मोदी सरकार के इस फैसले का कांग्रेस नेता अजय माकन ने की तारीफ, कही ये बड़ी बात

नई दिल्ली, जेएनएन। कांग्रेस ने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है। साथ ही पार्टी ने सरकार से यह सवाल भी पूछा है कि क्या सिगरेट और पान मसाले पर भी वह पाबंदी लगाएगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय माकन ने ई-सिगरेट पर पाबंदी लगाने के बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह अच्छी बात है मगर सरकार को यह भी बताना चाहिए कि वह सिगरेट और पान मसाला पर भी क्या इसी तरह का प्रतिबंध लगाएगी।

अजय माकन ने कहा कि ई-सिगरेट पर पाबंदी की बात दो दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कही थी और अच्छा होता सरकार ने उनके बयान से पहले ही यह फैसला कर लिया होता।

केंद्र ने दी अध्यादेश को मंजूरी

केंद्र सरकार ने ई-सिगरेट और ई-हुक्का पर रोक लगाने के लिए बुधवार को एक अध्यादेश को मंजूरी दी। इस अध्यादेश के तहत देश में ई-सिगरेट के उत्पादन, आयात, निर्यात, ढुलाई, बिक्री और विज्ञापन पर रोक लगा दी गई है। प्रावधानों के उल्लंघन पर पांच साल की सजा और तीन लाख रुपये जुर्माना भरना होगा। अध्यादेश के लागू होने के बाद ई-सिगरेट का स्टॉक खुद से घोषित करते हुए नजदीकी पुलिस स्टेशन में जमा कराना होगा।

जुर्माना और सजा का प्रावधान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस अध्यादेश के मसौदे को मंजूरी दी गई। हालांकि बाहर होने की वजह से स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन बैठक में शामिल नहीं हुए। कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रस्तावित अध्यादेश के तहत पहली बार कानून का उल्लंघन करने वालों को एक साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक जुर्माना लगेगा। दूसरी बार उल्लंघन करने पर तीन साल कारावास और पांच लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। इसी तरह अगर कोई व्यक्ति ई-सिगरेट का भंडारण करता है, तो उसे छह माह की सजा और 50,000 रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा।

ई-सिगरेट को तकनीकी तौर पर ईएनडीएस यानी इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम कहा जाता है। सरकार ने ई-सिगरेट के मुद्दे पर विचार करने के लिए वित्त मंत्री सीतारमण की अध्यक्षता में एक जीओएम बनाया था। इसके बाद ही सरकार ने अध्यादेश जारी करने का कदम उठाया है।

 युवाओं के लिए खतरनाक है ई-सिगरेट 

सीतारमण ने कहा कि ई-सिगरेट जैसे उत्पाद स्वास्थ्य के लिए खासकर युवाओं के लिए खतरनाक हैं, इसलिए सरकार ने इन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। उन्होंने अमेरिका में किए गए अध्ययनों के आधार पर आंकड़े देते हुए कहा कि स्कूली छात्रों में ई-सिगरेट के इस्तेमाल में 77.8 फीसद वृद्धि हुई है। इसी तरह मिडिल स्कूल के छात्रों में इसके इस्तेमाल में 48.5 फीसद की वृद्धि हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में लगभग 30 लाख लोग नियमित रूप से ई-सिगरेट का सेवन कर रहे हैं। 2011 से 2015-16 के दौरान अमेरिका में ई-सिगरेट की खपत में 900 फीसद की वृद्धि हुई है। अमेरिका में ई-सिगरेट के चलते कम से कम सात लोगों की मौत हुई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में ई-सिगरेट को पहले धूमपान छोड़ने में मदद करने वाले डिवाइस के रूप में पेश किया गया, लेकिन अब ये स्टाइल स्टेटमेंट के तौर पर उभर रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि इनका सेवन करने वाले धूमपान नहीं छोड़ रहे हैं। वास्तविकता यह है कि कुछ लोग इनके सेवन के आदी हो गए हैं, क्योंकि ये उत्पाद अच्छे लगते हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि ई-सिगरेट के तकरीबन 400 ब्रांड हैं और इसके 150 से ज्यादा फ्लेवर हैं। हालांकि भारत में किसी भी ब्रांड की ई-सिगरेट का उत्पादन नहीं होता। ई-सिगरेट के धुएं में निकोटिन की बड़ी मात्रा होती है जो धूमपान करने वाले के पास मौजूद लोगों को भी बुरी तरह प्रभावित करती है। 

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