छह माह में डलाव मुक्त होगी दिल्ली, डलावघरों को बंद करके लगा रहे हैं काम्पैक्टर

प्रदूषण मुक्त हरित आवागमन के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने राजधानी में करीब 200 किलोमीटर लंबे साइकिल वाक ट्रैक तैयार करने की योजना बनाई है। योजना का मकसद दिल्लीवासियों को सुरक्षित व खुशी से साइकिल चलाने की अनुमति देना है।

Mangal YadavFri, 24 Sep 2021 08:29 AM (IST)
डलावघरों को बंद करके लगा रहे हैं काम्पैक्टर

 नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। राजधानी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए तीनों नगर निगम लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में अब दिल्ली को डलाव मुक्त करने का निगमों ने फैसला किया है। इनकी जगह अब काम्पैक्टर लगाए जा रहे हैं। इससे कूड़ा सड़क पर फैलने की समस्या खत्म हो जाएगी। साथ ही निगम को राजस्व में भी बचत होगी। निगमों का दावा है कि छह माह में निगमों के सभी डलावघर खत्म कर दिए जाएंगे।

तीनों नगर निगम क्षेत्र (पूर्वी, उत्तरी व दक्षिणी) में कुल 1209 डलावघर थे इसमें से निगम 715 डलावघर बंद कर चुका है। इनके स्थानों पर काम्पैक्टर लगाए जा रहे हैं। डलावघरों को बंद करने में दक्षिणी निगम सबसे पहले स्थान पर है। महापौर मुकेश सुर्यान ने बताया कि उनके क्षेत्र में 350 डलावघर थे। इसमें 310 बंद किए जा चुके हैं। इसके लिए 96 वार्ड में काम्पैक्टर लगाए गए हैं। बचे हुए 40 डलावघरों को भी छह माह में बंद कर दिया जाएगा। पूर्वी दिल्ली के महापौर श्याम सुंदर अग्रवाल ने बताया कि उनके क्षेत्र में 309 डलावघर थे।

इसके लिए 42 काम्पैक्टर लगाए जा रहे हैं। इसमें से चार काम्पैक्टर चालू होने से 55 डलावघर बंद भी हो गए हैं। 38 काम्पैक्टर अगले एक डेढ़ माह में शुरू हो जाएंगे। इससे सभी डलावघर बंद हो जाएंगे। पूर्वी निगम के महापौर राजा इकबाल सिंह ने बताया कि 550 डलावघर थे। इसमें 350 डलावघर निगम बंद कर चुका है। 150 डलावघर हैं, जिनको बंद करने के लिए 40 के करीब काम्पैक्टर लगाए जाएंगे।

ऐसे काम करता है काम्पैक्टर

फिलहाल घरों से एकत्र किया जाने वाला कूड़ा डलाव घरों में डाला जाता है। यह कूड़ा जहां-तहां बिखरा रहता है। इससे डलावघर के आसपास के क्षेत्र में गंदगी फैलती है। काम्पैक्टर लगाए जाने से न सिर्फ कूड़ा फैलने की समस्या समाप्त हो जाएगी। इसके साथ ही कूड़े का आकार भी बेहद कम कर हो जाएगा। फिलहाल एक डलाव पर जो कूड़ा एकत्रित होता है। उसको लैंडफिल पर ले जाने के लिए सात गाड़ियां लगानी पड़ती हैं, जबकि काम्पैक्टर लग जाने की वजह से यह एक ही गाड़ी में चला जाता है। इससे गाड़ियों के ईधन पर होने वाला खर्च भी बचता है।

बंद डलावघरों का होगा सदुपयोग

नगर निगम बंद डलावघरों का सदुपयोग कर रहा है। पूर्वी दिल्ली में साफ-सफाई के बाद सांसद गौतम गंभीर द्वारा जनरसोई खोली गई है। इसी तरह कहीं पर मनोरंजन केंद्र बनाए जा रहे हैं तो कहीं पर पुस्तकालय बनाने की योजना है। वहीं कुछ डलावघरों पर निगम दो पहिया वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन भी बना रहा है।

अनधिकृत कालोनियों में काम्पैक्टर लगाने में दिक्कत

तीनों महापौर ने दावा किया कि डलाव मुक्त दिल्ली का कार्य काफी समय पहले पूरा हो जाता, लेकिन सर्वाधिक दिक्कत उन स्थानों पर आ रही है, जहां पर अनधिकृत कालोनिया हैं। इन स्थानों पर काम्पैक्टर लगाने के लिए स्थान नहीं मिल रहा है। महापौर ने उम्मीद जताई कि दिल्ली सरकार के विभिन्न विभाग निगम को जमीन उपलब्ध कराएंगे, ताकि इन स्थानों पर काम्पैक्टर लगाकर समस्या को दूर किया जा सके।

 

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