कोरोनावायरस ने किसान नेताओं की भी बढ़ाई चिंता, सोच रहे कहीं शाहीन बाग जैसा न हो जाए हाल

किसान नेताओं को चिंता सताने लगी है कि कहीं उनके आंदोलन का हाल भी शाहीन बाग जैसा न हो जाए।

राजधानी और आसपास के इलाके में बढ़ रहे कोरोना के मरीजों ने किसान नेताओं की भी चिंता को डबल कर दिया है। एक तो वैसे ही धरना स्थल से किसानों की संख्या कम होती जा रही है उस पर कोरोना के डर से किसान वापस लौट रहे हैं।

Vinay Kumar TiwariMon, 12 Apr 2021 04:57 PM (IST)

नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। राजधानी और आसपास के इलाके में बढ़ रहे कोरोना के मरीजों ने किसान नेताओं की भी चिंता को डबल कर दिया है। एक तो वैसे ही धरना स्थल से किसानों की संख्या कम होती जा रही है उस पर कोरोना के डर से किसान धरना स्थल से अपने घर वापस लौट रहे हैं। कृषि कानून विरोध को लेकर जब धरना प्रदर्शन शुरु हुआ था उस समय यहां पर हजारों की संख्या में किसान मौजूद रहते थे, उनके लिए हर तरह के इंतजाम भी थे।

साल 2020 में सीएए और एनआरसी के विरोध में शाहीन बाग में महिलाएं धरना देकर प्रदर्शन पर बैठ गई थीं, उनको भी कई राजनीतिक दलों ने सहयोग किया था। फरवरी में कोरोना ने दस्तक दी, सरकार ने मार्च में लॉकडाउन किया, शाहीन बाग का धरना खत्म हो गया। लॉकडाउन खुला तो आंदोलनकारियों को वहां पर वापस धरना नहीं शुरु करने दिया गया।

अब साल 2021 में फिर से मार्च का माह खत्म हुआ है, अप्रैल में अब बीते साल के सारे रिकॉर्ड टूट रहे हैं। अब दिल्ली की तीन सीमा पर किसानों का धरना चल रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल फिर से लॉकडाउन लगाने के संकेत दे चुके हैं। ऐसे में किसान हैरान परेशान है, उनका सोचना है कि अगर सरकार ने फिर से लॉकडाउन लगा दिया तो उनका धरना ऐसे ही खत्म हो जाएगा। उनकी मांग पर सरकार ध्यान नहीं देगी। अब किसान नेता इन बातों को सोचकर काफी परेशान हैं।

वैसे भी अब समय के साथ धरना स्थल पर चीजें भी कम होती जा रही है और किसान भी अपना सामान लेकर अपने जनपद को वापस लौट गए। एक दो गलत निर्णयों ने भी किसानों का इस आंदोलन से मुंह मोड़ा है। जिसमें 26 जनवरी को लाल किले पर झंडा फहराया जाना और उपद्रव को प्रमुख माना जा रहा है। अब एक दूसरा बड़ा कारण कोरोनावायरस का फैलाव होना माना जा रहा है।

गौरतलब है कि देश में बीते 24 घंटे में कुल 1,68,912 नए केस दर्ज किए गए. जबकि 904 लोगों की मौत हुई है. जो अबतक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है, अगर यही रफ्तार रही तो देश जल्द ही हर रोज़ दो लाख तक मामले दर्ज करने लगेगा। इससे पहले शाहीन बाग में सीएए और एनआरसी को लेकर इसी तरह से कालिंदी कुंज-नोएडा लिंक रोड पर तीन माह से अधिक समय तक इसी तरह से धरना देकर प्रदर्शन किया गया था।

इस वजह से हजारों की संख्या में वाहन चालक परेशान थे। इस रास्ते से धरना प्रदर्शन को खत्म करने के लिए कोर्ट में केस फाइल किया गया था, अब यूपी गेट पर चल रहे किसान आंदोलन के दौरान जाम की गई सड़क को खाली कराने के लिए भी इसी तरह से एक केस कोर्ट में फाइल किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी आंदोलन को अनुमति नहीं दी जाती है जिससे सार्वजनिक परिवहन बाधित हो।

टीकरी बॉर्डर पर मुख्य रास्ता बंद होने से पंजाब और हरियाणा से रोजमर्रा का सामान नहीं आ पा रहा है।आंदोलन स्थल के आसपास की सैकड़ों दुकानें बंद पड़ी हैं। 400 से अधिक छोटे बड़े होटल और रेस्टोरेंट बंद हो गए हैं। पेट्रोल पंप बंद पड़े हैं।

नहीं ली गई स्वीकृति
किसान आंदोलन के लिए पुलिस या किसी अन्य एजेंसी से आंदोलन की स्वीकृति नहीं ली गई। लिहाजा इसे अवैध कहना गलत नहीं होगा। इस आंदोलन को राजनीतिक दलों का समर्थन भी हासिल था। इस स्थिति में पुलिस जबरन प्रदर्शन स्थल से लोगों को हटा भी नहीं सकती। हां, खास रणनीति बनाकर उन्हें को काबू में रखे हुए है।

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