देवांगना और नताशा केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- असीमित नहीं है यूएपीए का उद्देश्य

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ ने तीनों आरोपितों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत दी है। पीठ ने तीनों को पासपोर्ट जमा कराने व गवाहों को प्रभावित और सुाबूतों के साथ छेड़खानी नहीं करने का निर्देश भी दिया है।

Prateek KumarWed, 16 Jun 2021 08:52 AM (IST)
पीठ ने पासपोर्ट जमा कराने व गवाहों को प्रभावित और सुाबूतों के साथ छेड़खानी नहीं करने का निर्देश दिया है।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगे की आरोपित देवांगना कलिता, नताशा नरवाल व आसिफ इकबाल की जमानत अर्जी को दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वीकार लिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ ने तीनों आरोपितों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत दी है। पीठ ने तीनों को पासपोर्ट जमा कराने व गवाहों को प्रभावित और सुाबूतों के साथ छेड़खानी नहीं करने का निर्देश भी दिया है।

गैर कानूनी गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेने की हिदायत

इसके साथ ही कहा कि वे किसी भी गैर-कानूनी गतिविधियों में हिस्सा न लें और जेल प्रशासन को दिए गए पते पर ही रहें। पीठ ने कहा कि 16 सितंबर, 2020 को दाखिल किए गए आरोप पत्र के तहत अभियोजन पक्ष ने 740 गवाह बनाए हैं और ट्रायल होना अभी बाकी है। महामारी की दूसरी लहर के बाद अब ये उम्मीद कम है कि अदालत की सामान्य कार्यवाही जल्द शुरू होगी। लिहाजा, पीठ ने आसिफ, देवांगना व नताशा को जमानत देने से इन्कार करने के क्रमश: 26 अक्टूबर, 2020 और 28 अक्टूबर के निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया।

अदालत ने बताया असीमित नहीं है यूएपीए का उद्देश्य

पीठ ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के दायरे में देश की रक्षा पर प्रभाव डालने वाले मामलों से निपटना शामिल है। न इससे कम और न ही इससे ज्यादा। यूएपीए के तहत आतंकवाद की परिभाषा कुछ हद तक अस्पष्ट है व इसे आइपीसी के तहत आने वाले आपराधिक कृत्यों के लिए सामान्य कानून की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

 

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