टीकाकरण के लिए हो रही प्री-बुकिंग, आगामी दो दिनों के सभी स्लाट बुक

केंद्रों के बढ़ने के बाद समस्या काफी हद तक दूर होगी।

चिकित्सीय अधिकारियों का कयास है कि टीका केंद्रों पर टीकाकरण के लिए अप्वाइंटमेंट लेने वाले केवल उसी जिले के निवासी नहीं है बल्कि अन्य जिलों के लोग भी दूसरे जिलों में जाकर टीकाकरण करवा रहे है। यानि टीका लाभार्थी पर किसी भी प्रकार की बंदिश नहीं है।

Prateek KumarThu, 06 May 2021 07:55 PM (IST)

नई दिल्ली [मनीषा गर्ग]। वैक्सीन की कमी के बावत तमाम तरह की भ्रामक बातों के बीच एक अच्छी खबर है कि जल्द ही दक्षिण-पश्चिमी और पश्चिमी जिले में टीकाकरण के प्रति उत्साह को देखते हुए प्रशासन टीकाकरण केंद्रों की तादाद बढ़ाने जा रहा है। कम समय में अधिक से अधिक लोग टीकाकरण का लाभ लें ताकि कोरोना के प्रति उनकी प्रतिराेधक क्षमता जल्द बढ़े, इसे देखते हुए ही प्रशासन ने यह तय किया है। प्रशासन का मानना है कि फिलहाल इस महामारी से बचने का सबसे सशक्त उपाय टीकाकरण है। जल्द ही पश्चिमी जिला में सात नए टीकाकरण केंद्र खोले जाने की बात कही जा रही है। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को दिल्ली सरकार को केंद्र से टीके के और अधिक डोज प्राप्त होने वाले है। फिलहाल अप्वाइंटमेंट के लिए दो-दो दिनों की प्री-बुकिंग चल रही है। जिसके कारण लोगों को स्लाट खाली नहीं मिल पा रहा है। पर टीका केंद्रों के बढ़ने के बाद यह समस्या काफी हद तक दूर होगी

निर्धारित लक्ष्य से दूर है एक बड़ी चुनौती

लोगों में भरपूर उत्साह के बाद भी दक्षिण-पश्चिमी और पश्चिमी जिले दोनों में टीकाकरण निर्धारित लक्ष्य से थोड़ा दूर है। असल में प्रत्येक साइट को एक दिन में 150 टीके लगाने का लक्ष्य दिया गया है। इस लिहाज से रोजाना पश्चिमी जिले का 6,150 और दक्षिण-पश्चिमी जिले का 5,250 टीके लगाने लक्ष्य निर्धारित है। अधिकारियों का कहना है कि पहले ही प्री-बुकिंग के कारण अप्वाइंटमेंट मिलना मुश्किल बना हुआ है, उस पर से जिन भी कारणों से लोग टीका केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे है तो वे उनकी बड़ी चूक है। ऐसे लोगों का तत्काल अप्वाइंटमेंट रद किया जा रहा है। असल में 18 से 44 वर्ष के केवल उन्हीं लोगों को टीकाकरण हो रहा है, जिन्होंने अप्वाइंटमेंट लिया है। सरकारी दिशानिर्देशानुसार टीका केंद्र पर यदि एक या दो भी ऐसे लोग है तो उनका हर हाल में टीकाकरण होगा, चाहे इसके लिए नई वायल ही क्यों न खोलनी पड़े। ज्ञात हो एक वायल में दस टीके के डोज होते है। वायल में बचे शेष टीकों को तब किसी लाभार्थी को नहीं लगाया जा सकता जब तक उसका अप्वाइंटमेंट नहीं होगा। कुल मिलाकर लोगों की नसमझी के कारण टीके की बर्बादी बनी हुई है। यदि ऐसा जारी रहा तो सरकार के एक-एक व्यक्ति के टीकाकरण करने का लक्ष्य को पूरा बड़ी चुनौती बन सकता है।

क्या हो सकते हैं कारण

चिकित्सीय अधिकारियों का कयास है कि टीका केंद्रों पर टीकाकरण के लिए अप्वाइंटमेंट लेने वाले केवल उसी जिले के निवासी नहीं है, बल्कि अन्य जिलों के लोग भी दूसरे जिलों में जाकर टीकाकरण करवा रहे है। यानि टीका लाभार्थी पर किसी भी प्रकार की बंदिश नहीं है। कोई भी व्यक्ति चाहे वह दिल्ली के किसी भी हिस्से में रहता हो, वह किसी भी केंद्र पर अप्वाइंटमेंट लेकर टीकाकरण करा सकता है। इसके अलावा कुछ अन्य कारण भी सामने आ रहे है, इंटरनेट मीडिया पर वायरल कुछ गलत संदेश को पढ़ने के बाद लोग कोविशिल्ड के बजाय कोवैक्सीन लगवाने का मन बना चुके है। ऐसे में अप्वाइंटमेंट मिलने के बाद भी वे टीका केंद्र पर नहीं पहुंच रहे है। साथ ही कुछ लोग ऐसे है, जिनमें अभी भी टीके को लेकर झिझक व मन में संशय का माहौल है।

कोविशिल्ड और कोवैक्सीन दोनों ही टीके पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है। अप्वाइंटमेंट लेने के बाद लोग हर हाल में टीका लगवाने के लिए आगे आए। जिन्होंने भी अभी तक पंजीकरण नहीं करवाया है, वे जल्द से जल्द अरोग्य सेतु या कोविन एप पर पंजीकरण करवाएं। साथ ही अप्वाइंटमेंट प्राप्त करने का प्रयास भी जारी रखे, जैसे ही स्लाट खाली मिले तुरंत अप्वाइंटमेंट लें। पश्चिमी जिले में दिल्ली के अन्य जिलों के मुकाबले टीकाकरण अभियान की रफ्तार काफी तेज है। जिले में रोजाना कुल 11 हजार से भी अधिक टीकाकरण हो रहा है। ये रफ्तार आगे भी जारी रहे इसके लिए प्रशासन प्रयासरत है।

ईशान शर्मा, नोडल ऑफिसर, टीकाकरण (पश्चिमी जिला)

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