टीकाकरण में सरकार के स्तर पर खामी नहीं, समस्या अस्थायी है; जल्द आएंगे अच्छे दिन

तमाम एहतियात और नियमों के पालन से बचाव संभव है।

COVID-19 Vaccination टीकाकरण में सरकार के स्तर पर खामी नहीं है। आपात इस्तेमाल की मंजूरी से लोग कोवैक्सीन को लेकर हिचक रहे थे। इसका असर उत्पादन पर भी पड़ा। अब कई टीकों की मंजूरी से आपूर्ति दुरुस्त होगी।

Sanjay PokhriyalTue, 18 May 2021 09:07 AM (IST)

डॉ सुनीला गर्ग। COVID-19 Vaccination मौजूदा समय में टीकाकरण तीन स्तरों पर चल रहा है। पहले स्तर पर 45 से अधिक उम्र के लोगों के लिए केंद्र सरकार सभी राज्यों को टीका उपलब्ध करा रही है। दूसरे स्तर पर 18 से 44 साल की उम्र के लोगों को राज्य सरकारें टीका लगवा रही हैं। इसके लिए राज्य सरकारें खुद सीधे कंपनियों से टीका खरीद रही हैं। तीसरे स्तर पर निजी अस्पतालों के माध्यम से टीके का शुल्क भुगतान कर टीकाकरण की व्यवस्था है। लेकिन अभी एक-दो माह लोगों को थोड़ा धैर्य रखना पड़ेगा। देश के हिसाब से देखें तो कम से कम एक पहली खुराक सबको प्राथमिकता से देने की जरूरत है। इससे लोगों में कुछ रोग प्रतिरोधकता विकसित होगी। कोविशील्ड की पहली डोज लेने के बाद दूसरी डोज के लिए कम से कम तीन माह (12 सप्ताह) का समय होगा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को पहली डोज लग सकेगी।

टीकाकरण अभियान में सरकार के स्तर पर खामी नहीं है। शुरुआत में लोग कोवैक्सीन टीका लेने को तैयार नहीं थे। उनमें उत्साह की कमी थी। क्योंकि आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिलने के बाद कुछ लोग बेवजह टीके के असर को लेकर सवाल खड़े कर रहे थे। इससे समस्या बढ़ी और इसका असर उत्पादन बढ़ाने की प्रक्रिया पर भी पड़ा। खासतौर पर शुरुआत में कोवैक्सीन की मांग जयादा नहीं होने के कारण इस टीके का उत्पादन क्षमता के अनुरूप ही जारी रहा। मांग अधिक नहीं होने का असर यह हुआ कि जितनी तेजी से उत्पादन बढ़ाना चाहिए था वह नहीं हुआ। भारत बायोटेक की शुरुआत में महीने में करीब 10 लाख डोज तैयार करने की क्षमता थी, वह उसी क्षमता से टीका बना रही थी। बाद में कोरोना का संक्रमण बढ़ने पर अचानक टीके की मांग बढ़ गई। अभी इस टीके का उत्पादन बढ़ा भी है।

45 साल से अधिक उम्र के लोगों के टीकाकरण के लिए अब भी वॉक इन की व्यवस्था सरकार ने खत्म नहीं की। पहले टीकाकरण को लेकर लोगों में हिचकिचाहट थी, अब वह व्याकुलता में बदल चुकी है। इस वजह से टीकाकरण केंद्रों पर भीड़ बढ़ गई। लिहाजा, भीड़ नियंत्रित करने के लिए संभव है कि कुछ जगहों पर 45 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए भी कोविन एप पर स्लॉट बुक करने की अनिवार्यता कर दी गई। जिन लोगों ने पहले निजी अस्पतालों में टीके की पहली डोज ली थी वे सरकारी अस्पतालों में या जिन निजी अस्पतालों में टीका लग रहा है वहां जाकर दूसरी डोज ले सकते हैं। इसलिए 45 से अधिक उम्र के लोगों के टीकाकरण में कोई परेशानी नहीं है। समस्या 18 से 44 साल की उम्र के लोगों के टीकाकरण में है। कई राज्य सरकारें चाहती हैं कि उनकी जरूरत के अनुसार एक साथ टीका उपलब्ध हो जाए, जो व्यावहारिक नहीं है। चरणबद्ध तरीके से ही टीके की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए तभी टीकाकरण अभियान ठीक से चल पाएगा, नहीं तो व्यवस्था चरमरा जाएगी।

मौजूदा समय में टीकाकरण अभियान की आलोचना अधिक हो रही है, जबकि इतने कम समय में करीब 18 करोड़ टीकाकरण हुआ, दूसरी लहर के बावजूद टीकाकरण का अभियान प्रभावित नहीं हुआ, देश भर में बड़े स्तर पर मशीनरी लगी हुई है। हमें अपनी आबादी का भी ध्यान रखना होगा। 18 से 44 साल की उम्र के लोगों के टीकाकरण के लिए राज्यों का बहुत दबाव था वरना 30 साल से अधिक उम्र के लोगों या 35 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण शुरू हुआ होता। कोरोना की दूसरी लहर में भी 45 साल से अधिक उम्र के लोगों की मौतें अधिक हुई हैं। पहली लहर का लोगों ने मास्क पहनकर कर सामना किया। कोरोना के संक्रमण से बचाव में यही सबसे बड़ा हथियार है। इस बार बड़ी आबादी के लिए टीकाकरण को खोलने से थोड़ी समस्या हुई है लेकिन यह समस्या अस्थायी है। कोविशील्ड व कोवैक्सीन का उत्पादन बढ़ने के साथ स्पुतनिक की उपलब्धता भी होगी। कई नए टीके भी अगले कुछ महीने में आने की उम्मीद है। फिर भी हमें मास्क पहनने व शारीरिक दूरी के नियमों के पालन पर जोर देना होगा। तमाम एहतियात और नियमों के पालन से बचाव संभव है।

[सलाहकार आइसीएमआर और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की कम्युनिटी मेडिसिन की निदेशक प्रोफेसर]

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