अंधविश्वास को मिटाने का यंत्र वैज्ञानिक मनोवृत्ति, बच्चों ने दैनिक जागरण की ओर संस्कारशाला सीखा तरीका

रोहिणी के सेक्टर आठ स्थित सर्वोदय सह शिक्षा विद्यालय में संस्कारशाला की कार्यशाला के तहत बच्चों को वैज्ञानिक मनोवृत्ति के बारे में बताया गया। स्कूल की उप प्रधानाचार्य भारती कालरा ने विद्यार्थियों को इस विषय को बच्चों के सामने सरलता से पेश किया।

Prateek KumarThu, 28 Oct 2021 05:47 PM (IST)
कई विद्यार्थी विषय को लेकर काफी उत्सुक नजर आए।

नई दिल्ली [शिप्रा सुमन]। विद्यार्थियों के मन में जीवन कौशल की समझ पैदा करने और उनमें बौद्धिक विकास के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष दैनिक जागरण की ओर संस्कारशाला का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में रोहिणी के सेक्टर आठ स्थित सर्वोदय सह शिक्षा विद्यालय में संस्कारशाला की कार्यशाला के तहत बच्चों को वैज्ञानिक मनोवृत्ति के बारे में बताया गया। स्कूल की उप प्रधानाचार्य भारती कालरा ने विद्यार्थियों को इस विषय को बच्चों के सामने सरलता से पेश किया। उन्होंने जागरण में छपी कहानी को सुनाकर विद्यार्थियों को विषय के बारे में समझाने का प्रयास किया। इस बीच छात्र-छात्राओं ने भी कई सवाल पूछे, जिसका जवाब उन्होंने सरलता से दिया। इस दौरान कई विद्यार्थी विषय को लेकर काफी उत्सुक नजर आए।

उपप्रधानाचार्य ने कहा कि हमारे संविधान में वैज्ञानिक मनोवृत्ति का जिक्र विशेष रूप से है। आज के वैज्ञानिक परिवेश के बीच इसे समझाना जरूरी है। वैज्ञानिक मनोवृत्ति उत्सुकता की भावना और सुधार की बात करती है और इसे प्रत्येक नागरिक काे समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक मनोवृत्ति का मतलब है कि विज्ञान के युग में किस तरह सजग होकर जीवन जिया जाए। ऐसा माना जाता है कि विज्ञान के पास हमारी हर समस्या का समाधान है। इसलिए शुरुआत से ही बच्चों में वैज्ञानिक मनोवृत्ति और जिज्ञासा पैदा करनी चाहिए। इस दौरान स्कूल की अन्य शिक्षकों ने भी बच्चों से इसे लेकर बातचीत की। शिक्षकों ने उन्हें बताया कि जीवन में कभी भी जीवन में अंधविश्वास को न आने दें, और विकास और विज्ञान के दौर में सभी दावे को वैज्ञानिक पहलू से परखें। क्योंकि प्रकृति से जुड़ने के लिए विज्ञान को समझना जरूरी है।

अंधविश्वास को मिटाने का यंत्र वैज्ञानिक मनोवृत्ति को विकसित करना है। इसकी शुरूआत घर से होनी चाहिए। पढ़े-लिखे लोग भी इसकी गिरफ्त होते हैं, इसे दूर करने की जरूरत है। स्वयं उदाहरण बनकर ही अंधविश्वास को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। ताकि लोग भी इसकी प्रामाणिकता को समझें। कार्य और कारण सिद्धांत के तहत वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना चाहिए क्योंकि कारण होगा तभी कार्य होगा। यह समझ बच्चों में शुरूआत से विकसित करना चाहिए। मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है और सोचने की शक्ति ही उसे एक दूसरे से अलग करती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण ऐसी मनोवृत्ति है जो विवेकपूर्ण निर्णय लेने में सहायता करती है। इसमें प्रमाण के बगैर किसी बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता। यह आदत बच्चों में जरूरी है ताकि उनमें तर्कशीलता विकसित हो।

अवधेश कुमार झा, प्रधानाचार्य, सर्वोदय सह शिक्षा विद्यालय, रोहिणी सेक्टर आठ

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