देश में शिक्षा को जन आंदोलन बनाना चाहते हैं सीएम केजरीवाल : मनीष सिसोदिया

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली सरकार के 2 महत्वपूर्ण एजुकेशन प्रोजेक्ट- यूथ फ़ॉर एजुकेशन और पैरेंटल इंगेजमेंट प्रोग्राम पर शिक्षा अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। बैठक में इन दोनों प्रोग्राम के पायलट फेज की उपलब्धियों पर चर्चा करने के बाद आगे के लिए अहम बिंदुओं पर चर्चा की गई।

Prateek KumarTue, 15 Jun 2021 10:51 PM (IST)
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया बच्चों को लेकर अपनी बात रखते हुए।

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। यूथ फॉर एजुकेशन प्रोग्राम पर चर्चा करते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, “देश में शिक्षा को जन आंदोलन बनाना हमारे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का विजन है। जब हम देखते हैं कि विदेशों में उच्च प्रदर्शन करने वाले देशों में शिक्षा कैसे दी जाती है , तो हम पाते हैं कि वहां वन टू वन मैपिंग का अभ्यास किया जाता है। प्रत्येक बच्चे की वन टू वन मैपिंग और उनके व्यक्तिगत प्रोफाइल को समझना बेहद ज़रूरी है। पर दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 16 लाख बच्चों की वन-टू-वन मैपिंग करना एक बड़ी चुनौती है। लेकिन, हमने इस चुनौती को एक अवसर में बदल दिया है, यूथ फॉर एजुकेशन प्रोग्राम और पैरेंट आउटरीच प्रोग्राम का मिशन हमारे बच्चों की वन-टू-वन मैपिंग करने और समुदाय को स्कूल से जोड़ने का है।

प्रोग्राम के पायलट फेज की उपलब्धियों पर की चर्चा

बता दें कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली सरकार के 2 महत्वपूर्ण एजुकेशन प्रोजेक्ट- यूथ फ़ॉर एजुकेशन और पैरेंटल इंगेजमेंट प्रोग्राम पर शिक्षा अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। बैठक में इन दोनों प्रोग्राम के पायलट फेज की उपलब्धियों पर चर्चा करने के बाद आगे के लिए अहम बिंदुओं पर चर्चा की गई। इस बैठक में विधयाक आतिशी मार्लेना, दिल्ली के शिक्षा सचिव एच.राजेश प्रसाद, शिक्षा निदेशक उदित प्रकाश राय, एससीईआरटी दिल्ली के निदेशक रजनीश कुमार सिंह, शिक्षा निदेशक के मुख्य सलाहकार शैलेंद्र शर्मा सहित जिले और जोन के डीडीई शामिल थे।

इस तरह बच्चों के भविष्य को संवारने की हो रही तैयारी

बच्चों तक पहुंचने और उनको गाइडेंस देने की जरूरत पर चर्चा करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि माता-पिता और उनके बच्चों के बीच एक पीढ़ी का अंतर होता है। उन्होंने कहा, "हम अपने और अपने बच्चों के बीच एक बहुत बड़ा जनरेशन गैप देखते हैं। इस वजह से कई चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें न हम समझ पाते हैं और न ही अपने बच्चे को समझा पाते हैं। एक बच्चा क्या सोचता है या उसके विचारों को उसकी उम्र के आसपास का दूसरा व्यक्ति ज्यादा बेहतर से समझ सकता है। इसलिए हमें एक ऐसा सिस्टम बनाने की ज़रूरत है जहां उन्हें उनकी उम्र के आसपास का कोई व्यक्ति कैरियर के लिए बच्चों को बेहतर गाइडेंस दे सके।

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