अब तितलियां बताएंगी दिल्ली में कितना है प्रदूषण का स्तर, बायोडायवर्सिटी पार्को में की जाएगी गिनती

Air Pollution in Delhi दिल्ली के सातों बायोडायवर्सिटी पार्को में विचरण करने वाली तितलियों की गणना की जाएगी। इस गणना के माध्यम से राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के पैमाने को भी आंका जाएगा। बायोडायवर्सिटी पार्को में कल से 30 अक्टूबर तक तितलियों की गिनती की जाएगी।

Mangal YadavSun, 24 Oct 2021 07:59 AM (IST)
तितलियों की गणना से पता चलेगा प्रदूषण का स्तर

नई दिल्ली [संजय सलिल]। दिल्ली के सातों बायोडायवर्सिटी पार्को में विचरण करने वाली तितलियों की गणना की जाएगी। इस गणना के माध्यम से राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के पैमाने को भी आंका जाएगा। गणना 25 से 30 अक्टूबर तक यमुना, अरावली, कमला नेहरू रिज, तिलपथ वैली, नीला हौज, कालिंदी व तुगलकाबाद स्थित बायोडायवर्सिटी पार्काें में सुबह 10 से दोपहर 12 बजे की अवधि के बीच की जाएगी। इसके लिए दो से पांच सदस्यों की कई टीमें बनाई गई हैं।

यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क के प्रभारी विज्ञानी डा. फैयाज खुदसर ने बताया कि कीटों के समूह लेपिडाप्टेरा में मौजूद तितलियां राजधानी के बायोडायवर्सिटी पार्को की खासियत हैं। तितलियां पर्यावरण की गुणवत्ता की प्रमाण मानी जाती हैं। यही कारण है कि जहां जितनी अधिक तितलियां उड़ती हुई पाई जाती हैं, वहां का पर्यावरणीय माहौल उतना ही जीवंत होता है।

उन्होंने बताया कि तितलियां वायु की शुद्धता की सूचक होती हैं क्योंकि इनकी मौजूदगी पर्यावरण में प्रदूषक तत्वों जैसे कार्बन डाई-आक्सइड, कार्बन मोनो-आक्साइड, सल्फर डाई- आक्साइड, धुएं आदि की मात्र को भी रेखांकित करती हैं। ऐसे में तितलियों की गिनती से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर के मापने में मदद मिलेगी।

दरअसल, राजधानी में हर वर्ष इस अवधि में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में तितलियों की गिनती करने का इस वर्ष भी विज्ञानियों ने योजना बनाई है। दिल्ली में बायोडायवर्सिटी पार्को में कल से 30 अक्टूबर तक होगी तितलियों की गिनती, गणना के लिए कई टीमें गठित की गईं

पहली बार दिखी थी इंडियन स्कीपर प्रजाति

वर्ष 2020 के सितंबर में हुई गणना में यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में पहली बार इंडियन स्कीपर प्रजाति की तितली देखी गई थी। तितलियां विशेष पौधों पर ही अंडे देती हैं। जैसे लाइम बटरफलाई केवल नींबू के पौधों पर ही अंडे देती हैं। क्योंकि अंडे से जो इल्लियां बनती हैं, वह उनके पत्तों को खाती हैं और प्यूपा में बदलती हैं और उससे तितली बन जाती हैं।

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