरान फेसबुक पर फर्जी आइडी बनाकर किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के नाम पर ठगी करने का गिरोह चला रहे थे। आरोपितों ने अभी हाल ही में मुंबई के एक डाक्टर से 10 लाख रुपये की ठगी की थी।

साथ ही पांच अन्य लोगों के साथ इस तरह की ठगी कर चुके हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपित देशभर में 50 से अधिक पीड़ितों के संपर्क में थे। फिलहाल इस बारे में पूछताछ की जा रही है कि आरोपित अब तक कुल कितनों लोगों को ठग चुके हैं। क्राइम ब्रांच के संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार के मुताबिक डाक्टर राजीव रमेशचंद्र सर्जन हैं और मुंबई में रहते हैं। उन्हें किडनी से संबंधित बीमारी है, जिसके चलते उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी गई थी। उनका कोई नजदीकी रिश्तेदार नहीं है जो उन्हें किडनी दे सके। ऐसे में वह विज्ञापन के माध्यम से करण नाम के युवक के संपर्क में आए।

करण ने उन्हें मिलने के लिए दिल्ली बुलाया। 27 अगस्त को दिल्ली में मुलाकात के दौरान करण ने उनसे छह लाख रुपये एडवांस मांगे। बातचीत करने के बाद राजीव ने उसे साढ़े तीन लाख रुपये दिए। सितंबर माह में करण को उन्होंने एक लाख रुपये आनलाइन भेजे। उन्हें बताया गया कि दिल्ली के अस्पताल में 17 सितंबर को उनका आपरेशन होगा।

अस्पताल बुलाकर हुआ फरार: 16 अक्टूबर को करण ने राजीव को फोन कर दिल्ली के एक नामी अस्पताल के बाहर बुलाया। वहां उनसे पांच लाख रुपये लेकर अस्पताल के अंदर जाने के लिए कहा। राजीव जब वहां पर गए तो पता चला कि उनके नाम पर कोई बुकिंग नहीं है। शिकायत पर क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज किया गया था। इंस्पेक्टर प्रदीप पालीवाल की देखरेख में एसआइ संजीव गुप्ता की टीम ने जांच की।

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