दिल्ली के 48 हाटस्पाट ठिकानों पर बच्चे मांगते है भीख, 6 बच्चे स्कूल में नामांकित, आरटीआई में खुलासा

राजधानी में कुल 48 ठिकाने (हाटस्पाट) ऐसे हैं जहां बच्चें भीख मांगते हैं। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयो (डीसीपीसीआर) ने सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत मिली सूचना के मुताबिक आयोग ने साल 2021 में 48 ऐसे हाटस्पाट चिन्हित किए हैं।

Pradeep ChauhanTue, 07 Dec 2021 09:00 PM (IST)
नौ बच्चों को अस्थायी तौर पर बाल देखभाल संस्थान में रखा गया है।

नई दिल्ली [रीतिका मिश्रा]। राजधानी में कुल 48 ठिकाने (हाटस्पाट) ऐसे हैं जहां बच्चें भीख मांगते हैं। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयो (डीसीपीसीआर) ने सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत मिली सूचना के मुताबिक आयोग ने साल 2021 में 48 ऐसे हाटस्पाट चिन्हित किए हैं जहां पर बच्चे भीख मांगते हैं। आयोग ने इन स्थानों से इस साल 76 बच्चों को बचाया है। आरटीआइ के तहत मिली जानकारी के अनुसार इसमें से 67 बच्चों को संबंधित जिले की संबंधित बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी) से बातचीत कर उनके परिवारों को सुपुर्द कर दिया गया है।

वहीं, नौ बच्चों को अस्थायी तौर पर बाल देखभाल संस्थान में रखा गया है। वहीं, इन सभी बच्चों की सामाजिक जांच भी जारी है। इसके साथ ही इन सभी 76 बच्चों के पुनर्वास के लिए डीसीपीसीआर और सीडब्ल्यूसी द्वारा कड़ी निगरानी की जा रही है। वहीं, आयोग के पास साल 2014 से लेकर साल 2019 तक के संबंधित आंकड़े उपलब्ध नहीं है।

केवल छह बच्चें ही स्कूलों में नामांकित हैं: इस साल भिक्षावृत्ति से बचाए गए कुल बच्चों में आयोग को केवल 16 बच्चों की सूचना मिली है कि वो स्कूलों में नामांकित है या नहीं। आरटीआई के मुताबिक इन 16 बच्चों से संबंधित जानकारी जब प्राप्त हुई तो पता चला कि केवल छह बच्चों का नाम स्कूलों में नामांकित है। वहीं, 50 बच्चों के बारे में अभी भी आयोग को बाल कल्याण समितियों से जानकारी प्राप्त होना बाकी है।

निगरानी की कमी से नहीं कम हो रहे हाटस्पाट:  कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन के प्रवक्ता और कार्यकारी निदेशक कार्यक्रम राकेश सेंगर ने कहा कि अगर कोई भी बच्चा किसी दबाव में या मजबूरी में भीख मांग रहा है तो उसकी सुरक्षा करना और उन्हें भिक्षावृत्ति से मुक्त कराकर स्कूलों में दाखिला कराना सरकार की जिम्मेदारी है। सेंगर ने कहा कि राजधानी में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से लेकर दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग का दफ्तर भी है।

लेकिन इसके बावजूद भी अगर साल 2021 में भी 48 ठिकाने ऐसे चिन्हित हुए हैं जहां बच्चे भीख मांगते हैं तो कहीं न कहीं डीसीपीसीआर की निगरानी की कमी है। उन्होंने कहा कि आयोग में शिकायतों पर त्वरित संज्ञान नहीं लिया जाता। सेंगर ने कहा कि आयोग को बाल कल्याण समितियों, बाल संरक्षण इकाइयों और पुलिस के साथ मिलकर योजना बनाने की जरूरत है जिसके तहत इन हाटस्पाट से भीख मांगने वाले सभी बच्चों की पहचान हो। साथ ही आयोग इस तरह ही योजनाओं पर अपनी कड़ी निगरानी भी रखें। उन्होंने कहा कि एक माह पहले उन्होंने डीसीपीसीआर के हेल्पलाइन नंबर पर दिल्ली के कुछ इलाकों में भीख मांगने वाले बच्चों की जानकारी दी थी लेकिन मामले में आज तक कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई।

जिलेवार चिन्हित हाटस्पाट-

नई दिल्ली: 8 दक्षिण पूर्वी दिल्ली: 8 दक्षिणी दिल्ली : 5 दक्षिण पश्चिम दिल्ली: 1 पश्चिमी दिल्ली: 7 मध्य दिल्ली: 12 उत्तरी दिल्ली: 4 पूर्वी दिल्ली: 3 कुल : 48

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