कोरोना का दौर खत्म, जमानत और पैरोल पर चल रहे कैदियों को जल्द वापस लौटना होगा जेल

राजधानी की तीनों जेल में हैं करीब 15 हजार कैदी।
Publish Date:Tue, 20 Oct 2020 05:33 PM (IST) Author: Prateek Kumar

नई दिल्ली, सुशील गंभीर। कारोना महामारी के दौरान जेल से जमानत और पैरोल पर छोड़े गए कैदियों को अब जल्द ही वापस लौटना होगा, क्योंकि हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि कोरोना का दौर खत्म हो गया है। जमानत और पैरोल की जो बार-बार अवधि बढ़ाई जाती रही है, उस पर विचार करना होगा।

मुख्य न्यायमूर्ति डीनए पटेल की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट की फुल बेेंच जल्द ही इस पर विचार कर फैसला लेगी। क्योंकि जो कैदी जेल में कोरोना संक्रमित पाया गया है, उसकी जेल प्रशासन ने अच्छे से देखभाल की है। कोरोना का दौर अब खत्म हो चुका है।

कोरोना के अलावा जो जमानत और पैरोल के कारण हैं, वो जारी रहेंगे। हाई कोर्ट की यह प्रतिक्रिया एक अर्जी पर आई, जोकि दिल्ली दंगों की पैरवी से जुड़े एक अभियोजक ने दायर की। जिसमें कहा गया है कि दिल्ली दंगों के कई आरोपित कोरोना की दलील देकर जमानत ले रहे हैं। हाई कोर्ट ने पूर्व में जो आदेश दिए हैं, उन पर विचार करना चाहिए। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि जल्द ही फुल बैंच इस पर विचार करेगी।

वकीलों ने की सभी अदालतें खोलने की मांग

बता दें कि इससे पहले राजधानी की सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशन की समन्वय समिति ने सभी अदालतों को खोलने की मांग करते हुए हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति को पत्र लिखा है। पत्र में मुख्य न्यायाधीश से मांग की गई है कि सभी अदालतों में न्यायाधीश आएं भले ही सुनवाई वचरुअल ही की जाए। पत्र में मांग की गई है कि सभी जिला अदालतों को एक नवंबर तक सामान्य सुनवाई के लिए तैयार किया जाना चाहिए। पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में भी वचरुअल सुनवाई होती है, लेकिन जज दफ्तर में आकर केस सुनते हैं।

फिलहाल 25 फीसद अदालतें खुलती हैं, लेकिन उनमें भी न्याय प्रक्रिया सामान्य नहीं है। अदालतों की सुनवाई सामान्य प्रक्रिया से न होने के चलते वकीलों का एक बड़ा समूह आर्थिक और मानसिक परेशानियों से जूझ रहा है। समन्वय समिति के चेयरमैन वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव नसीयर ने बताया कि जब बाजार खुल सकते हैं, सिनेमा हॉल खुल सकते हैं, तो फिर अदालतें खोलने में क्या परेशानी है। उन्होंने बताया कि अदालत की सुनवाई सामान्य न होने के चलते लंबित मामलों की गिनती बढ़ती जा रही है। इसलिए बेहद जरूरी है कि अदालतों को सामान्य प्रक्रिया में लाया जाए।

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