Coronavirus News: कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के लिए खतरा बन रहा म्यूकोरमाइकोसिस, पीड़ित जरूर लें वैक्सीन

हाल के महीनों में म्यूकोरमाइकोसिस के मामलों में दो से तीन गुना बढ़ोतरी देखी गई है।

Coronavirus News कुछ खास बीमारियों से ग्रसित मरीजों को इसके संक्रमण का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोग अगर कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आ जाएं तो उनमें मृत्यु दर 50 फीसद तक पहुंच सकती है।

Jp YadavSun, 11 Apr 2021 08:08 AM (IST)

नई दिल्ली/गुरुग्राम, ऑनलाइन डेस्क। कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच म्यूकोरमाइकोसिस के मरीज भी खतरे की जद में हैं। इनमें मधुमेह के मरीजों को सबसे ज्यादा खतरा है। दरअसल, म्यूकोरमाइकोसिस गंभीर फंगल संक्रमण के कारण होता है। ऐसे में इस तरह के मरीजों को कोरोना की वैक्सीन जरूर लेनी चाहिए। यह कहना है गुरुग्राम स्थित मेदांता द मेडिसिटी अस्पताल में क्रिटिकल केयर एंड एनेस्थिसियोलाजी विभाग के चेयरमैन डॉ. यतिन मेहता का। उनका कहना है कि यह संक्रमण फंजाइ की कई प्रजातियों के कारण हो सकता है। फंजाइ हमारे वातावरण में आमतौर से पाए जाते हैं। फंजाइ सड़ते हुए कार्बनिक पदार्थ या मिट्टी में मौजूद होते हैं। जिन लोगों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत होती है, उनमें से अधिकतर लोगों पर फंजाइ का कोई खास असर नहीं होता है। वहीं, कुछ खास बीमारियों से ग्रसित मरीजों को इसके संक्रमण का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोग अगर कोरोना वायरस की चपेट में आ जाएं तो उनमें मृत्यु दर 50 फीसद तक पहुंच सकती है।

डॉक्टर यतिन की मानें तो पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में हमेशा ही म्यूकोरमाइकोसिस का प्रकोप अधिक  है। इस बीच 2020 में कोविड महामारी के बाद से म्यूकोरमाइकोसिस के मरीजों की संख्या में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कुछ तरह के कैंसर के मरीज़ों, अनियंत्रित मधुमेह के मरीजों, स्टेम सेल या अंग प्रत्यारोपण करवा चुके मरीजों और लंबे समय तक कार्टिकोस्टेराइड्स का इस्तेमाल करने वाले मरीजों को इसके संक्रमण का ख़तरा अधिक रहता है। इन सभी बीमारियों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है।

देश में कई जगहों पर डॉक्टरों ने अनुभव किया है कि कोविड-19 के मरीजों में म्यूकोरमाइकोसिस के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। इन मरीजोंं के अस्पताल में रहने के दौरान या घर लौटने के कुछ हफ्तों बाद भी म्यूकोरमाइकोसिस के मामले देखे गए हैं। खून में शुगर की मात्रा बढ़ने पर फंजाइ अच्छी तरह विकसित होता है। इसके साथ ही कोविड-19 के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती मरीजों को कार्टिकोस्टेराइड्स या अन्य दवाइयां दी जाती हैं, जिनसे मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। उन्हें फंगल संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है।

इसके अलावा कार्टिकोस्टेराइड्स खून में शुगर की मात्रा को बढ़ा सकते हैं, जिससे फंगस को बढ़ने के लिए ज़्यादा अनुकूल वातावरण मिलता है। लंबे समय तक आर्टिफिशियल वेंटिलेशन, आई/वी न्यूट्रिशन के कारण आइसीयू में भर्ती मरीज़ों में फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. यतिन मेहता के मुताबिक हाल के महीनों में म्यूकोरमाइकोसिस के मामलों में दो से तीन गुना बढ़ोतरी देखी गई है। इसमें खासतौर से ऐसे मरीज़ शामिल हैं जो कोविड-19 के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे। शुरुआत में म्यूकोरमाइकोसिस के लक्षण बहुत गंभीर नहीं दिखाई देते। लेकिन ऐसी चोट जो ठीक नहीं हो रही हो, मधुमेह के मरीज़ में चोट का रंग काला होना, नाक से बदबूदार पानी निकलना और उसका रंग काला होना, आंख या गर्दन के आसपास दर्द या सिरदर्द और नाक में रुकावट आदि म्यूकोरमाइकोसिस के लक्षण हैं। 

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