एकल विद्यालय के बच्चे कार्टून-कहानियों से जानेंगे गीता का सार, पाठ्यक्रम में और क्या है शामिल जानिए

एकल विद्यालय ने बच्चों के सर्वागीण विकास की ओर कदम भी बढ़ा दिए हैं। देश के आदिवासी बहुल और सुदूर गांवों में संचालित हो रहे एक लाख से अधिक एकल विद्यालय के छात्रों के लिए गीता आधारित एक विशेष पुस्तक तैयार की गई है।

Pradeep ChauhanMon, 04 Oct 2021 01:25 PM (IST)
एकल विद्यालय ने बच्चों के सर्वागीण विकास की ओर बढ़ाए कदम। प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। स्कूलों के पाठ्यक्रम में श्रीमद्भगवद् गीता को लागू करने की मांग अक्सर उठती रहती है। इसके जरिये एकल विद्यालय ने बच्चों के सर्वागीण विकास की ओर कदम भी बढ़ा दिए हैं। देश के आदिवासी बहुल और सुदूर गांवों में संचालित हो रहे एक लाख से अधिक एकल विद्यालय के छात्रों के लिए गीता आधारित एक विशेष पुस्तक तैयार की गई है। इसमें कार्टून और बाल कहानियों के माध्यम से गीता के श्लोकों के अर्थ को सरल तरीके से समझाया गया है तथा इसके माध्यम से उनके जीवन में नैतिकता के गुण लाने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने की कोशिश की गई है। विशेष बात यह है कि इसमें हरे कृष्ण आंदोलन की प्रणोता इस्कान और संयुक्त राष्ट्र का भी साथ मिला है।

गौरतलब है कि इन स्कूलों का संचालन एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन की ओर से हो रहा है, जिसमें 28 लाख से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन बच्चों के लिए संयुक्त राष्ट्र व इस्कान के साथ मिलकर गीता के श्लोक पर आधारित यह पुस्तक तैयार की गई है। विशेष बात यह है कि दो लाख पुस्तकें छात्रों को बांट भी दी गई हैं। इसके आधार पर ही प्रतियोगिता का आयोजन भी होगा, जिसे वैल्यू एजुकेशन ओलंपियाड-2021 नाम दिया गया है। 18 अक्टूबर को होने वाली इस प्रतियोगिता में देशभर में एकल विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र भाग लेंगे। प्रतियोगिता में जीतने और भाग लेने वाले छात्रों को संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रशस्ति पत्र मुहैया कराया जाएगा। इस पुस्तक में परोपकार, विश्वसनीयता, न्याय संगत, न्याय के प्रति निष्ठा, सत्यनिष्ठा व ईमानदारी के विषय को कहानी और आकर्षक काटरून में पेश किया गया है।

साथ में गीता का श्लोक है। पर्यावरण की रक्षा को लेकर भी कहानियां हैं। विश्व की सबसे त्रासदियों में से एक भोपाल गैस त्रसदी, चिपको आंदोलन, इस्कान के संस्थापक श्रील प्रभुपाद व जल पुरुष राजेंद्र सिंह के बारे में परिचित कराया गया है। इस संबंध में फाउंडेशन के अध्यक्ष एसके जिंदल ने बताया कि एकल का उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ाते हुए उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना है।

यह गीता के बिना अधूरा है। अभी पर्यावरण का विषय भी चिंता पैदा करने वाला है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र का पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) तथा संयुक्त राष्ट्र की धार्मिक पहल (यूआरआइ) के साथ फेथ फार अर्थ भी साथ आए हैं।

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